लंदन। ब्रिटेन ने अपने औपनिवेशिक इतिहास और गुलामों के व्यापार को लेकर एक महत्वपूर्ण रुख सामने रखा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा है कि वह गुलामों के व्यापार के लिए भारत समेत 56 कॉमनवेल्थ देशों से माफी मांगने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि ब्रिटेन किसी भी तरह का आर्थिक मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं है। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कॉमनवेल्थ देशों के बीच गुलामी के ऐतिहासिक अन्याय और उसके प्रभावों को लेकर चर्चा तेज है। बर्नहम ने कहा कि गुलामी के दौरान लोगों ने जो पीड़ा झेली, उसे समझना और स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन आर्थिक मुआवजा इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
कॉमनवेल्थ सम्मेलन से पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री का बड़ा बयान
कॉमनवेल्थ समिट में शामिल होने से पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन इस ऐतिहासिक अन्याय के लिए खुले मन से माफी मांगने को तैयार है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने यह विचार 'द गार्जियन' में प्रकाशित अपने लेख के माध्यम से सामने रखे।
उनके बयान को ब्रिटेन और उसके पूर्व उपनिवेश रहे देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुलामों का व्यापार ब्रिटेन के औपनिवेशिक इतिहास का एक बड़ा और विवादास्पद अध्याय रहा है। इस व्यापार के कारण लाखों लोगों को जबरन उनके घरों से दूर ले जाया गया और उन्हें अमानवीय परिस्थितियों में जीवन बिताने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ब्रिटेन की ओर से माफी मांगने की तैयारी को ऐतिहासिक जिम्मेदारी स्वीकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि, मुआवजे से इनकार करने के कारण इस मुद्दे पर बहस जारी रहने की संभावना है।
एंडी बर्नहम ने कहा- गुलामी का दर्द आज भी लोगों के दिलों में मौजूद
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने अपने बयान में कहा कि उन्हें इस बात का एहसास है कि गुलामी और दास व्यापार के दौरान लोगों ने कितनी पीड़ा झेली थी। उन्होंने इस ऐतिहासिक क्रूरता पर दुख जताते हुए कहा कि उस दौर में किए गए अत्याचारों के निशान आज भी पूरी तरह मिटे नहीं हैं।
बर्नहम के मुताबिक, इतिहास में हुई घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गुलामी के दौरान लोगों के साथ जो व्यवहार किया गया, उसका असर लंबे समय तक समाज और प्रभावित समुदायों पर बना रहा। इसलिए इस इतिहास को स्वीकार करना और उससे जुड़ी पीड़ा को समझना आवश्यक है।
हालांकि, उन्होंने आर्थिक मुआवजे की मांग को समाधान मानने से इनकार कर दिया। उनका तर्क है कि आज के ब्रिटिश नागरिकों को सदियों पहले हुई घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उनके अनुसार, एक ऐतिहासिक अत्याचार के बदले आर्थिक मुआवजा देना किसी दूसरी तरह के अन्याय जैसा हो सकता है।
माफी देने को तैयार ब्रिटेन, लेकिन आर्थिक मुआवजे पर साफ इनकार
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के बयान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माफी और मुआवजे को लेकर अपनाया गया अलग-अलग रुख है। एक तरफ ब्रिटेन गुलामों के व्यापार से प्रभावित देशों और समुदायों से माफी मांगने की तैयारी जता रहा है, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक मुआवजे की मांग स्वीकार करने से इनकार कर रहा है।
गुलामी से प्रभावित देशों की ओर से लंबे समय से इस ऐतिहासिक अन्याय को स्वीकार करने और उसके परिणामों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग उठती रही है। ऐसे में ब्रिटेन का माफी के लिए तैयार होना और मुआवजे से पीछे हटना दोनों ही महत्वपूर्ण राजनीतिक और कूटनीतिक पहलू हैं।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री का कहना है कि गुलामी के इतिहास को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन मौजूदा पीढ़ी को अतीत के अपराधों का जिम्मेदार मानकर आर्थिक भुगतान की व्यवस्था करना उचित नहीं होगा।
