erere | Source: ereरोहित शर्मा को क्रिकेट मैदान पर उनकी शानदार बल्लेबाजी और लंबे समय तक टिककर खेलने की क्षमता के लिए जाना जाता है। हालांकि, मैदान पर प्रदर्शन के पीछे सिर्फ बल्लेबाजी का अभ्यास ही नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस पर भी लगातार काम करना जरूरी होता है। रोहित शर्मा की फिटनेस रूटीन से जुड़ी जानकारी में कार्डियो, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कोर एक्सरसाइज, एजिलिटी, डाइट और रिकवरी जैसे कई पहलू सामने आते हैं। फिट रहने की कोशिश करने वाले लोग उनकी दिनचर्या से कुछ उपयोगी बातें सीख सकते हैं।

1. फिटनेस रूटीन में कार्डियो को दें जगह

कार्डियो एक्सरसाइज शरीर की सक्रियता और स्टैमिना बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। रोहित शर्मा की ट्रेनिंग में दौड़ना, साइकिल चलाना और तैराकी जैसी गतिविधियां शामिल रही हैं। आम लोग भी अपनी क्षमता और पसंद के अनुसार तेज वॉक, रनिंग, साइकिलिंग या स्विमिंग को अपने व्यायाम का हिस्सा बना सकते हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और मौजूदा फिटनेस स्तर के अनुसार एक्सरसाइज की तीव्रता अलग हो सकती है। इसलिए लंबे समय से व्यायाम नहीं करने वाले लोगों के लिए धीरे-धीरे शुरुआत करना बेहतर रहता है।

2. सिर्फ कार्डियो नहीं, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी जरूरी

फिटनेस रूटीन में मांसपेशियों की ताकत पर काम करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। रोहित शर्मा की ट्रेनिंग में स्क्वैट्स, डेडलिफ्ट, बेंच प्रेस, फ्रंट स्क्वैट और पुश प्रेस जैसी स्ट्रेंथ एक्सरसाइज शामिल रही हैं।

जिम में इन एक्सरसाइज को करते समय सही तकनीक पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। शुरुआती लोगों को वजन और एक्सरसाइज का स्तर अपनी क्षमता के अनुसार रखना चाहिए। जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित ट्रेनर की मदद लेना भी उपयोगी हो सकता है।

3. मजबूत कोर से बेहतर हो सकता है शरीर का संतुलन

फिटनेस में कोर मसल्स की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्लैंक, लेग रेज और पुल-अप जैसी एक्सरसाइज कोर पर काम करती हैं। मजबूत कोर शरीर के संतुलन और मूवमेंट को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।

हालांकि, किसी भी एक्सरसाइज की शुरुआत करते समय अपनी क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है। गलत तकनीक या जरूरत से ज्यादा अभ्यास से बचना चाहिए।

4. एजिलिटी ट्रेनिंग पर भी दिया जाता है ध्यान

क्रिकेट जैसे खेल में केवल ताकत और स्टैमिना ही पर्याप्त नहीं होते। खिलाड़ी को तेजी से दौड़ने, दिशा बदलने और कम समय में प्रतिक्रिया देने की जरूरत होती है। इसी वजह से एजिलिटी ट्रेनिंग भी महत्वपूर्ण होती है।

रोहित शर्मा की ट्रेनिंग में कोन ड्रिल और लैडर ड्रिल जैसी गतिविधियां शामिल रही हैं। ये अभ्यास पैरों की गति, शरीर के संतुलन और मूवमेंट पर काम करने में मदद कर सकते हैं। आम लोग भी अपनी फिटनेस जरूरत के अनुसार ऐसी हल्की ड्रिल्स को वर्कआउट में शामिल कर सकते हैं।

5. रोज एक जैसा वर्कआउट करने के बजाय बदलाव जरूरी

फिटनेस के लिए हर दिन बिल्कुल एक ही तरह की एक्सरसाइज करना जरूरी नहीं है। वर्कआउट में अलग-अलग गतिविधियों को शामिल करने से शरीर के विभिन्न हिस्सों पर काम किया जा सकता है।

किसी दिन कार्डियो, दूसरे दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और किसी अन्य दिन कोर या एजिलिटी पर ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, वर्कआउट का कार्यक्रम व्यक्ति की उम्र, फिटनेस स्तर और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय किया जाना चाहिए।

6. प्लेट में भी दिखना चाहिए फिटनेस का असर

फिटनेस केवल व्यायाम करने से हासिल नहीं होती। खान-पान भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रोहित शर्मा की डाइट में ओट्स, ब्राउन राइस, सब्जियां, चिकन, मछली, पनीर और नट्स जैसी चीजें शामिल होती हैं।

इस तरह के भोजन से प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा जैसे पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत अलग होती है। इसलिए किसी खिलाड़ी की पूरी डाइट को बिना बदलाव के अपनाने के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार भोजन का चुनाव करना चाहिए।

7. फिटनेस लक्ष्य के दौरान जंक फूड पर लगाम

पसंदीदा खाना छोड़ना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है। रोहित शर्मा को वड़ापाव पसंद होने की बात सामने आती रही है, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने इससे दूरी बनाई थी। उनके ट्रेनर अभिषेक नायर ने 2025 में उनकी ट्रेनिंग से जुड़ी जानकारी साझा की थी।

इससे यह बात समझी जा सकती है कि किसी खास फिटनेस लक्ष्य पर काम करते समय पसंदीदा जंक फूड का सेवन सीमित करना पड़ सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को अपने पसंदीदा भोजन को पूरी तरह छोड़ना ही होगा, बल्कि संतुलित खान-पान और मात्रा पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

8. वर्कआउट जितना जरूरी, रिकवरी भी उतनी ही अहम

कठिन व्यायाम के बाद शरीर को पर्याप्त आराम देना भी फिटनेस प्रक्रिया का हिस्सा है। पर्याप्त नींद, पानी का सेवन, स्ट्रेचिंग और मोबिलिटी एक्सरसाइज शरीर की रिकवरी में मदद कर सकते हैं।

लगातार शरीर को जरूरत से ज्यादा थकाने के बजाय व्यायाम और आराम के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। खासकर शुरुआती लोगों को शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

रोहित शर्मा की रूटीन से आम लोग क्या सीख सकते हैं?

रोहित शर्मा की पूरी फिटनेस रूटीन को किसी दूसरे व्यक्ति के लिए उसी तरह अपनाना जरूरी नहीं है। एक पेशेवर क्रिकेटर की ट्रेनिंग उसकी खेल संबंधी जरूरतों के अनुसार तैयार होती है, जबकि आम व्यक्ति की जरूरत अलग हो सकती है।

फिर भी उनकी फिटनेस से जुड़ी दिनचर्या से कुछ बुनियादी बातें सीखी जा सकती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, कार्डियो, ताकत बढ़ाने वाली एक्सरसाइज, कोर ट्रेनिंग, संतुलित भोजन और पर्याप्त रिकवरी को फिटनेस रूटीन में जगह दी जा सकती है।

फिटनेस शुरू करने वालों के लिए सबसे जरूरी बात

यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से व्यायाम नहीं कर रहा है, तो अचानक कठिन ट्रेनिंग शुरू करने के बजाय हल्की गतिविधियों से शुरुआत करना बेहतर है। वॉकिंग, हल्की स्ट्रेंथ एक्सरसाइज और अपनी क्षमता के अनुसार कार्डियो को धीरे-धीरे रूटीन में शामिल किया जा सकता है। किसी स्वास्थ्य समस्या या विशेष शारीरिक स्थिति में व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य फिटनेस विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।