नई दिल्ली। भारत में खानपान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। कभी सामान्य मिल्क चॉकलेट तक सीमित रहने वाले उपभोक्ता अब डार्क चॉकलेट की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं। खास बात यह है कि महंगी और प्रीमियम श्रेणी में आने वाली इस चॉकलेट की मांग में एक साल के भीतर 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बदलती जीवनशैली, खर्च करने की क्षमता में वृद्धि, सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता और ऑनलाइन डिलीवरी की सुविधा को इस बदलाव की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। हालांकि, तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद डार्क चॉकलेट अभी देश के सभी परिवारों तक नहीं पहुंच पाई है।
एक साल में 45% बढ़े डार्क चॉकलेट खरीदने वाले परिवार
उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में समाप्त हुए एक साल के दौरान भारत में डार्क चॉकलेट खरीदने वाले परिवारों की संख्या में 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे पहले 2024 में यह बढ़ोतरी 28.2 प्रतिशत और 2025 में 11.3 प्रतिशत रही थी। आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद में बदलाव आ रहा है और वे पारंपरिक चॉकलेट के साथ नए विकल्पों को भी आजमाने लगे हैं।
हालांकि, अभी देश के केवल 8.5 प्रतिशत परिवार ही डार्क चॉकलेट खरीदने वालों में शामिल हैं। यानी बाजार में तेजी से वृद्धि होने के बावजूद इसके विस्तार की काफी गुंजाइश बनी हुई है। कुल खरीद में शहरी उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी लगभग 87 प्रतिशत बताई गई है, जिससे पता चलता है कि फिलहाल इसकी मांग बड़े शहरों में अधिक केंद्रित है।
बढ़ती आमदनी और प्रीमियम लाइफस्टाइल का दिख रहा असर
डार्क चॉकलेट की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे लोगों की खर्च करने की क्षमता और जीवनशैली में बदलाव को अहम माना जा रहा है। उपभोक्ता अब केवल रोजमर्रा की जरूरतों पर ही नहीं, बल्कि स्वाद, गुणवत्ता और प्रीमियम उत्पादों पर भी खर्च करने लगे हैं। कॉफी और अन्य खाद्य उत्पादों की तरह चॉकलेट बाजार में भी महंगे और खास विकल्पों के प्रति रुचि बढ़ रही है।
डार्क चॉकलेट को आमतौर पर अधिक कोको वाली चॉकलेट के रूप में पहचाना जाता है। इसमें कोको की मात्रा ब्रांड और उत्पाद के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसके स्वाद में सामान्य मिल्क चॉकलेट की तुलना में कड़वापन अधिक होता है, इसलिए इसे पसंद करने वाले उपभोक्ता अक्सर अलग-अलग कोको प्रतिशत और फ्लेवर वाले उत्पादों को आजमाते हैं।
क्विक कॉमर्स ने आसान की खरीदारी, घर बैठे मिलने लगी प्रीमियम चॉकलेट
डार्क चॉकलेट की बढ़ती मांग में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब ग्राहकों को कई प्रीमियम उत्पाद खरीदने के लिए विशेष दुकानों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कुछ ही मिनटों में चॉकलेट घर तक मंगाई जा सकती है।
इस सुविधा से उन उपभोक्ताओं को भी नए उत्पाद आजमाने का मौका मिल रहा है, जिनके आसपास की छोटी दुकानों पर डार्क चॉकलेट के पर्याप्त विकल्प उपलब्ध नहीं होते। अलग-अलग ब्रांड, कोको प्रतिशत और फ्लेवर की उपलब्धता ने भी ग्राहकों के लिए चुनाव आसान बनाया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में घर से बाहर डार्क चॉकलेट की खरीद और खपत में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सेहत के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रही डार्क चॉकलेट की लोकप्रियता
आजकल लोग अपने खानपान को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं। इसी वजह से कई उपभोक्ता खाद्य उत्पाद खरीदते समय उनमें मौजूद सामग्री, कोको की मात्रा और पोषण संबंधी जानकारी पर भी ध्यान देने लगे हैं। डार्क चॉकलेट में कोको की मात्रा अधिक होने के कारण इसे कई लोग सामान्य चॉकलेट के विकल्प के रूप में पसंद करते हैं।
हालांकि, डार्क चॉकलेट को पूरी तरह सेहतमंद या बिना किसी सीमा के खाने योग्य मानना सही नहीं है। इसके फायदे और पोषण संबंधी विशेषताएं कोको प्रतिशत, चीनी, वसा और खाई जाने वाली मात्रा पर निर्भर करती हैं। इसलिए केवल डार्क चॉकलेट होने के आधार पर किसी उत्पाद को स्वास्थ्य के लिए बेहतर मानने के बजाय उसकी पोषण संबंधी जानकारी देखना जरूरी है।
15 हजार करोड़ रुपये का चॉकलेट बाजार, डार्क चॉकलेट की हिस्सेदारी अभी कम
भारत का चॉकलेट बाजार लगभग 15,000 करोड़ रुपये का बताया जाता है। इस बड़े बाजार में डार्क चॉकलेट की हिस्सेदारी अभी सीमित है, लेकिन इसकी बढ़ती मांग कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार, डार्क चॉकलेट की वृद्धि पूरे चॉकलेट बाजार की तुलना में तेज बनी हुई है। नए स्वाद और प्रीमियम उत्पादों की मांग इस श्रेणी को विस्तार देने में मदद कर रही है।
इसके बावजूद डार्क चॉकलेट की ऊंची कीमत एक बड़ी चुनौती है। सामान्य चॉकलेट की तुलना में महंगे विकल्प हर उपभोक्ता के बजट में फिट नहीं बैठते। इसके अलावा, छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी उपलब्धता भी अपेक्षाकृत सीमित है।
बड़े शहरों में ज्यादा मांग, छोटे बाजारों तक पहुंच बनाना चुनौती
फिलहाल डार्क चॉकलेट की मांग मुख्य रूप से बड़े शहरी क्षेत्रों में अधिक दिखाई दे रही है, खासकर उन शहरों में जहां आबादी 10 लाख से ज्यादा है। बेहतर वितरण नेटवर्क, ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा और प्रीमियम उत्पादों के प्रति बढ़ती रुचि इन क्षेत्रों में इसकी लोकप्रियता को बढ़ावा दे रही है।
दूसरी ओर, ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में कीमत, सीमित उपलब्धता और स्वाद की पसंद इसकी पहुंच को प्रभावित कर रहे हैं। यदि कंपनियां किफायती विकल्पों और व्यापक वितरण पर ध्यान देती हैं, तो आने वाले समय में इस बाजार का दायरा और बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, डार्क चॉकलेट की मांग में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी भारतीय उपभोक्ताओं की बदलती पसंद का संकेत देती है। प्रीमियम उत्पादों के प्रति बढ़ता आकर्षण, ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा और खानपान को लेकर जागरूकता इस बदलाव को गति दे रहे हैं। हालांकि, इसकी लोकप्रियता कितनी दूर तक पहुंचेगी, यह कीमत, उपलब्धता और उपभोक्ताओं की बदलती पसंद पर निर्भर करेगा।