किंग चार्ल्स ने भी कैरेबियाई देशों में उठाया गुलामी का मुद्दा
ब्रिटेन के किंग चार्ल्स इन दिनों कैरेबियाई देशों के दौरे पर हैं। अपने दौरे के दौरान उन्होंने बहामास में भी गुलामी के इतिहास का उल्लेख किया और ब्रिटिश शासनकाल में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी।
राजा चार्ल्स की इस टिप्पणी और प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम के बयान को ब्रिटेन की ओर से अपने औपनिवेशिक अतीत पर नए सिरे से चर्चा करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, गुलामी के लिए औपचारिक माफी और आर्थिक मुआवजे का सवाल दोनों अलग-अलग विषय बने हुए हैं।
ब्रिटेन का यह भी कहना है कि गुलामों के व्यापार से उसने आर्थिक लाभ कमाया था, इस ऐतिहासिक तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही ब्रिटेन का पक्ष है कि बाद के दौर में उसने गुलामी की व्यवस्था समाप्त करने में भी भूमिका निभाई।
1833 में ब्रिटेन ने गुलामी को गैरकानूनी घोषित किया था
ब्रिटेन के इतिहास में वर्ष 1833 को गुलामी की व्यवस्था समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वर्ष ब्रिटिश संसद ने गुलामी को गैरकानूनी घोषित करने का कानून पारित किया था। हालांकि, संसद में इस संबंध में कानून पारित होने के बावजूद ब्रिटेन का दूसरे देशों पर औपनिवेशिक शासन जारी रहा।
ब्रिटिश साम्राज्य ने विभिन्न देशों में लंबे समय तक शासन किया और वहां के संसाधनों तथा स्थानीय आबादी का शोषण किया। यही कारण है कि गुलामी समाप्त करने के कानून के बावजूद ब्रिटेन के औपनिवेशिक इतिहास को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
भारत सहित कई देशों के इतिहास में ब्रिटिश शासन का दौर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलावों के साथ-साथ शोषण और संघर्ष के लिए भी याद किया जाता है।
भारत दौरे पर आ सकते हैं ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम
गुलामी के इतिहास पर माफी के बयान के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की संभावित भारत यात्रा को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बर्नहम भारत का दौरा करने के इच्छुक हैं और आने वाले समय में उनकी यात्रा हो सकती है। इस संबंध में भारत में ब्रिटेन के कार्यवाहक उच्चायुक्त बेन मेलर ने जानकारी दी है।
बेन मेलर ने बृहस्पतिवार को पीटीआई-भाषा से बातचीत में दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री भारत आने के लिए काफी उत्सुक हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री का पद संभालने के तुरंत बाद एंडी बर्नहम ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की थी। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने भारत आने की अपनी इच्छा भी जताई थी।
मेलर के अनुसार, बर्नहम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सीधे तौर पर भारत यात्रा का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच इस यात्रा को लेकर जल्द ही सकारात्मक स्थिति देखने को मिल सकती है।
भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
भारत और ब्रिटेन के संबंधों का इतिहास औपनिवेशिक शासन से जुड़ा रहा है। भारत लंबे समय तक ब्रिटिश शासन के अधीन रहा और वर्ष 1947 में स्वतंत्र हुआ। ऐसे में ब्रिटेन की ओर से गुलामी और औपनिवेशिक अत्याचारों के लिए माफी मांगने की तैयारी का बयान भारत के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एक तरफ ब्रिटेन ऐतिहासिक गलतियों को स्वीकार करने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ वह मुआवजे की मांग से दूरी बनाए हुए है। इससे यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जिम्मेदारी और वर्तमान कूटनीतिक संबंधों को लेकर चर्चा के कई पहलू सामने आ सकते हैं।
