रांची। JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोमवार को सरकार ने बड़ा फैसला लिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद JSSC-CGL परीक्षा के साथ TDPL के माध्यम से आयोजित अन्य परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की गई। सरकार के इस फैसले के बाद देर रात रांची सदर अस्पताल में अनशन पर बैठे छात्र नेताओं ने जूस पीकर अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।


JSSC-CGL के साथ TDPL की परीक्षाएं भी रद्द


सरकार और छात्रों के बीच हुई बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और इरफान अंसारी समेत अन्य लोग मौजूद रहे। बैठक में छात्रों की ओर से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े मुद्दे उठाए गए।

सरकार की ओर से JSSC-CGL के अलावा TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं, उनके परिणाम और चयन प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला लिया गया। साथ ही वर्ष 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों की जांच कराने की बात कही गई है।


सदर अस्पताल में जूस पीकर खत्म हुई भूख हड़ताल


सरकार की घोषणा के बाद देर रात मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और इरफान अंसारी सदर अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने अनशन पर बैठे छात्र नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने जूस पीकर अनशन खत्म किया। उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति ने भी भूख हड़ताल समाप्त की।


देवेंद्र महतो ने सरकार और आंदोलन में साथ देने वालों का जताया आभार


अनशन खत्म करने के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सरकार का आभार जताते हुए कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने आंदोलन में साथ देने वाले छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य लोगों के प्रति भी आभार जताया।


महतो ने कहा कि परीक्षा रद्द होना छात्रों के संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन आगे भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना भी जरूरी है। उनका कहना था कि अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे परीक्षा प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का संदेह पैदा न हो।

उन्होंने खास तौर पर उन लोगों को धन्यवाद दिया, जो देर रात 1 से 2 बजे तक आंदोलनकारियों के लिए खाना, चाय और पानी भेजते रहे।


2014 से अब तक की भर्ती परीक्षाओं की जांच पर भी नजर


सरकार ने 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की बात कही है। अब इस जांच की प्रक्रिया और इसके दायरे को लेकर अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम पर रहेगी।


वहीं, परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों के सामने नई परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल हैं। सरकार के लिए अब चुनौती होगी कि आगे होने वाली परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से कराया जाए और अभ्यर्थियों के बीच भरोसा कायम किया जाए।