मैट्रिक परीक्षा में 10 मिनट की देरी बनी वजह, छात्रा ने ट्रेन से कूदकर दी जान
बिहार मैट्रिक (10वीं) परीक्षा के दूसरे दिन मसौढ़ी क्षेत्र की एक छात्रा को निर्धारित समय के बाद केंद्र पहुंचने के कारण प्रवेश नहीं दिया गया। नियम के तहत गेट बंद होने से परीक्षा नहीं दे पाने पर वह मानसिक रूप से टूट गई और ट्रेन से कूदकर जान दे दी। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है, जबकि राज्यभर में कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा जारी है।
नवीदुल हसन
मैट्रिक परीक्षा में देर से पहुंचने पर छात्रा ने की आत्महत्या
बिहार में चल रही मैट्रिक (10वीं) परीक्षा के दूसरे दिन एक दुखद घटना सामने आई। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित परीक्षा में देर से पहुंचने के कारण एक छात्रा को केंद्र में प्रवेश नहीं मिला। इससे परेशान होकर उसने चलती ट्रेन से कूदकर आत्महत्या कर ली।
मंगलवार को राज्यभर के 1699 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 15 लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे हैं। दोनों पालियों में गणित की परीक्षा हो रही है। पहली पाली सुबह शुरू हुई, जबकि दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी। सभी केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और पुलिस की तैनाती के बीच सख्त जांच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है।
इसी बीच मसौढ़ी के खरजमा गांव की रहने वाली कोमल कुमारी की परीक्षा बरनी केंद्र पर थी। वह परीक्षा देने के लिए एक दिन पहले अपने रिश्तेदार के गांव महाराजचक पहुंची थी। परीक्षा केंद्र वहां से लगभग 6 किलोमीटर दूर था।
सुबह 9 बजे तक रिपोर्टिंग का समय था, लेकिन कोमल 9 बजकर 10 मिनट पर परीक्षा केंद्र पहुंची। नियम के अनुसार गेट बंद हो चुका था, इसलिए उसे अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। उसने काफी अनुरोध किया, लेकिन प्रवेश नहीं दिया गया।
परीक्षा छूट जाने से वह बेहद दुखी हो गई। कुछ देर बाद वह नदौल स्टेशन पहुंची और ट्रेन में सवार हो गई। तरेगना और मसौढ़ी कोर्ट स्टेशन के बीच महाराजचक गांव के पास उसने चलती ट्रेन से छलांग लगा दी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
वहीं, भागलपुर में एक सकारात्मक तस्वीर भी देखने को मिली, जहां एक दिव्यांग छात्र को पुलिसकर्मियों ने गोद में उठाकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया, ताकि वह समय पर परीक्षा दे सके।
इस घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है।
What's Your Reaction?

