erer | Source: ereनई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर नई चर्चा छेड़ दी। आमतौर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनों को नियंत्रित करने वाली दिल्ली पुलिस को इस बार अपने ही विभाग के कुछ नाराज पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर कई वर्दीधारी पुलिसकर्मी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। स्थिति ऐसी बन गई कि पुलिस अधिकारियों को अपने ही विभाग के कर्मचारियों को समझाने और उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने के लिए आगे आना पड़ा। इस घटनाक्रम पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी चुटकी ली। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 का उल्लेख करते हुए दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि क्या अब दिल्ली पुलिस अपने ही नाराज पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करेगी?

शाहदरा थाने के विवाद ने बढ़ाई पुलिस विभाग की नाराजगी, मुख्यालय के बाहर जुटे कर्मचारी

दरअसल, पिछले दिनों दिल्ली के शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हुआ था। इस घटना के बाद कुछ पुलिस अधिकारियों के तबादले कर दिए गए थे। अधिकारियों के स्थानांतरण से पुलिस विभाग के भीतर असंतोष पैदा हो गया। बताया गया कि इसी नाराजगी के चलते सोमवार सुबह कई पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पहुंच गए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन पहले से ही सतर्क था। सभी जिला पुलिस उपायुक्तों (डीसीपी) और विभिन्न इकाइयों के प्रमुखों को निर्देश दिए गए थे कि वे अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को मुख्यालय पहुंचने से रोकें। इसके बावजूद कई पुलिसकर्मी और अधिकारी वहां पहुंच गए। उन्होंने अपने विभाग के भीतर उठे विवाद और तबादलों के मुद्दे पर नाराजगी जाहिर करते हुए अपनी बात रखी।

इस घटनाक्रम ने पुलिस विभाग के अंदर चल रहे असंतोष को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया। खास बात यह रही कि प्रदर्शन में वर्दीधारी पुलिसकर्मी शामिल थे और उन्हें नियंत्रित करने के लिए भी पुलिस अधिकारियों को ही आगे आना पड़ा।

नई दिल्ली के डीसीपी ने प्रदर्शनकारियों से की अपील, अंदर बैठकर बातचीत का दिया भरोसा

पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को समझाने के लिए नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें मुख्यालय के अंदर चलकर अपनी बात रखने की अपील की। डीसीपी ने भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायतों और मांगों को सुना जाएगा तथा समाधान निकालने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।

सचिन शर्मा ने प्रदर्शनकारियों से कहा, 'मैं आपसे बार-बार अपील कर रहा हूं कि अंदर चलें। जो भी चर्चा की जा सकती है, वह अंदर होगी और जो भी समाधान निकलेगा, वह अंदर ही निकलेगा।'

उन्होंने पुलिसकर्मियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने का आग्रह किया। इस प्रदर्शन में नई दिल्ली जिले में तैनात कई पुलिसकर्मियों के भी शामिल होने की जानकारी सामने आई।

नेहा बोरा ने BNS की धारा 163 का हवाला देकर दिल्ली पुलिस से पूछा तीखा सवाल

दिल्ली पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन का मामला सामने आने के बाद आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस प्रशासन पर तंज कसा। नेहा बोरा हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शनों के दौरान कई बार हिरासत में ली गई थीं। उन्होंने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन को लेकर भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 का उल्लेख किया।

नेहा बोरा ने कहा, 'दिल्ली पुलिस HQ नई दिल्ली के उस इलाके में आता है जहां BNS धारा 163 लगी हुई है। क्या दिल्ली पुलिस, दिल्ली पुलिस से नाराज दिल्ली पुलिस के ऊपर FIR दर्ज करेगी? आपकी चरमराती व्यवस्था के लक्षण हर जगह हैं।'

उनकी इस टिप्पणी के बाद पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई। नेहा बोरा ने अपने बयान के जरिए यह सवाल उठाया कि जब आम लोगों के प्रदर्शनों के दौरान प्रतिबंधात्मक प्रावधानों का हवाला दिया जाता है, तो पुलिसकर्मियों के अपने प्रदर्शन के मामले में क्या कार्रवाई होगी।

एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने भी उठाई आवाज, बोले- खुद अन्याय सहेंगे तो दूसरों को न्याय कैसे देंगे?

इस पूरे विवाद में तबादले के बाद चर्चा में आए एसीपी मनस्वी वशिष्ठ का नाम भी प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने शनिवार को एक वीडियो जारी कर पुलिसकर्मियों से सोमवार सुबह आठ बजे दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचने और पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के सामने अपना पक्ष रखने की अपील की थी।

सोमवार को मनस्वी वशिष्ठ को पुलिस मुख्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए देखा गया। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों के अधिकारों और उनके साथ होने वाले व्यवहार को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 'हम खुद अन्याय सहेंगे तो किसको न्याय देंगे।'

शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया था। इन तबादलों के बाद पुलिसकर्मियों के बीच असंतोष बढ़ा और मामला सोमवार को पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के रूप में सामने आया।

पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन ने खड़े किए कई सवाल

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर वर्दीधारी पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन राजधानी में चर्चा का विषय बन गया है। इस घटनाक्रम में एक तरफ पुलिसकर्मी अपने अधिकारियों के तबादले और विभागीय विवाद को लेकर नाराजगी जाहिर करते दिखाई दिए, वहीं दूसरी तरफ वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें बातचीत के जरिए समाधान निकालने का भरोसा दिया।

नेहा बोरा की टिप्पणी ने इस घटनाक्रम को एक अलग राजनीतिक और कानूनी संदर्भ भी दे दिया है। उन्होंने धारा 163 का उल्लेख करते हुए पुलिस प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाया। वहीं एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के बयान ने पुलिसकर्मियों के भीतर मौजूद असंतोष को सार्वजनिक रूप से सामने रखा।