ere | Source: rereनई दिल्ली। मोबाइल फोन आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। कॉल, इंटरनेट, बैंकिंग से लेकर मनोरंजन तक, ज्यादातर लोग फोन को हर समय अपने साथ रखते हैं। कोई इसे पैंट की जेब में रखता है तो कई लोग शर्ट की जेब को सबसे सुविधाजनक जगह मानते हैं। खासकर बाईं तरफ की शर्ट की जेब में फोन रखने की आदत को लेकर अक्सर सवाल उठता है कि जब मोबाइल दिल के इतने करीब रहता है तो क्या उसकी रेडियोफ्रीक्वेंसी या वाइब्रेशन का असर हार्टबीट पर पड़ सकता है?

यह सवाल इसलिए भी चर्चा में रहता है क्योंकि सोशल मीडिया पर मोबाइल फोन को दिल के पास रखने से जुड़ी कई तरह की बातें सामने आती रहती हैं। लेकिन हर दावा वैज्ञानिक तथ्य नहीं होता। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर कुब्बा के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में सिर्फ शर्ट की जेब में मोबाइल रखने को हार्टबीट बिगड़ने का सीधा कारण मानने का पुख्ता आधार नहीं है।

क्या शर्ट की जेब में फोन रखने से बदल जाती है दिल की धड़कन?

मोबाइल फोन नेटवर्क से संपर्क करने के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी सिग्नल का इस्तेमाल करता है। ये नॉन-आयनाइजिंग रेडिएशन होते हैं। इसका मतलब यह है कि इनमें एक्स-रे जैसी आयनाइजिंग रेडिएशन वाली ऊर्जा नहीं होती, जो सीधे डीएनए को नुकसान पहुंचाने के लिए जानी जाती है।

इसलिए सामान्य व्यक्ति के मामले में फोन को शर्ट की जेब में रखने मात्र से हार्टबीट में बदलाव होने की बात को सीधे तौर पर साबित नहीं माना जा सकता। हालांकि, इसका यह अर्थ भी नहीं है कि हर परिस्थिति में मोबाइल और शरीर के बीच दूरी से जुड़े सभी सवालों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। खासतौर पर कुछ विशेष चिकित्सा उपकरणों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अलग सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

जेब में फोन वाइब्रेट करे तो दिल की धड़कन क्यों महसूस होती है?

कई बार शर्ट की जेब में रखा फोन अचानक वाइब्रेट करता है और उसी समय व्यक्ति को दिल के आसपास हलचल या धड़कन महसूस होती है। इससे उसे लग सकता है कि मोबाइल की वजह से हार्टबीट बदल गई है। लेकिन दोनों घटनाओं का एक साथ महसूस होना यह साबित नहीं करता कि फोन ने दिल की धड़कन बदल दी।

फोन की वाइब्रेशन से शरीर के उस हिस्से में सेंसेशन पैदा हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति पहले से अपनी धड़कन को लेकर चिंतित है या शरीर में होने वाले छोटे बदलावों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, तो सामान्य धड़कन भी उसे ज्यादा स्पष्ट महसूस हो सकती है। इसलिए हर बार जेब में फोन के वाइब्रेट होने और दिल की धड़कन महसूस होने को एक ही कारण से जोड़ना उचित नहीं है।

पेसमेकर वाले मरीजों के लिए क्यों बदल जाता है मामला?

मोबाइल फोन को लेकर सबसे ज्यादा सावधानी उन लोगों को बरतनी चाहिए जिनके शरीर में पेसमेकर या कोई अन्य इम्प्लांटेबल हार्ट डिवाइस लगा हुआ है। यहां चिंता सामान्य मोबाइल रेडिएशन से ज्यादा संभावित मैग्नेटिक इंटरफेरेंस को लेकर होती है।

अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ऐसे लोगों को मोबाइल फोन और इम्प्लांटेड हार्ट डिवाइस के बीच कम से कम 6 इंच यानी करीब 15 सेंटीमीटर की दूरी रखने की सलाह देता है। ऐसे मरीजों को फोन को उस जेब में रखने से भी बचना चाहिए जो सीधे हार्ट डिवाइस के ऊपर पड़ती हो।

