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नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली गई पांच मैचों की टी-20 सीरीज के आखिरी मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम को 7 विकेट से हरा दिया। रविवार, 1 नवंबर 2026 को खेले गए इस मुकाबले में न्यूजीलैंड की जीत के नायक टिम साइफर्ट और मध्यक्रम के बल्लेबाज ग्लेन फिलिप्स रहे। फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 65 रन की अहम पारी खेली। पूरी सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज के खिताब से भी नवाजा गया। मुकाबले के बाद फिलिप्स ने ऐसा बयान दिया, जिसकी क्रिकेट जगत में चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि मैदान पर हमेशा शिकारी बनने की कोशिश करनी चाहिए, शिकार नहीं।

ग्लेन फिलिप्स का जीत के बाद खास संदेश, बोले- शिकारी बनें, शिकार नहीं

मैच के बाद आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में ग्लेन फिलिप्स ने अपनी बल्लेबाजी, मानसिक मजबूती और सीरीज के दौरान अपनाई गई रणनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी शांत दिमाग के साथ मैदान पर उतरता है और प्रत्येक गेंद को उसकी योग्यता के अनुसार खेलने का प्रयास करता है, तो इससे बेहतर महसूस होता है।

फिलिप्स ने कहा कि मैदान पर उतरते समय उनका उद्देश्य विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाना था। उन्होंने अपने प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए कहा कि खिलाड़ी को परिस्थितियों का शिकार बनने के बजाय मुकाबले में आक्रामक भूमिका निभानी चाहिए। उनका यह बयान उनकी बल्लेबाजी की रणनीति और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय टीम के स्पिन गेंदबाजों की भूमिका को समझते हुए उन्होंने उन पर दबाव बनाने की योजना बनाई थी। इसी रणनीति के तहत उन्होंने जरूरत के मुताबिक जोखिम उठाया और न्यूजीलैंड को जीत की स्थिति में पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

वरुण चक्रवर्ती का ओवर था करो या मरो वाला मौका

भारतीय गेंदबाजी आक्रमण और स्पिनरों के खिलाफ अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए ग्लेन फिलिप्स ने वरुण चक्रवर्ती के ओवर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड की टीम को यह समझना जरूरी था कि इस मुकाबले में स्पिन गेंदबाजी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। इसलिए उन्होंने स्पिनरों पर हावी होने की कोशिश की।

फिलिप्स के मुताबिक, जब वरुण चक्रवर्ती दोबारा गेंदबाजी करने आए, तब वह ओवर न्यूजीलैंड के लिए करो या मरो जैसी स्थिति वाला था। उस समय टीम के सामने दो संभावनाएं थीं। या तो वह मुकाबले में मजबूत स्थिति हासिल कर लेती या फिर भारतीय गेंदबाज कई विकेट लेकर मैच का रुख बदल सकते थे।

उन्होंने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए जोखिम उठाना जरूरी था। उनके अनुसार, उस समय का मैच और गेंदबाज के साथ मुकाबला इस तरह का जोखिम लेने के लिए उपयुक्त था। न्यूजीलैंड ने इस मौके का फायदा उठाया और मुकाबले में अपनी पकड़ मजबूत की।

फिलिप्स ने टिम साइफर्ट की बल्लेबाजी की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि साइफर्ट ने पारी की शुरुआत से लेकर अंत तक जिस तरह बल्लेबाजी की, वह शानदार थी। उनकी बल्लेबाजी से टीम को लगातार गति मिलती रही और न्यूजीलैंड लक्ष्य हासिल करने में सफल रहा।

वनडे सीरीज से पहले न्यूजीलैंड का आत्मविश्वास बढ़ा

टी-20 सीरीज में मिली सफलता को ग्लेन फिलिप्स ने आगामी एकदिवसीय मुकाबलों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया। उनसे जब पूछा गया कि इस प्रदर्शन से टीम को वनडे सीरीज में कितना आत्मविश्वास मिलेगा, तो उन्होंने कहा कि इस जीत से खिलाड़ियों का मनोबल निश्चित रूप से बढ़ेगा।

