erer | Source: ererनई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने जुलाई में NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन और मौजूदा प्रदर्शन के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि समय के साथ मुद्दे बदल गए हैं। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अब प्रदर्शनकारियों की पहचान, उनके संगठन और आंदोलन के उद्देश्य को लेकर सवाल उठ सकते हैं। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन का जिक्र करते हुए कहा कि यह बैलेट यानी चुनाव के माध्यम से होता है।

NEET आंदोलन और मौजूदा प्रदर्शन में क्या है अंतर?

दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने CJP नेताओं की ओर से पेश वकील के सामने जुलाई में NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का उदाहरण रखा। अदालत ने समझाया कि उस समय आंदोलन का स्वरूप छात्र आंदोलन का था, जबकि मौजूदा मामले में मुद्दा अलग है। न्यायाधीश ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोग वही हो सकते हैं, लेकिन आंदोलन का विषय बदलने से उससे जुड़े सवाल भी बदल जाते हैं। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा, “तब (जुलाई में) यह एक छात्र आंदोलन था। तब बच्चे थे वहां और अब मुद्दा अलग है। लोग वही हैं, मुद्दा बदल रहा है। सही है?” इसके बाद अदालत ने संकेत दिया कि मौजूदा प्रदर्शन के संदर्भ में प्रदर्शनकारियों की पहचान, उनकी भूमिका और संगठन के उद्देश्य को लेकर सवाल पूछे जा सकते हैं।

अदालत ने CJP से कहा—अब आपके संगठन और उद्देश्य पर भी होंगे सवाल

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि मौजूदा मामले में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शन में शामिल लोग कौन हैं, उनकी भूमिका क्या है और संबंधित संस्था का उद्देश्य क्या है। उन्होंने कहा, “अगला सवाल होगा कि आप कौन हैं, आप क्या हैं? आपका क्या संबंध है? आपकी संस्था का उद्देश्य क्या है? कृपया समझिए जब शांति और व्यवस्था को लेकर आशंका होगी तो इन सभी सवालों के महत्व होंगे।” अदालत की इस टिप्पणी का मुख्य संदर्भ प्रदर्शन के स्वरूप और उससे उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था संबंधी आशंकाओं से था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी आंदोलन को समझने के लिए केवल उसमें शामिल लोगों को देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके उद्देश्य और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

‘रेजीम चेंज’ पर अदालत की टिप्पणी ने खींचा ध्यान

सुनवाई के दौरान ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर हुई चर्चा का भी उल्लेख हुआ। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि सत्ता परिवर्तन बैलेट यानी चुनाव के जरिए होता है। अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई, जब CJP नेताओं की याचिका पर सुनवाई हो रही थी और प्रदर्शन के संदर्भ में उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की जा रही थी। हालांकि, अदालत ने इस टिप्पणी के जरिए मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया। सुनवाई का प्रमुख पहलू यह था कि याचिकाकर्ताओं को अपनी शिकायत के निवारण के लिए पहले संबंधित न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

CJP नेताओं ने वापस ली न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका

कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। दोनों की ओर से मंगलवार को याचिका दाखिल कर उसी रात सुनवाई किए जाने की मांग की गई थी। हालांकि, अवकाश के कारण उस समय सुनवाई संभव नहीं हो सकी। इसके बाद बुधवार सुबह मामले को न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों नेताओं को पहले विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष होने वाली सुनवाई का परिणाम देखने की सलाह दी। बुधवार को ही एसईएम के सामने उनकी पेशी निर्धारित थी। अदालत ने कहा कि यदि वहां की सुनवाई के बाद भी उनकी शिकायत बनी रहती है, तो वे उचित अपीलीय अदालत का रुख कर सकते हैं। न्यायालय ने सौरभ दास और आशुतोष रांका को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। साथ ही स्पष्ट किया कि याचिका वापस लेने की अनुमति देते समय मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

अनुच्छेद 226 के तहत याचिका पर अदालत ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करना उचित कानूनी उपाय नहीं है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे पहले विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष निर्धारित सुनवाई का इंतजार करें और उसके बाद उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करें। अदालत के रुख से स्पष्ट हुआ कि हिरासत से संबंधित शिकायतों के मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उपलब्ध उपायों को ध्यान में रखना जरूरी है। हालांकि, याचिका वापस लिए जाने के कारण हाई कोर्ट ने मामले के मूल विवाद पर कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया।

13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सौरभ दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर 2026 को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि दोनों प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित किए जा चुके जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से प्रवेश कर गए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इस घटना के बाद दोनों के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गईं और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पहले पांच दिन और फिर दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। इसी हिरासत को चुनौती देने के लिए दोनों नेताओं ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अब आगे क्या होगा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने CJP नेताओं को पहले विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई का परिणाम देखने की सलाह दी है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि उनकी शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो वे अपीलीय अदालत में जा सकते हैं। इस तरह बुधवार की सुनवाई में याचिका वापस लेने की अनुमति दी गई, लेकिन हिरासत से जुड़े विवाद पर हाई कोर्ट की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया।