सुहैल खान

(संवाददाता)

कैमूर। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कैमूर जिले के भभुआ प्रखंड अंतर्गत परसिया गांव में आयोजित श्री भाष्यकार श्रीरामानुजाचार्य सहस्राब्दी महामहोत्सव एवं दिव्य-भव्य विराट अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे साधु-संतों, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं का स्वागत किया तथा मां मुंडेश्वरी की पावन धरती को नमन किया। समारोह में मुख्यमंत्री ने सनातन संस्कृति, संत समाज के मार्गदर्शन और जनसहभागिता को विकसित भारत तथा समृद्ध बिहार के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने धार्मिक विरासत के संरक्षण, मंदिरों के विकास, पर्यटन के विस्तार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।

सनातन संस्कृति और संतों के आशीर्वाद से साकार होगा विकसित भारत का सपना

धर्म सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि भारत की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक परंपराओं ने हजारों वर्षों से दुनिया को दिशा देने का काम किया है। सनातन धर्म का दर्शन, उसकी मान्यताएं और जीवन मूल्य भारतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज में उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने में संतों तथा धर्माचार्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों के आशीर्वाद, सनातन संस्कृति की शक्ति और आम लोगों की सक्रिय भागीदारी से विकसित भारत तथा समृद्ध बिहार का सपना साकार किया जा सकता है। उन्होंने धार्मिक आयोजनों को भारतीय परंपराओं, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने का माध्यम बताया। परसिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और धर्माचार्यों की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।

प्राचीन मंदिरों के विकास के लिए हजारों करोड़ की योजनाओं का उल्लेख

erer | Source: eeमुख्यमंत्री ने बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में अनेक ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थल हैं, जिनका आध्यात्मिक महत्व देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष है। इन स्थलों के संरक्षण, जीर्णोद्धार और बेहतर सुविधाओं के विकास से धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिल सकता है। उन्होंने गयाजी के विष्णुपद मंदिर, सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर और कैमूर स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर का उल्लेख करते हुए धार्मिक स्थलों के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गयाजी स्थित विष्णुपद मंदिर के विकास एवं जीर्णोद्धार के लिए लगभग 3,500 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना का उल्लेख किया। इसी तरह सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर के विकास के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना की बात भी कही। इन योजनाओं का उद्देश्य धार्मिक स्थलों की महत्ता के अनुरूप उनके विकास और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि बिहार की धार्मिक विरासत राज्य की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राचीन मंदिरों और तीर्थस्थलों का संरक्षण केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिहाज से भी आवश्यक है। ऐसे स्थलों के व्यवस्थित विकास से श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सकता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

मां मुंडेश्वरी धाम और गुप्ताधाम को धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने पर जोर

कैमूर जिले में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने मां मुंडेश्वरी धाम और गुप्ताधाम के विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कैमूर की धार्मिक पहचान और प्राकृतिक विशेषताएं इसे पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती हैं। यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने और उनकी पहचान व्यापक स्तर पर स्थापित करने से अधिक श्रद्धालु तथा पर्यटक आकर्षित हो सकते हैं।

मां मुंडेश्वरी धाम कैमूर की प्रमुख धार्मिक पहचान में शामिल है। वहीं, गुप्ताधाम भी श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण स्थल है। इन स्थानों के विकास के साथ पर्यटकों की सुविधा, क्षेत्रीय संपर्क और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान देने से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

मुख्यमंत्री ने कैमूर की पहाड़ियों और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को देखते हुए पर्यावरण आधारित पर्यटन यानी इको टूरिज्म को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक पर्यटन को विकसित करने से जिले की विशेषताओं को व्यापक पहचान मिल सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर विभिन्न सेवाओं और व्यवसायों के विस्तार की संभावनाएं भी पैदा हो सकती हैं।

अगले पांच वर्षों में बिहार में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में रोजगार सृजन को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि अगले पांच वर्षों में राज्य के भीतर रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि लोगों को रोजगार की तलाश में मजबूरी के कारण दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़े, इसके लिए बिहार में ही काम के अवसर बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने उद्योगों की स्थापना, निवेश को प्रोत्साहन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करना आवश्यक है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को अपने क्षेत्र में काम मिल सके।

उन्होंने बिहार से बाहर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले लोगों से भी अपील की कि वे अपनी जन्मभूमि के विकास में योगदान दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास में यहां के लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। राज्य के बाहर अनुभव और उपलब्धियां हासिल करने वाले लोग भी अपने प्रदेश की प्रगति में सहयोग देकर विकास की प्रक्रिया को मजबूत बना सकते हैं।

सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाओं से तेज होगी विकास की रफ्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क, बिजली और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास से बिहार में विकास की गति को मजबूती मिली है। बेहतर बुनियादी सुविधाएं उद्योगों, पर्यटन और स्थानीय कारोबार के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करती हैं। उन्होंने विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और रोजगार सृजन के प्रयासों को आवश्यक बताया।

धार्मिक पर्यटन और इको टूरिज्म के विस्तार को भी उन्होंने स्थानीय रोजगार की संभावनाओं से जोड़ा। पर्यटन स्थलों पर गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय स्तर पर सेवाओं और कारोबार को प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे क्षेत्र के लोगों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने में सहायता मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि धार्मिक और प्राकृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाया जाए, ताकि संस्कृति और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ मिल सके।

जीयर स्वामी महाराज से मुलाकात कर मुख्यमंत्री ने लिया आशीर्वाद

महामहोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रख्यात संत पूज्य श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने संतों तथा धर्माचार्यों से बिहार के विकास और जनकल्याण के लिए मार्गदर्शन एवं सहयोग की कामना की। इस दौरान धार्मिक परंपराओं, संत समाज की भूमिका और राज्य की प्रगति से जुड़े विषयों को भी आयोजन के व्यापक संदर्भ में महत्व मिला।

कार्यक्रम में सांसद एवं प्रसिद्ध गायक मनोज तिवारी ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति से समारोह का वातावरण भक्तिमय हो गया। धर्म सम्मेलन में पहुंचे श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में भाग लिया और संतों के सान्निध्य में कार्यक्रम का हिस्सा बने।

जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और साधु-संतों की रही मौजूदगी

इस आयोजन में बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान, सांसद मनोज तिवारी, विधायक भरत बिंद, विधायक संगीता कुमारी, विधान पार्षद संतोष कुमार सिंह और पूर्व विधायक अशोक कुमार सिंह उपस्थित रहे। इसके अलावा भाजपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश पांडे, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, शाहाबाद क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक सत्य प्रकाश, कैमूर के जिलाधिकारी कुमार अनुराग और पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों, धर्माचार्यों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। आयोजन ने धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और बिहार के विकास से जुड़े विषयों को एक मंच पर प्रस्तुत किया।

धार्मिक विरासत से विकास और रोजगार तक, बिहार के लिए नई संभावनाओं पर जोर

परसिया में आयोजित श्रीरामानुजाचार्य सहस्राब्दी महामहोत्सव एवं अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सनातन संस्कृति के संरक्षण के साथ धार्मिक पर्यटन, इको टूरिज्म और रोजगार सृजन को महत्वपूर्ण बताया। विष्णुपद मंदिर तथा बाबा हरिहरनाथ मंदिर के विकास से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की आवश्यकता रेखांकित की।

मां मुंडेश्वरी धाम और गुप्ताधाम के विकास पर जोर देने के साथ मुख्यमंत्री ने अगले पांच वर्षों में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी सामने रखा। उनका संदेश रहा कि संतों के मार्गदर्शन, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जनसहभागिता के माध्यम से बिहार के विकास को आगे बढ़ाया जा सकता है।