ere | Source: ereनई दिल्ली। लगातार पांच महीने तक अलग-अलग मुद्दों पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों के जरिए चर्चा में रहने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने फिलहाल अपने अभियान की रफ्तार धीमी करने के संकेत दिए हैं। पार्टी की अगुवाई कर रहे अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो जारी कर समर्थकों से कुछ समय के लिए आंदोलन से दूरी बनाने और अपने परिवार के साथ वक्त बिताने की अपील की है। उनके इस संदेश के बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने पर जोर देने वाले दीपके ने अचानक यह फैसला क्यों लिया? दीपके ने अपने करीब 16 मिनट के वीडियो संदेश में त्योहारों के दौरान परिवार के साथ रहने की बात कही। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पार्टी के दो प्रमुख सहयोगी आशुतोष रांका और सौरभ दास इस समय जेल में हैं और अपने परिवार के साथ त्योहार नहीं मना सकते। हालांकि, दीपके ने अपने संदेश में आंदोलन रोकने के पीछे किसी एक कारण को स्पष्ट रूप से जिम्मेदार नहीं बताया। ऐसे में उनके बयान, पार्टी के हालिया घटनाक्रम और दोनों सहयोगियों की न्यायिक हिरासत को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

NEET विवाद से शुरू हुआ सफर, लगातार आंदोलनों से सुर्खियों में आई CJP

कॉकरोच जनता पार्टी ने मई महीने के बाद से विभिन्न मुद्दों पर प्रदर्शन कर अपनी सक्रियता बनाए रखी है। पार्टी ने शुरुआत में NEET परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर आवाज उठाई और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। इस आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठाई गई। खबर के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही पार्टी ने अपना यह आंदोलन समाप्त किया। CJP ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक सफलता के रूप में देखा। इसके बाद पार्टी ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए स्कूल ठीक करो अभियान और आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान जैसे कार्यक्रम चलाए। इन अभियानों के जरिए पार्टी ने अपनी पहचान बनाने और सार्वजनिक मुद्दों पर दबाव बनाने की कोशिश की। लगातार सक्रियता के कारण अभिजीत दीपके और उनके साथियों की गतिविधियां चर्चा में बनी रहीं। बीते महीने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद पार्टी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की घोषणा की। पार्टी की योजना देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने की थी। हालांकि, इस बार उसका अभियान पहले की तरह प्रभावी नहीं हो सका। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं मिलने के बाद आंदोलन से जुड़ा घटनाक्रम और विवादित हो गया।

रांका और दास जेल में, क्या कमजोर पड़ गई आंदोलन की रणनीति?

अभिजीत दीपके के आंदोलन को फिलहाल विराम देने के फैसले के पीछे आशुतोष रांका और सौरभ दास की अनुपस्थिति को एक संभावित कारण माना जा रहा है। दोनों CJP के प्रमुख सहयोगियों में शामिल हैं। खबर के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद दोनों ने कथित तौर पर परिसर में जबरन प्रवेश करने की कोशिश की थी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर कार्रवाई की। दोनों को पहले पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में उनकी हिरासत तीन दिन और बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम ने पार्टी के आंदोलन को प्रभावित किया है। दीपके ने पहले एक बयान में कहा था कि CJP के आंदोलनों की रूपरेखा तैयार करने में आशुतोष रांका और सौरभ दास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में दोनों के जेल में रहने से पार्टी की संगठनात्मक और रणनीतिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, आंदोलन में आई कथित कमजोरी को ही विराम का निश्चित कारण नहीं कहा जा सकता। इससे पहले 16 अक्टूबर को पार्टी की ओर से निकाला गया तिरंगा मार्च भी अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाया था। ऐसे घटनाक्रमों के बीच नेतृत्व के सामने आंदोलन को आगे बढ़ाने, समर्थकों को सक्रिय रखने और अगले कार्यक्रमों की रणनीति तय करने जैसी चुनौतियां हो सकती हैं।

वीडियो में भावुक हुए दीपके, समर्थकों से क्या कहा?

