पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव लंबे समय बाद अपने पुराने राजनीतिक तेवर में नजर आए। कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर लालू यादव ने भगवान कृष्ण के जन्म और संघर्ष का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने पुराने संसदीय भाषण का वीडियो भी एक्स पर साझा किया, जिसमें उन्होंने जेल, गरीबों, दलितों और सामाजिक न्याय की राजनीति से जुड़े अपने विचार रखे थे।
‘जेल हमारा गुरुद्वारा है’, लालू यादव का बड़ा बयान
लालू प्रसाद यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण से डरकर कंस ने उनके माता-पिता को जेल में बंद कर दिया था। कृष्ण का जन्म भी जेल में हुआ और उन्होंने वहां से निकलकर समाज की लड़ाई लड़ी। लालू यादव ने कृष्ण के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने पाखंडवाद के खिलाफ आवाज उठाई, गोवर्धन पर्वत को अंगुली पर उठाया और अत्याचारी कंस का वध किया।
इसी संदर्भ में लालू यादव ने अपनी राजनीतिक लड़ाई का उल्लेख करते हुए कहा कि वह नल, नील, कोल, भील, गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए लड़ते हैं और यही उनका कथित ‘कसूर’ है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे आज के कंस यह सोचते हैं कि उन्हें जेल से डराया जा सकता है और CBI, ED तथा IT के सामने झुकाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है।
लालू यादव ने इसी क्रम में कहा, ‘जेल हमारा गुरुद्वारा है। हम इनके जेल के खेल से नहीं डरते हैं।’
BJP पर धर्म को लेकर तीखा हमला
लालू यादव ने BJP पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश को धर्म का पाठ पढ़ाने वाले ‘पाखंडी भाजपाइयों’ ने धर्म का नाश कर दिया है। उन्होंने यमुना नदी की स्थिति को लेकर भी BJP और केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
लालू यादव ने आरोप लगाया कि यमुना की सफाई के नाम पर अरबों रुपये खर्च या लूटे जाने के बावजूद गंगा और यमुना साफ नहीं हुईं। उन्होंने राम मंदिर के चंदे को लेकर भी आरोप लगाया और कहा कि ‘राममंदिर का चंदा चोरी’ कर लिया गया। ये आरोप लालू यादव के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
पुराने संसद भाषण का वीडियो किया साझा
कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर लालू यादव ने एक्स पर अपना एक पुराना वीडियो भी साझा किया। इस वीडियो में वह संसद में बोलते हुए नजर आ रहे हैं। अपने भाषण में उन्होंने उन सवालों का जिक्र किया, जिनमें उनसे पूछा गया था कि वह बार-बार जेल क्यों जाते हैं।
वीडियो में लालू यादव कहते दिखाई देते हैं कि जब उनसे पूछा गया कि वह बार-बार जेल क्यों जाते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया था कि यह पूछना सवाल करने वाले का दुर्भाग्य है। इसके बाद उन्होंने भगवान कृष्ण के जेल में जन्म लेने का उल्लेख करते हुए कहा था कि जेल उनका ‘गुरुद्वारा’ है।
गरीबों और दलितों के लिए लड़ने को बताया अपना ‘कसूर’
अपने पुराने भाषण में लालू यादव ने गरीबों और दलितों को जागरूक करने को अपनी राजनीति का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने गरीबों और दलितों को जगाने का काम किया और यही उनका ‘कसूर’ बन गया।
लालू यादव के इस बयान में सामाजिक न्याय की उनकी राजनीति की झलक दिखाई दी। उन्होंने भगवान कृष्ण के जन्म और कंस के अत्याचार का उदाहरण देते हुए अपने राजनीतिक संघर्ष को भी उसी संदर्भ में प्रस्तुत किया।
यमुना नदी की हालत पर लालू यादव ने जताई चिंता
लालू यादव ने भगवान कृष्ण और यमुना नदी के संबंध का उल्लेख करते हुए नदी की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने अपने पुराने संसद भाषण में कहा था कि जब वासुदेव भगवान कृष्ण को लेकर जा रहे थे, तब यमुना उनके चरण पखारने की प्रतीक्षा कर रही थी।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण को छिपाकर ले जाते समय यमुना ने उनके चरण स्पर्श किए थे और इस प्रसंग को उन्होंने धार्मिक आस्था से जोड़कर बताया। इसके बाद उन्होंने यमुना की वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आज नदी में नाले बह रहे हैं।
‘22 किलोमीटर तक जाकर देखिए’, यमुना पर सवाल
अपने पुराने भाषण में लालू यादव ने यमुना की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यहां से लेकर 22 किलोमीटर तक जाकर देखा जाए तो नदी की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि यमुना और गंगा की स्थिति देखकर सिर झुक जाता है।
लालू यादव ने प्रयागराज का भी उल्लेख करते हुए नदी की स्थिति को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि नदियों की खराब स्थिति के बीच साधु, संत और नागा भी उसी वातावरण का सामना कर रहे हैं।
कृष्ण को बताया अपने वंश का हिस्सा
लालू यादव ने अपने बयान में भगवान कृष्ण को अपने वंश और खानदान से जोड़ते हुए कहा कि कृष्ण भगवान उनके पुरखे हैं। उन्होंने कहा कि मथुरा में कृष्ण ने कंस का वध किया और उसके बाद अपनी राजधानी कायम की।
उन्होंने यमुना नदी में नालों के गिरने का जिक्र करते हुए कहा कि आज यमुना में नौ-नौ नाले बह रहे हैं और इन्हें देखने वाला कोई नहीं है। लालू यादव ने अपने बयान में धार्मिक परंपरा और कृष्ण से जुड़े प्रसंगों को अपनी सामाजिक और राजनीतिक विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की।
‘असली पंडित हमारे कृष्ण हैं’
लालू यादव ने भगवान कृष्ण और गीता के संदर्भ में भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके खानदान और जाति-बिरादरी से जुड़े ग्रंथों में कृष्ण का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि कृष्ण भगवान ने दुनिया को गीता का पाठ पढ़ाया और उसके मर्म को समझाया।
लालू यादव ने कहा कि दूसरे किसी ने ऐसा नहीं किया और उनके अनुसार कृष्ण ने पूरी दुनिया को गीता का मर्म समझाया। इसी क्रम में उन्होंने भगवान कृष्ण को ‘असली पंडित’ बताया।
लंबे समय बाद फिर नजर आया पुराना राजनीतिक तेवर
किडनी प्रत्यारोपण के बाद लालू प्रसाद यादव सार्वजनिक जीवन में पहले की तुलना में कम सक्रिय नजर आते रहे हैं। हालांकि, कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर उनका यह बयान और पुराने संसद भाषण का वीडियो साझा करना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
इस दौरान लालू यादव ने धार्मिक प्रतीकों और भगवान कृष्ण के प्रसंगों के जरिए सामाजिक न्याय, गरीबों और दलितों की राजनीति का मुद्दा उठाया। साथ ही उन्होंने BJP और केंद्र सरकार पर कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए।
जेल, कृष्ण और सामाजिक न्याय को जोड़ा
लालू यादव के पूरे बयान में भगवान कृष्ण के जेल में जन्म लेने के प्रसंग और अपने राजनीतिक जीवन में जेल जाने की घटनाओं के बीच समानता स्थापित करने की कोशिश दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह कृष्ण ने जेल से निकलकर अत्याचार के खिलाफ संघर्ष किया, उसी तरह वह भी अपने राजनीतिक संघर्ष से पीछे नहीं हटे।
उनका ‘जेल हमारा गुरुद्वारा है’ वाला बयान इसी राजनीतिक संदर्भ में सामने आया। उन्होंने CBI, ED और IT जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का नाम लेते हुए कहा कि इन माध्यमों के जरिए उन्हें डराया या झुकाया नहीं जा सकता।
