नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी और किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख विजय माल्या की ओर से बैंकों से रकम वापस करने की मांग के बीच मामला एक बार फिर बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया है। माल्या का कहना है कि बैंकों ने उनके बकाये से अधिक राशि वसूल कर ली है, जबकि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह ने अदालत में अलग तस्वीर पेश की है। बैंकों के मुताबिक 31 अगस्त तक माल्या पर 8,751.86 करोड़ रुपये की रकम अभी भी बकाया थी।
माल्या लंबे समय से ब्रिटेन में रह रहे हैं और उनके खिलाफ भारत में किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े बैंक ऋण और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले चल रहे हैं। अब बैंकों द्वारा अदालत में दिए गए आंकड़ों के बाद उनके रिफंड के दावे पर एक बार फिर कानूनी बहस तेज हो गई है।
माल्या ने क्यों मांगा बैंकों से रिफंड?
विजय माल्या ने वर्ष 2020 में बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को समाप्त करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि बैंकों ने उनका पूरा बकाया वसूल कर लिया है और बैंकिंग विवाद का निपटारा हो चुका है।
माल्या की ओर से यह भी दावा किया गया कि बैंकों को जितनी राशि वसूल करनी थी, उससे अधिक रकम और संपत्तियां उनके मामले में बरामद की जा चुकी हैं। इसी आधार पर उन्होंने अपने खिलाफ जारी कार्रवाई को समाप्त करने की मांग की।
SBI ने कोर्ट में बताया- अभी भी ₹8,752 करोड़ की देनदारी
बैंकों ने हाई कोर्ट के सामने दाखिल हलफनामे में माल्या के दावे से अलग आंकड़े पेश किए। बैंकों के मुताबिक डेट रिकवरी ऑफिसर के माध्यम से अब तक करीब 10,270 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि माल्या की पूरी कानूनी देनदारी समाप्त हो गई है।
बैंकों ने बताया कि 31 अगस्त तक कानूनी और अन्य खर्चों को छोड़कर माल्या पर 8,751.86 करोड़ रुपये की रकम बकाया थी। जनवरी 2026 में दाखिल पिछले हलफनामे में यह बकाया राशि 8,135.63 करोड़ रुपये बताई गई थी।
10,270 करोड़ की वसूली के बाद भी बकाया कैसे?
बैंकों के मुताबिक रिकवरी के आंकड़े को केवल अब तक वसूल की गई राशि से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। लेंडर्स का कहना है कि डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया, रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत देनदारी और कानूनी खर्च सहित कई पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है।
बैंकों ने यह भी बताया कि डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल में मामला दाखिल होने से पहले 544.58 करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। इसके अलावा कुछ ऐसी संपत्तियां और शेयर भी हैं, जिन्हें अटैच किया गया है लेकिन अभी तक बेचा नहीं गया है।
ED ने भी कोर्ट के सामने रखा अपना पक्ष
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत में कहा कि करीब 14,132 करोड़ रुपये की संपत्तियां SBI को वापस की जा चुकी हैं। हालांकि, एजेंसी के मुताबिक संपत्तियों की रिकवरी होने से आपराधिक कार्यवाही अपने आप खत्म नहीं होती।
ED का कहना है कि कर्ज की वसूली से बैंकों के सिविल दावों का निपटारा प्रभावित हो सकता है, लेकिन धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही का अपना अलग कानूनी आधार है। किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए ऋण से जुड़े बैंक धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और धन शोधन के मामलों की जांच ED और CBI कर चुके हैं।
13 अक्टूबर को फिर होगी मामले की सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होने की जानकारी सामने आई है। अब अदालत के सामने मुख्य सवालों में यह भी शामिल है कि बैंकों की ओर से बताई गई बकाया रकम और माल्या द्वारा किए गए अधिक वसूली के दावे को कानूनी तौर पर किस तरह देखा जाए।
मामले में बैंकों, ED और विजय माल्या की ओर से अलग-अलग दावे और कानूनी तर्क सामने आए हैं। ऐसे में अंतिम स्थिति अदालत की कार्यवाही और आगे आने वाले आदेशों से स्पष्ट होगी।