अभिजीत दीपके ने अपने वीडियो संदेश में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे कुछ दिनों तक अपने परिवार के साथ समय बिताएं। उन्होंने त्योहारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल की घटनाओं के बाद समर्थकों के परिजन भी चिंतित होंगे। उनके मुताबिक, ऐसे समय में परिवार के साथ रहना जरूरी है। दीपके ने आशुतोष रांका और सौरभ दास का जिक्र करते हुए कहा, “मैं चाहता हूं कि आप त्योहारों पर अपनों के साथ रहें, लेकिन सौरव और आशुतोष को भी याद रखें, क्योंकि वे अपने परिवार के पास नहीं जा सकते। अब वे ही हमारा परिवार हैं।” इस बयान में दीपके ने एक ओर समर्थकों को परिवार के साथ समय बिताने की सलाह दी, वहीं दूसरी ओर जेल में बंद अपने साथियों के प्रति एकजुटता दिखाने की अपील भी की। उनके संदेश से यह संकेत मिलता है कि पार्टी कुछ समय के लिए सार्वजनिक प्रदर्शनों की गतिविधियां सीमित कर सकती है। हालांकि, आंदोलन को स्थायी रूप से समाप्त करने की कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है।

क्या दिवाली तक रुकेगा आंदोलन?

दीपके के संदेश के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि CJP दिवाली तक अपने आंदोलन को विराम दे सकती है। त्योहार के दौरान समर्थकों को परिवार के साथ रहने की सलाह और दोनों सहयोगियों की जेल में मौजूदगी को इस संभावना से जोड़कर देखा जा रहा है। फिर भी, पार्टी की ओर से आंदोलन दोबारा शुरू करने की कोई निश्चित तारीख घोषित किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस संभावित विराम के पीछे संगठनात्मक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। पार्टी के दो प्रमुख सहयोगियों की अनुपस्थिति, हालिया प्रदर्शन का अपेक्षाकृत कमजोर असर और आगामी कार्यक्रमों की तैयारी जैसे पहलुओं पर नेतृत्व को नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। लेकिन इन कारणों को पार्टी के आधिकारिक निर्णय का घोषित आधार मानना सही नहीं होगा।

बांग्लादेश और फ्रांस के प्रदर्शनों से तुलना ने क्यों बढ़ाई चर्चा?

CJP के आंदोलन को लेकर एक अन्य बहस अंतरराष्ट्रीय विरोध प्रदर्शनों से उसकी तुलना को लेकर भी सामने आई है। खबर के मुताबिक, पार्टी के आंदोलन की तुलना फ्रांस और अल्बानिया जैसे देशों में हुए प्रदर्शनों से की जा रही है। इसके साथ ही सत्ता परिवर्तन से जुड़े शब्दों और राजनीतिक आरोपों को लेकर भी विवाद पैदा हुआ है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के मंगलवार को दिए गए बयान का भी इस संदर्भ में उल्लेख किया गया है। खबर में उनके बयान के हवाले से कहा गया है कि भारत में नेपाल और बांग्लादेश की तरह सत्ता परिवर्तन की साजिश रची जा रही है। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि में CJP के आंदोलन को लेकर उठ रहे सवालों ने चर्चा को और बढ़ा दिया है। हालांकि, CJP के आंदोलन को लेकर बांग्लादेश जैसी परिस्थितियों से जोड़कर की जा रही तुलना और पार्टी की ओर से आंदोलन रोकने के फैसले के बीच प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। यह कहना भी उचित नहीं होगा कि दीपके ने केवल इसी विवाद के कारण आंदोलन रोकने का निर्णय लिया है। फिलहाल यह पहलू राजनीतिक चर्चा और संभावित वजहों तक सीमित है।

क्या आगे की रणनीति बनाने के लिए समय ले रहे हैं दीपके?

एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि CJP नेतृत्व मौजूदा परिस्थितियों का आकलन करने और आगे की रणनीति तैयार करने के लिए समय लेना चाहता है। खबर में यह संभावना व्यक्त की गई है कि पार्टी को उम्मीद हो सकती है कि दिवाली तक आशुतोष रांका और सौरभ दास को जमानत मिल जाए। हालांकि, उनकी जमानत को लेकर किसी निश्चित नतीजे या तारीख की पुष्टि नहीं है। यदि दोनों सहयोगी बाहर आते हैं, तो पार्टी की आगामी गतिविधियों और आंदोलन की रणनीति पर उसका असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि उनकी न्यायिक हिरासत जारी रहती है, तो संगठन को अपने कार्यक्रमों और नेतृत्व संबंधी जिम्मेदारियों की दोबारा व्यवस्था करनी पड़ सकती है। फिलहाल इन संभावनाओं पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।