फिलिप्स ने कहा कि एकदिवसीय क्रिकेट टी-20 के मुकाबले लंबा प्रारूप है। इसमें खिलाड़ियों को परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव के साथ लंबे समय तक खेलना पड़ता है। ऐसे में धैर्य, एकाग्रता और सही समय पर सही निर्णय लेना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

उन्होंने कहा कि वनडे क्रिकेट में खिलाड़ियों को एक समय में एक गेंद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। खेल के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय परिस्थितियों को समझना और लंबे समय तक टिके रहने की मानसिकता विकसित करना जरूरी है। उनके मुताबिक, टीम इस प्रदर्शन से मिले आत्मविश्वास को आगे के मुकाबलों में भी बरकरार रखना चाहेगी।

पांच मैचों में 341 रन, तीन अर्धशतक और एक शतक से मचाया धमाल

ग्लेन फिलिप्स का प्लेयर ऑफ द सीरीज बनना उनके शानदार आंकड़ों से भी साबित होता है। उन्होंने पांच मैचों की पांच पारियों में कुल 341 रन बनाए। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 113.67 और स्ट्राइक रेट 185.33 रहा।

फिलिप्स ने पूरी सीरीज में तीन अर्धशतकीय पारियां खेलीं और एक शतक भी लगाया। उनके बल्ले से कुल 29 चौके और 20 छक्के निकले। इन आंकड़ों से साफ है कि उन्होंने भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ लगातार आक्रामक बल्लेबाजी की और न्यूजीलैंड के लिए रन बनाने में अहम भूमिका निभाई।

उनकी बल्लेबाजी की खासियत केवल तेजी से रन बनाना ही नहीं रही, बल्कि जरूरत के मुताबिक पारी को संभालना और विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखना भी रहा। यही वजह रही कि पांच मुकाबलों में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करने के बाद उन्हें सीरीज का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।

65 रन की पारी से आखिरी मुकाबले में दिलाई न्यूजीलैंड को जीत

सीरीज के पांचवें और आखिरी टी-20 मुकाबले में ग्लेन फिलिप्स ने 65 रन बनाकर न्यूजीलैंड की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। टिम साइफर्ट के साथ उनकी बल्लेबाजी ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को दबाव में रखा। दोनों बल्लेबाजों के प्रभावशाली प्रदर्शन की बदौलत न्यूजीलैंड ने मुकाबला सात विकेट से अपने नाम कर लिया।

भारत के खिलाफ इस जीत के बाद फिलिप्स ने अपनी टीम के प्रदर्शन पर संतोष जताया। उन्होंने स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ अपनाई गई रणनीति, साझेदारी के महत्व और दबाव के क्षणों में लिए गए फैसलों को जीत के लिए अहम बताया।

हैमस्ट्रिंग की चोट पर भी दिया अपडेट

मैच के बाद बातचीत के दौरान ग्लेन फिलिप्स से उनकी हैमस्ट्रिंग की स्थिति के बारे में भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा कि उनकी हैमस्ट्रिंग ठीक है। इससे उन्होंने अपनी फिटनेस को लेकर स्थिति स्पष्ट की।

ग्लेन फिलिप्स का ''शिकारी बनने की कोशिश करें, शिकार नहीं'' वाला बयान उनकी आक्रामक मानसिकता और खेल के प्रति दृष्टिकोण को सामने लाता है। भारत के खिलाफ आखिरी टी-20 में जीत, पूरी सीरीज में 341 रन और प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार उनके शानदार प्रदर्शन की कहानी बयां करते हैं। अब न्यूजीलैंड की टीम इस जीत से मिले आत्मविश्वास के साथ आगे के मुकाबलों पर ध्यान केंद्रित करेगी।