ere | Source: ereनई दिल्ली। लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना पुराना वीडियो साझा कर पीस बॉन्ड को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि करीब चार साल पहले प्रशासन ने उन्हें भी पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव में लिया था। हालांकि, उन्होंने अधिकारियों की शर्तें मानने से इनकार कर दिया था। वांगचुक ने सोशल मीडिया पर कहा कि लोगों की भलाई के लिए संघर्ष करने वाले हर व्यक्ति को एक बार जेल जाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

पीस बॉन्ड को लेकर शुरू हुई नई बहस

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने और सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन करने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को हिरासत में लिया गया था। पार्टी के सौरभ दास, अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद रिहा किया गया। इसी घटनाक्रम के बीच सोनम वांगचुक ने अपना पुराना वीडियो साझा कर प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

चार साल पहले खुद भी झेल चुके हैं ऐसी स्थिति

वांगचुक ने बताया कि करीब चार साल पहले उन्हें भी नजरबंद किया गया था। उस दौरान अधिकारियों की ओर से उन्हें लंबे समय तक जेल में रखने की चेतावनी दी गई थी। इसी दौरान उनसे एक ऐसा बॉन्ड भरने को कहा गया, जिसमें सार्वजनिक सभाओं में शामिल होने और भाषण देने जैसी गतिविधियों से दूर रहने की शर्तें शामिल थीं। वांगचुक ने उस समय इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसे अब उन्होंने दोबारा साझा किया है।

वीडियो में अधिकारियों के सामने रखी थी अपनी बात

27 जनवरी 2023 के वीडियो में सोनम वांगचुक बताते हैं कि जब उन्होंने अवैध नजरबंदी और तत्कालीन उपराज्यपाल की कथित मनमानी के खिलाफ बोलना शुरू किया, तभी एक अधिकारी ने उन्हें बॉन्ड का कागज सौंप दिया। इस दस्तावेज में सार्वजनिक सभा में शामिल नहीं होने, भाषण नहीं देने और संबंधित गतिविधियों से दूर रहने जैसी शर्तें रखी गई थीं।

वांगचुक ने कहा कि इस तरह की शर्तें स्वीकार करने का मतलब संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अधिकारों को छोड़ना था। इसके साथ ही 50 हजार रुपये जमा करने की बात भी कही गई थी। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया था कि यदि वह रकम जमा नहीं करते तो क्या होगा? उनके मुताबिक, जो व्यक्ति अपने उद्देश्य के लिए मरने से नहीं डरता, वह हिरासत से क्यों डरेगा?

पुलिस की तैनाती और ठंड को लेकर भी उठाए सवाल

वीडियो में वांगचुक ने अपनी नजरबंदी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वहां कई पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी और माइनस 10 डिग्री तापमान में जवान लगातार ड्यूटी कर रहे थे। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि इतनी ठंड में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए कम से कम तंबू की व्यवस्था तो की जानी चाहिए थी।

नेहा बोरा ने भी पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से किया इनकार

इस पूरे घटनाक्रम में नेहा बोरा का नाम भी सामने आया है। बताया गया कि उनसे भी पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने एसईएम कोर्ट में इसे स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। दूसरी ओर, सीजेपी के सौरभ दास, अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका ने बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए और इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

एक नवंबर की रैली पर टिकी निगाहें

विपक्ष की ओर से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी है। इस आयोजन को सीजेपी और नेहा बोरा ने समर्थन दिया है। हालांकि, सीजेपी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पार्टी का कोई नेता इस रैली में शामिल नहीं होगा। ऐसे में सोनम वांगचुक के पुराने वीडियो के सामने आने के बाद पीस बॉन्ड और नागरिक अधिकारों को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।