पेसमेकर या कार्डियक डिवाइस वालों को फोन इस्तेमाल करते समय क्या ध्यान रखना चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति को पेसमेकर या इम्प्लांटेबल कार्डियक डिफिब्रिलेटर लगा है, तो फोन को सीधे डिवाइस के ऊपर वाली शर्ट या जैकेट की जेब में रखना उचित नहीं माना जाता। फोन को शरीर के उस हिस्से से कुछ दूरी पर रखना बेहतर है।

ऐसे मामलों में सावधानी का मुख्य कारण यह है कि कुछ मोबाइल फोन या उनमें मौजूद मैग्नेटिक घटक इम्प्लांटेड डिवाइस के सामान्य संचालन में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इसलिए जिन लोगों के शरीर में ऐसा चिकित्सा उपकरण लगा है, उन्हें अपने डॉक्टर और डिवाइस निर्माता की सुरक्षा संबंधी सलाह का पालन करना चाहिए।

अचानक तेज धड़कन हो तो सिर्फ मोबाइल को जिम्मेदार न मानें

अगर किसी व्यक्ति को अचानक दिल की धड़कन तेज महसूस होती है, तो उसका कारण केवल शर्ट की जेब में रखा मोबाइल मान लेना सही नहीं होगा। कई सामान्य परिस्थितियां भी धड़कन तेज महसूस होने की वजह बन सकती हैं।

ज्यादा चाय या कॉफी पीना, तनाव, पर्याप्त पानी नहीं पीना, नींद पूरी नहीं होना और कुछ प्रकार की हृदय गति संबंधी समस्याएं धड़कन तेज या असामान्य महसूस होने का कारण हो सकती हैं। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को बार-बार धड़कन तेज होने, अनियमित धड़कन या धड़कन बहुत स्पष्ट महसूस होने की शिकायत हो रही है, तो उसके वास्तविक कारण की जांच जरूरी है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं?

कभी-कभार धड़कन तेज महसूस होना अलग बात है, लेकिन यदि इसके साथ सीने में दर्द, बेहोशी जैसा महसूस होना या बहुत अधिक सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य मानकर टालना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

सिर्फ मोबाइल फोन को जेब से निकाल देना ऐसे लक्षणों का उपचार नहीं है। लगातार या बार-बार होने वाली धड़कन की समस्या के पीछे अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं, जिनका पता चिकित्सकीय जांच के बाद ही लगाया जा सकता है।

मोबाइल फोन कहां रखें, इस पर क्या समझना जरूरी है?

सामान्य व्यक्ति के लिए शर्ट की जेब में मोबाइल रखने को सीधे तौर पर हार्टबीट बिगाड़ने वाली आदत बताने का पुख्ता आधार नहीं है। फोन की वाइब्रेशन महसूस होने या उसके दिल के पास रखे होने से होने वाली चिंता को हार्ट रिदम में वास्तविक बदलाव समझना जरूरी नहीं है।

हालांकि, पेसमेकर या अन्य इम्प्लांटेड हार्ट डिवाइस वाले लोगों के लिए फोन को डिवाइस से पर्याप्त दूरी पर रखना महत्वपूर्ण है। ऐसे लोगों को फोन को सीधे इम्प्लांट के ऊपर वाली जेब में रखने से बचना चाहिए।

मोबाइल और दिल की सेहत को लेकर सबसे जरूरी बात

मोबाइल फोन को लेकर डर फैलाने के बजाय यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग लोगों के लिए जोखिम और सावधानियां अलग हो सकती हैं। सामान्य लोगों में शर्ट की जेब में मोबाइल रखने और हार्टबीट प्रभावित होने के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं है, जबकि पेसमेकर या अन्य इम्प्लांटेड डिवाइस वाले मरीजों को मैग्नेटिक इंटरफेरेंस के संभावित जोखिम को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

अगर किसी व्यक्ति को बार-बार तेज या अनियमित धड़कन महसूस होती है, तो केवल फोन को इसका कारण मानने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा जरूरी है। खासकर सीने में दर्द, बेहोशी जैसा महसूस होना या अत्यधिक सांस फूलने जैसे लक्षण साथ हों तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।