मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को ऐसी तेजी देखने को मिली, जिसने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद वैश्विक बाजारों में बने सकारात्मक माहौल का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। रिपब्लिकन पार्टी की हार और डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 2,052.45 अंक यानी 2.66 प्रतिशत चढ़कर 79,353.85 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 590.60 अंक यानी 2.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,551.20 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है। खास बात यह रही कि पिछले छह कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। यह एक साल में इन सूचकांकों की सबसे लंबी लगातार तेजी बताई जा रही है।
सेंसेक्स के 30 में से 21 शेयरों में तेजी, बजाज फाइनेंस सबसे आगे
गुरुवार के कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 21 बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि नौ शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा तेजी बजाज फाइनेंस के शेयरों में रही। इसके शेयर में 7.79 प्रतिशत का उछाल आया। इसके बाद श्रीराम फाइनेंस, इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी के शेयर सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में शामिल रहे।
बैंकिंग क्षेत्र में भी खरीदारी का माहौल दिखाई दिया। एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 2.2 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में 2.7 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। बाजार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 1.23 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 में 1.56 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। निफ्टी के सभी क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।
पहली बड़ी वजह: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत
भारतीय शेयर बाजार में तेजी की सबसे महत्वपूर्ण वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट मानी जा रही है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का समाधान निकलने की उम्मीदों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाया। गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड 1.07 प्रतिशत टूटकर 93.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 1.29 प्रतिशत गिरकर 86.98 डॉलर प्रति बैरल रह गई। इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट आई है।
भारत के लिए तेल की कीमतों में कमी को महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। कच्चा तेल सस्ता होने से आयात बिल और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना रहती है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार के अनुसार, अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल परिस्थितियां मजबूत हो रही हैं और बाजार में तेजी जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल का 94 डॉलर के स्तर पर आना शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक बात है।
दूसरी बड़ी वजह: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से शेयर बाजार को मिला सहारा
शेयर बाजार में तेजी का दूसरा महत्वपूर्ण कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई कमी रही। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद बॉन्ड बाजार में खरीदारी बढ़ी, जिसका असर अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड पर पड़ा।
30 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड गिरकर 5.2 प्रतिशत पर आ गई। वहीं, 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड घटकर 4.8 प्रतिशत रह गई। दो साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड भी कम होकर 4.5 प्रतिशत पर पहुंच गई।
दरअसल, बॉन्ड की कीमतों और उनकी यील्ड के बीच विपरीत संबंध होता है। जब निवेशक बॉन्ड खरीदते हैं तो उनकी कीमत बढ़ती है और यील्ड घटती है। बॉन्ड यील्ड में गिरावट को शेयर बाजार के लिए सामान्य तौर पर सकारात्मक माना जाता है। इससे निवेशकों के लिए शेयरों में निवेश का आकर्षण बढ़ सकता है, क्योंकि वे अपेक्षाकृत अधिक जोखिम लेकर बेहतर रिटर्न की संभावना तलाशते हैं।
तीसरी बड़ी वजह: दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचा भारतीय रुपया
भारतीय मुद्रा में मजबूती भी शेयर बाजार के लिए राहत लेकर आई। गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया दो सप्ताह के उच्च स्तर पर खुला और 0.3 प्रतिशत मजबूत होकर 94.35 के स्तर पर पहुंच गया।
रुपये की मजबूती के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए डॉलर की मांग और आयात लागत का मुद्रा बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। तेल सस्ता होने से रुपये को सहारा मिलने की संभावना बढ़ती है।
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी विभाग के उपाध्यक्ष एवं रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि आगे विदेशी फंड का लगातार आना और डॉलर का कमजोर बने रहना रुपये को और समर्थन दे सकता है। उनके अनुसार, रुपये का परिदृश्य 94.50 के स्तर तक सकारात्मक बना रह सकता है।
चौथी बड़ी वजह: एआई और सेमीकंडक्टर शेयरों में निवेशकों की बदली रणनीति
वैश्विक बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों को लेकर भी निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिला। एआई क्षेत्र में पहले से जारी तेजी के बाद निवेशकों ने डेटा सेंटर और तकनीकी कंपनियों में होने वाले निवेश की संभावनाओं का दोबारा आकलन शुरू किया।
इसका असर एशियाई तकनीकी बाजारों पर दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक, जिसे एआई आधारित तेजी का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है, 4 प्रतिशत से अधिक गिर गया। ताइवान वेटेड और जापान के निक्केई सूचकांक में भी 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, तकनीकी शेयरों में आई इस कमजोरी के बावजूद भारतीय बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। इससे स्पष्ट हुआ कि भारतीय बाजार में तेजी के पीछे केवल एक कारण नहीं, बल्कि कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों का संयुक्त प्रभाव रहा।
पांचवीं बड़ी वजह: विदेशी निवेशकों ने खरीदे 7,284 करोड़ रुपये के शेयर
भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी को विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की खरीदारी से भी मजबूती मिली। विदेशी निवेशकों ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में खरीदारी जारी रखी। उन्होंने कुल 7,284 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
यह अक्टूबर 2025 के बाद भारत में विदेशी निवेशकों की एक दिन की सबसे बड़ी खरीदारी में से एक बताई जा रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी से बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ता है और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है।
चोलामंडलम सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख धर्मेश कांत के मुताबिक, कच्चे तेल की गिरती कीमतें और विदेशी फंड का भारतीय बाजार में आना ऐसे प्रमुख कारण हैं, जिनसे भारतीय शेयर बाजार अपने पिछले दो वर्षों के कमजोर प्रदर्शन से उबरने के संकेत दे रहा है।
अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भी दिखी मजबूती
भारतीय बाजार में तेजी के पीछे वैश्विक शेयर बाजारों का सकारात्मक प्रदर्शन भी एक महत्वपूर्ण कारक रहा। बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार शानदार बढ़त के साथ बंद हुए। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में 3.03 प्रतिशत की तेजी आई। एसएंडपी 500 सूचकांक 1.58 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट 1.44 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ।
एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते रहे।
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिशेल्वन राधाकृष्णन ने बताया कि वॉल स्ट्रीट में रातभर शानदार तेजी देखने को मिली। राजनीतिक दबाव के कारण अमेरिकी प्रशासन के ईरान के साथ बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने के संकेतों के बाद कारोबारियों ने जोखिम को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव किया। उन्होंने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का रुख जारी रहता है तो इससे भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति और कंपनियों की कमाई की संभावनाओं में सुधार हो सकता है।
आगे भी जारी रह सकती है तेजी, लेकिन निवेशकों की नजर रहेगी इन संकेतों पर
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में आई जोरदार तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमी, रुपये की मजबूती, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और वैश्विक बाजारों के सकारात्मक संकेतों की अहम भूमिका रही। सेंसेक्स और निफ्टी में आई बढ़त ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया है। हालांकि, बाजार की आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। ऐसे में इस तेजी के बीच निवेशकों के लिए बाजार के उतार-चढ़ाव और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
