तमिलनाडु। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार इन दिनों नर्सों के आंदोलन को लेकर विवादों में घिरती नजर आ रही है। राज्य में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहीं हजारों नर्सों ने सरकार पर बातचीत के नाम पर धोखा देने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि सरकार की ओर से बातचीत का न्योता मिलने के बाद उनके प्रतिनिधि सचिवालय पहुंचे, लेकिन वहां बातचीत करने के बजाय उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
बातचीत की उम्मीद लेकर सचिवालय पहुंचे थे पांच प्रतिनिधि
तमिलनाडु इंटरमीडिएट हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में नर्स और स्वास्थ्यकर्मी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की ओर से कानूनी पैरवी कर रहे अधिवक्ता वरदराजन के मुताबिक, सरकार की ओर से बातचीत के लिए बुलावा भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने आंदोलनकारियों को दी थी।
इसके बाद प्रदर्शन कर रहे नर्सों ने अपने पांच प्रमुख प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए भेजा। आरोप है कि जैसे ही ये प्रतिनिधि सचिवालय पहुंचे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के बाद आंदोलनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
वकील ने सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों के वकील वरदराजन ने सरकार की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि बातचीत के नाम पर प्रतिनिधियों को बुलाकर गिरफ्तार करना आंदोलनकारियों के साथ बड़ा धोखा है।
वरदराजन ने कहा कि पुलिस और सरकार के इस रवैये के बावजूद आंदोलन को रोका नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि आंदोलन में शामिल किसी नर्स के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री विजय की सरकार की होगी।
करीब 4 हजार नर्सें मांगों को लेकर आंदोलनरत
नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों का यह आंदोलन तमिलनाडु के कई हिस्सों में फैल चुका है। प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 4 हजार बताई जा रही है। आंदोलनकारी लंबे समय से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में काम करने वाले इंटरमीडिएट स्वास्थ्य कर्मियों और नर्सों की समस्याओं को उठाते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वेतन और नौकरी से जुड़ी समस्याओं का समाधान किए बिना केवल आश्वासन देने से आंदोलन खत्म नहीं होगा।
45 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और नियमित नौकरी की मांग
आंदोलन कर रही नर्सों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ाकर 45 हजार रुपये करना शामिल है। इसके अलावा वे अपनी नौकरी को स्थायी करने और बेहतर नौकरी सुरक्षा देने की मांग भी कर रही हैं।
नर्सों का कहना है कि लंबे समय से लंबित प्रोत्साहन राशि यानी इंसेंटिव का भुगतान भी किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उनकी मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
भूख हड़ताल कर रहीं नर्सों पर भी पुलिस की कार्रवाई
चेन्नई के राजरत्नम स्टेडियम के पास कई नर्सें अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी थीं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया था कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, वे धरना समाप्त नहीं करेंगी।
पुलिस के अनुसार, निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शनकारी वहां से नहीं हटे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई नर्सों को हिरासत में लिया और उन्हें बसों के जरिए वहां से हटाया गया।
सरकार और नर्सों के बीच टकराव बढ़ने के आसार
बातचीत के लिए बुलाए गए प्रतिनिधियों की कथित गिरफ्तारी और भूख हड़ताल कर रहीं नर्सों को हिरासत में लिए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। आंदोलनकारी इसे सरकार की दमनात्मक कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि निर्धारित अनुमति और समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों को हटाया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार और आंदोलन कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या टकराव आगे और बढ़ता है। फिलहाल नर्सों की गिरफ्तारी के आरोप ने मुख्यमंत्री विजय सरकार को विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के निशाने पर ला दिया है।
