erer | Source: eerrरांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब और तेज होता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों के बीच शनिवार को हुई दूसरे दौर की बातचीत भी किसी ठोस समाधान तक नहीं पहुंच सकी। वार्ता विफल रहने के बाद प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के विधायक जयराम महतो ने भी आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में 9 अगस्त को एक दिवसीय अनशन करने की घोषणा कर दी है।

सरकार और छात्रों के बीच फिर नहीं बनी सहमति

भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से रांची में प्रदर्शन चल रहा है। शनिवार को हेमंत सोरेन सरकार की ओर से गठित पांच सदस्यीय समिति ने अलग-अलग छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारी प्रतिनिधिमंडलों के साथ बातचीत की। सरकार की ओर से समाधान निकालने की कोशिश की गई, लेकिन बैठक में प्रदर्शनकारियों की मांगों पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी।

सरकारी समिति ने सबसे पहले जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारी गुट के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इसके बाद कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई, एसीएस और जेसीएम के प्रतिनिधिमंडलों के साथ भी बातचीत की गई। हालांकि, विभिन्न दौर की बैठकों के बावजूद आंदोलन समाप्त कराने का रास्ता नहीं निकल पाया।

14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने समेत कई मांगों पर अड़े छात्र

प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों की प्रमुख मांगों में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करना शामिल है। इसके साथ ही उस एजेंसी की ओर से आयोजित अन्य परीक्षाओं को भी रद्द करने की मांग उठाई जा रही है, जिनमें कथित तौर पर गड़बड़ी होने का आरोप लगाया गया है।

देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले छात्र गुट का कहना है कि अभ्यर्थी पिछले करीब दो सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।

सरकार ने माना- प्रदर्शनकारियों की मांगें जायज

इससे पहले शुक्रवार रात को राज्य सरकार और JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के प्रतिनिधिमंडल के बीच पहले दौर की बातचीत हुई थी। इस बैठक के बाद समिति के सदस्य और राज्य के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों की मांगें जायज हैं। उन्होंने कहा कि इन मांगों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने रखा जाएगा।

वहीं, सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की छात्र इकाई झारखंड छात्र मोर्चा (JCM) की ओर से भी सरकार के सामने पांच मांगें रखी गई हैं। इनमें 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की मांग भी शामिल है।

दो घंटे चली बैठक, फिर भी नहीं निकला समाधान

सरकार की समिति और देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले JPSC-JSSC अभ्यर्थी गुट के बीच शनिवार को हुई बैठक करीब दो घंटे तक चली। बैठक के बाद मंच से जुड़े एक नेता ने कहा कि सरकार ने उनके मुद्दों के समाधान के लिए जल्द निर्णय लेने का भरोसा दिया है।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनकी मांगों पर जब तक ठोस फैसला नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। इससे साफ है कि सरकार और छात्र संगठनों के बीच अभी भी प्रमुख मुद्दों पर सहमति का अभाव बना हुआ है।

रविवार को होगी अंतिम दौर की बातचीत

शनिवार की बातचीत के बाद अब सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच रविवार, 9 अगस्त को अंतिम दौर की वार्ता प्रस्तावित है। ग्रामीण विकास मंत्री और सरकारी समिति की सदस्य दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि छात्र संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ हुई विभिन्न बैठकों में सामने आई मांगों से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अवगत कराया गया है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ बैठक में यह फैसला लिया गया है कि प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ अंतिम दौर की बातचीत रविवार दोपहर 12 बजे होगी। अब सभी की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं कि सरकार और छात्र संगठनों के बीच किसी समाधान पर सहमति बनती है या नहीं।

देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ी

आंदोलन के बीच प्रदर्शनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। महतो ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में बताया कि उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही है। उनके अनुसार, उनका रक्तचाप और रक्त शर्करा दोनों का स्तर गिर रहा है। डॉक्टरों ने छाती में संक्रमण की जानकारी दी है और अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है।

देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यदि यही स्थिति जारी रही तो उनके लिए यह खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बताया कि अब वह धीरे-धीरे बोल पा रहे हैं। उन्होंने सरकार से छात्र संगठनों की मांगों को तत्काल स्वीकार करने की अपील की है।

NSUI ने सरकार के सामने रखीं छह मांगें

आंदोलन में शामिल NSUI ने भी सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। NSUI के प्रवक्ता संजीव शाह के अनुसार, संगठन ने कुल छह मांगें सरकार के सामने रखी हैं। इनमें सभी JPSC और JSSC परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर CID जांच कराने की मांग शामिल है।

इसके अलावा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की तर्ज पर झारखंड में झारखंड परीक्षा एजेंसी (JTA) गठित करने की मांग भी की गई है। संगठन का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करने के लिए इन मांगों पर विचार किया जाना जरूरी है।

आदिवासी छात्र संघ ने भाषाओं से जुड़ी मांग उठाई

आदिवासी छात्र संघ की ओर से भी भर्ती परीक्षाओं को लेकर अपनी मांग सरकार के सामने रखी गई है। संगठन के नेता कार्तिक उरांव ने बताया कि उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को योग्यता परीक्षा के रूप में शामिल करने की मांग की है।

इसके साथ ही जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी होने का आरोप है, उन्हें रद्द करने की मांग भी रखी गई है। अलग-अलग छात्र संगठनों की मांगों से स्पष्ट है कि आंदोलन में परीक्षा प्रक्रिया, जांच और भर्ती व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे शामिल हैं।

जयराम महतो ने किया एक दिवसीय अनशन का ऐलान

इसी बीच JLKM विधायक जयराम महतो ने आंदोलन को समर्थन देते हुए 9 अगस्त को एक दिवसीय अनशन करने की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार, जयराम महतो रविवार सुबह 6 बजे रांची स्थित पुराने विधानसभा परिसर में निर्जला उपवास शुरू करेंगे।

उन्होंने बताया कि यह अनशन उन छात्रों के समर्थन में होगा, जो पिछले 15 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। जयराम महतो के अनशन के ऐलान के बाद आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की तस्वीर भी सामने आई है।

अब 9 अगस्त की वार्ता पर टिकी निगाहें

JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा आंदोलन अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सरकार और छात्रों के बीच रविवार की बातचीत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक तरफ प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार ने अंतिम दौर की वार्ता के लिए समय निर्धारित किया है।

इस बीच देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ती तबीयत और जयराम महतो के अनशन के ऐलान ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 9 अगस्त को दोपहर 12 बजे होने वाली अंतिम बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलेगा या छात्र संगठनों का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। फिलहाल प्रदर्शनकारी अपनी मांगें पूरी होने तक पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं।