नई दिल्ली। देशभर की विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए होने वाली कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) को लेकर 2027 में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) परीक्षा के मौजूदा प्रारूप को बदलने की तैयारी में है। प्रस्तावित बदलावों के तहत एक छात्र की CUET-UG परीक्षा एक ही दिन में पूरी कराने, प्रत्येक विषय के लिए परीक्षा अवधि घटाने और प्रश्नों की संख्या कम करने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा अधिकतम पांच विषयों की जगह चार विषयों का विकल्प देने की संभावना पर भी विचार चल रहा है।
अब कई दिनों तक परीक्षा केंद्र जाने की जरूरत नहीं
CUET-UG में हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल होते हैं। वर्ष 2026 की परीक्षा के लिए 15,68,866 छात्रों ने आवेदन किया था। मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग विषयों की परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को दो या तीन दिन तक परीक्षा केंद्र जाना पड़ सकता है। कई बार परीक्षा केंद्र भी अलग-अलग होते हैं। प्रस्तावित नई व्यवस्था लागू होने पर एक छात्र की सभी विषयों की परीक्षा एक ही दिन में पूरी कराने की योजना है।
बताया जा रहा है कि परीक्षा के लिए 12 से 15 दिनों की जो समय-सीमा उपलब्ध होगी, उसमें प्रत्येक छात्र को एक ही दिन परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को बार-बार परीक्षा केंद्र जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे उनका समय और परीक्षा से जुड़े खर्च दोनों बच सकते हैं।
‘वन स्टूडेंट-वन डे’ परीक्षा का प्रस्ताव
CUET-UG के परीक्षा प्रारूप में बदलाव को लेकर तैयार किए जा रहे रोडमैप पर विशेषज्ञों के बीच सहमति बनने की बात सामने आई है। हालांकि, बदलावों को लेकर अंतिम दिशा-निर्देश अभी जारी नहीं हुए हैं और आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार यदि कोई विद्यार्थी पांच विषयों की परीक्षा देता है तो सभी पांचों विषयों के पेपर एक ही दिन में आयोजित किए जा सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक विषय की परीक्षा की अवधि मौजूदा 60 मिनट से घटाकर लगभग 40 से 45 मिनट करने की तैयारी है।
60 मिनट की जगह 40-45 मिनट का हो सकता है पेपर
फिलहाल CUET-UG में प्रत्येक विषय की परीक्षा 60 मिनट की होती है। नए प्रारूप में इसे घटाकर 40 से 45 मिनट किए जाने की संभावना है। इस बदलाव का सीधा असर परीक्षा की कुल अवधि पर भी पड़ेगा।
यदि पांच विषयों की परीक्षा का विकल्प बरकरार रहता है और प्रत्येक पेपर 40 मिनट का होता है, तो छात्र अधिकतम 200 मिनट यानी 3 घंटे 20 मिनट में अपनी परीक्षा पूरी कर सकेगा। वहीं, चार विषय लेने वाले विद्यार्थी 160 मिनट यानी 2 घंटे 40 मिनट में परीक्षा समाप्त कर सकते हैं।
अंतिम दिशा-निर्देशों में परीक्षा के समय, विषयों की संख्या और पूरे परीक्षा प्रारूप की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
5 की जगह 4 विषयों का विकल्प देने पर भी विचार
CUET-UG में फिलहाल एक विद्यार्थी अधिकतम पांच विषयों की परीक्षा दे सकता है। अब इस संख्या को घटाकर चार करने की संभावना पर भी मंथन किया जा रहा है। शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में यूजीसी, एनटीए और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में इस विकल्प पर विचार करने की बात सामने आई है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को अधिक सरल और कम समय लेने वाला बनाना बताया जा रहा है। हालांकि, पांच विषयों के बजाय चार विषय करने का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। इस संबंध में अंतिम दिशा-निर्देश आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
परीक्षा में कम हो सकते हैं सवाल
CUET-UG के प्रश्नपत्र में भी बदलाव की तैयारी है। अभी प्रत्येक विषय में 50 सवाल होते हैं और परीक्षा के लिए 60 मिनट का समय मिलता है। यदि परीक्षा की अवधि 40 से 45 मिनट की जाती है तो प्रश्नों की संख्या भी कम किए जाने की संभावना है।
प्रस्तावित प्रारूप में प्रत्येक विषय में सवालों की संख्या 35 से 40 तक हो सकती है। यानी विद्यार्थियों को कम समय में पहले की तुलना में कम प्रश्नों का उत्तर देना होगा। हालांकि, प्रश्नों की अंतिम संख्या और परीक्षा का पूरा ढांचा आधिकारिक दिशानिर्देश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
CUET-UG में 37 विषयों की परीक्षा
वर्तमान में CUET-UG के तहत कुल 37 विषयों की परीक्षा होती है। इनमें 13 भाषाएं, एक जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट और 23 डोमेन विषय शामिल हैं। विद्यार्थियों को इनमें से अधिकतम पांच विषय चुनकर परीक्षा देने का अवसर मिलता है।
कई विद्यार्थी चार विषयों की परीक्षा भी देते हैं। विषयों की संख्या घटाने के प्रस्ताव के साथ विश्वविद्यालयों के प्रवेश मानदंड में समानता लाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
विश्वविद्यालयों के अलग-अलग प्रवेश नियम भी बनेंगे मुद्दा
फिलहाल अलग-अलग विश्वविद्यालयों में CUET-UG के अंकों को लेकर प्रवेश मानदंड एक जैसे नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय में जनरल टेस्ट को मान्यता नहीं है, जबकि उत्तर प्रदेश की कुछ विश्वविद्यालयों में जनरल टेस्ट आवश्यक है।
ऐसे में यदि विषयों की अधिकतम संख्या पांच से घटाकर चार की जाती है तो विश्वविद्यालयों के प्रवेश मानदंड में अंतर को कम करने की जरूरत भी होगी। यूजीसी को विश्वविद्यालयों के प्रवेश नियमों में ज्यादा अंतर नहीं रहने देने की दिशा में काम करने को कहा गया है।
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए प्रवेश प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और एकरूप बनाना है, ताकि अलग-अलग विश्वविद्यालयों के नियमों के कारण उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।
PG पाठ्यक्रमों में कम आवेदन पर नहीं होगी CUET परीक्षा
CUET में बदलाव केवल स्नातक स्तर तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। स्नातकोत्तर यानी PG पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली CUET परीक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी है।
सूत्रों के मुताबिक, 2027 में ऐसे विषयों में NTA परीक्षा आयोजित नहीं कराएगा, जहां उपलब्ध सीटों की तुलना में आवेदन कम आते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी पाठ्यक्रम में 500 सीटें हैं और आवेदन की संख्या 500 से भी कम रहती है तो वहां प्रवेश परीक्षा कराने के बजाय मेरिट के आधार पर दाखिला देने का विकल्प अपनाया जा सकता है।
30 से ज्यादा विषयों में कम आवेदन का दावा
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों में ऐसे 30 से अधिक विषय सामने आने की बात कही जा रही है, जिनमें विद्यार्थियों की ओर से अपेक्षाकृत कम आवेदन किए जाते हैं। ऐसे विषयों में प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की आवश्यकता और संसाधनों के इस्तेमाल को देखते हुए नई व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, किन-किन विषयों में CUET-PG परीक्षा नहीं कराई जाएगी, इसका अंतिम निर्णय और सूची आधिकारिक दिशा-निर्देशों के जरिए ही सामने आएगी।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो CUET-UG के अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा प्रक्रिया मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी अलग हो सकती है। एक छात्र को अलग-अलग दिनों में परीक्षा केंद्र जाने की जरूरत कम हो सकती है। प्रत्येक विषय का पेपर कम समय का होगा और प्रश्नों की संख्या भी घट सकती है। साथ ही विषय चुनने के विकल्प में भी बदलाव संभव है।
हालांकि, इन सभी बदलावों को फिलहाल प्रस्तावित व्यवस्था के तौर पर देखा जाना चाहिए। अंतिम नियम NTA और संबंधित संस्थाओं की ओर से आधिकारिक घोषणा के बाद ही मान्य होंगे।
