ere | Source: ereपटना। बिहार में बाढ़ से तबाह हुई खेती को दोबारा पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत देने की पहल की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ के बाद खेतों में जमा बालू, रेत और गाद हटाने के लिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इस प्रावधान के तहत पात्र किसानों को प्रति हेक्टेयर 18,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। वहीं, प्रत्येक पात्र किसान को न्यूनतम 2,200 रुपये की सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है। सरकार की इस पहल से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी जमीन बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेती के लिए अनुपयुक्त हो गई है।

खेतों में बालू और गाद जमा होने से परेशान किसानों को मिलेगी राहत

बिहार में हर साल बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर कृषि भूमि प्रभावित होती है। कई इलाकों में नदियों का पानी खेतों में फैल जाता है और अपने साथ बालू, रेत तथा गाद छोड़ जाता है। पानी उतरने के बाद भी किसानों की परेशानी खत्म नहीं होती, क्योंकि खेतों में जमा इन अवशेषों को हटाने और जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने में अतिरिक्त मेहनत और खर्च करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में किसानों के सामने अगली फसल की बुआई की तैयारी करना भी चुनौती बन जाता है।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने प्रभावित कृषि योग्य भूमि और मत्स्य प्रक्षेत्रों पर जमा बालू, रेत तथा गाद हटाने के लिए सहायता देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर इस पहल की जानकारी दी। सरकार का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित किसानों को अपनी जमीन को फिर से उपयोगी बनाने में आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है, ताकि वे खेती से जुड़ी गतिविधियों को दोबारा शुरू कर सकें।

22 जिलों के किसानों की जमीन का होगा स्थलीय सत्यापन

राज्य सरकार की इस योजना के तहत पटना समेत बिहार के 22 जिलों में प्रभावित कृषि भूमि और मत्स्य प्रक्षेत्रों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। इस प्रक्रिया के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि बाढ़ के कारण किन खेतों और मत्स्य प्रक्षेत्रों में कितनी मात्रा में बालू, रेत या गाद जमा हुई है।

सत्यापन के दौरान जमीन पर जमा अवशेषों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके बाद संबंधित जिला प्रशासन निर्धारित सहायता मानकों के अनुसार राशि की मांग करेगा। इसके लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) या राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) से जुड़े निर्धारित सहायता मानकों के तहत प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यानी सहायता की प्रक्रिया में प्रभावित जमीन की वास्तविक स्थिति का आकलन महत्वपूर्ण होगा।

प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपये, न्यूनतम सहायता 2,200 रुपये

सरकार की ओर से घोषित प्रावधान के अनुसार, खेतों और संबंधित प्रभावित क्षेत्रों से बालू, रेत तथा गाद हटाने के लिए प्रति हेक्टेयर 18,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके साथ ही प्रत्येक पात्र किसान को न्यूनतम 2,200 रुपये उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इस आर्थिक सहायता का उद्देश्य किसानों पर पड़ने वाले अतिरिक्त खर्च का बोझ कम करना है।

बाढ़ प्रभावित जमीन को दोबारा खेती के अनुकूल बनाने के लिए कई बार किसानों को अलग से मजदूर लगाने और खेतों की सफाई कराने की जरूरत पड़ती है। खेतों में अधिक मात्रा में बालू या रेत जमा होने पर खेती की सामान्य प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकारी सहायता से किसानों को जमीन तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सहायता का लाभ निर्धारित पात्रता, प्रभावित भूमि के सत्यापन और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार मिलेगा।

कृषि इनपुट अनुदान से अलग है यह सहायता

बाढ़ प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार की ओर से प्रत्येक वर्ष कृषि इनपुट अनुदान भी दिया जाता है। यह अनुदान उन किसानों के लिए होता है, जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हो जाती है। लेकिन खेतों में बालू, रेत और गाद जमा होने की समस्या का सामना करने वाले किसानों की स्थिति इससे अलग हो सकती है।

कई बार बाढ़ का पानी खेतों से उतर जाता है, लेकिन जमीन पर बालू या गाद की मोटी परत जमा रह जाती है। ऐसी स्थिति में किसान की फसल को हुए नुकसान के साथ-साथ जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने की चुनौती भी बनी रहती है। खेतों से अवशेष हटाने के लिए अलग से खर्च करना पड़ सकता है। इसी वजह से इस तरह की सहायता को प्रभावित किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस नए प्रावधान से उन किसानों को उम्मीद मिली है, जिन्हें खेतों में बालू और गाद जमा होने के कारण अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। सरकार की ओर से कराए जाने वाले स्थलीय सत्यापन के बाद प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति स्पष्ट होगी और निर्धारित मानकों के आधार पर सहायता राशि की मांग की जाएगी।

बिहार के इन 22 जिलों में होगा नुकसान का आकलन

बाढ़ के बाद कृषि भूमि और मत्स्य प्रक्षेत्रों पर जमा बालू, रेत तथा गाद का आकलन बिहार के 22 जिलों में कराया जाएगा। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, अरवल, पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, गोपालगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सुपौल और सहरसा शामिल हैं।

इन जिलों के प्रशासन को प्रभावित भूमि का स्थलीय सत्यापन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। आकलन के आधार पर यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में बाढ़ के बाद खेतों से बालू, रेत और गाद हटाने के लिए सहायता की आवश्यकता है। इससे राहत संबंधी प्रक्रिया को प्रभावित भूमि की वास्तविक स्थिति से जोड़ने में मदद मिलेगी।

बाढ़ के बाद खेती को पटरी पर लाने की चुनौती

बिहार में गंगा, सोन, गंडक और कोसी समेत कई नदियों में बाढ़ आने से आसपास के इलाकों में कृषि भूमि प्रभावित होती है। इस वर्ष भी बाढ़ का पानी उतरने के बाद कई क्षेत्रों में खेतों पर बालू, रेत और गाद जमा होने की समस्या सामने आई है। इससे किसानों के लिए जमीन को अगली फसल की बुआई के अनुकूल बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

किसानों के लिए राहत केवल फसल के नुकसान की भरपाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाना भी जरूरी है। खेतों की सफाई और जमीन तैयार करने में होने वाला खर्च उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से घोषित सहायता का महत्व बढ़ जाता है।