ere | Source: erreभुवनेश्वर/नई दिल्ली। ओडिशा के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) आर. संथान गोपालन ने सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन देकर प्रशासनिक और चुनावी हलकों में चर्चा तेज कर दी है। खास बात यह है कि उनका आवेदन राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने और संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित होने के करीब एक सप्ताह बाद सामने आया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।

SIR पूरा होने के बाद VRS का आवेदन

ओडिशा कैडर के 2001 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी आर. संथान गोपालन ने बुधवार, 30 सितंबर को VRS के लिए अपना आवेदन सौंपा। वह जुलाई 2024 से ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही उनके पास आबकारी विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी है। निर्धारित सेवा अवधि के अनुसार उन्हें जून 2028 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन उन्होंने इससे पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का रास्ता चुना है।

गोपालन के अनुसार, उनके इस फैसले का SIR को लेकर चल रहे विवाद से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने अपने निर्णय के पीछे निजी और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि वह पिछले कई महीनों से सरकारी सेवा छोड़ने के बारे में विचार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने SIR की प्रक्रिया पूरी होने और संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित होने तक अपना फैसला टाल दिया था।

'निजी मामलों और परिवार पर ध्यान देना चाहता हूं'

VRS के फैसले को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो आर. संथान गोपालन ने कहा कि वह निजी कारणों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेना चाहते हैं। उन्होंने अपने परिवार और बेटे की पढ़ाई पर ध्यान देने की इच्छा जताई। गोपालन ने कहा कि वह अपने बेटे की स्कूली शिक्षा पूरी होने तक भुवनेश्वर में ही रहेंगे और इसके बाद अपने निजी मामलों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।

SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उनके इस्तीफे की मांग और उनके VRS आवेदन के बीच संबंध के सवाल पर भी उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यदि उनके इस फैसले से विपक्ष खुश होता है तो उन्हें खुश होने दिया जाए। गोपालन ने यह भी बताया कि उन्होंने 2 सितंबर को सरकारी सेवा में 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं और इसी वजह से VRS लेने का निर्णय किया है।

ओडिशा की मतदाता सूची में लाखों नाम हटने को लेकर उठे सवाल

ओडिशा में SIR के बाद संशोधित मतदाता सूची 21 सितंबर को प्रकाशित की गई थी। उस समय राज्य में करीब 3.16 करोड़ मतदाताओं वाली चुनावी सूची को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया। विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस ने मतदाता सूची में हुए बदलाव को लेकर सवाल उठाए।

बीजद की ओर से दावा किया गया कि SIR प्रक्रिया के दौरान 27.50 लाख से अधिक मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस मामले की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। बीजद ने CEO पर मतदाता संबंधी आंकड़ों में 'हेरफेर' का आरोप भी लगाया था। हालांकि, आर. संथान गोपालन ने अपने VRS निर्णय को इन राजनीतिक विवादों से अलग बताया है।

चुनावी प्रक्रिया के बीच VRS की टाइमिंग पर चर्चा

गोपालन के VRS आवेदन की टाइमिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में बहस जारी है। इसी बीच आयोग के कामकाज और कुछ निर्णयों को लेकर असहमति की खबरें भी सामने आई हैं।

'इंडियन एक्सप्रेस' की पिछले सप्ताह प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में जिन मुद्दों का उल्लेख किया गया, उनमें चुनावी सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' में बदलाव, आयोग के कामकाज का केंद्रीकरण, पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम हटाने की अपील और गोवा में पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने से जुड़े मामले शामिल थे।

हालांकि, ओडिशा के CEO ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनका VRS आवेदन SIR विवाद से संबंधित नहीं है। इसलिए उनके बयान और VRS की प्रक्रिया को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखना महत्वपूर्ण है।

गोपालन का लंबा प्रशासनिक अनुभव

आर. संथान गोपालन ने ओडिशा प्रशासन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान वह भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के उप महानिदेशक, श्रम विभाग के सचिव और कृषि निदेशक जैसे पदों पर भी काम कर चुके हैं। जुलाई 2024 में उन्हें ओडिशा का मुख्य निर्वाचन अधिकारी बनाया गया था।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के तौर पर उनके कार्यकाल में मतदाता सूची से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य हुए। हालिया SIR प्रक्रिया और संशोधित मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद उनका VRS आवेदन सामने आया है।

ओडिशा में IAS-IPS अधिकारियों के VRS और इस्तीफे भी चर्चा में

आर. संथान गोपालन का VRS आवेदन ओडिशा में हाल के वर्षों में सरकारी सेवा छोड़ने वाले वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों की घटनाओं के बीच भी देखा जा रहा है। सितंबर की शुरुआत में भुवनेश्वर के पुलिस उपायुक्त जगमोहन मीणा ने भी सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया था। ओडिशा सरकार ने 27 अगस्त को उनका इस्तीफा स्वीकार किया था और आगे की प्रक्रिया के लिए इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा गया था।

पिछले तीन वर्षों में ओडिशा कैडर के चार IAS और IPS अधिकारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, इन सभी अधिकारियों के फैसलों के कारण अलग-अलग रहे हैं और उन्हें एक ही कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा।

वी.के. पांडियन से लेकर सुजाता कार्तिकेयन तक

ओडिशा कैडर के IAS अधिकारी वी.के. पांडियन ने अक्टूबर 2023 में VRS लिया था। इसके बाद वह 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले बीजू जनता दल (BJD) में शामिल हो गए थे। पांडियन को पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी और उनके संभावित उत्तराधिकारी के रूप में भी राजनीतिक चर्चा में रखा जाता रहा था।

पांडियन की पत्नी सुजाता कार्तिकेयन, जो ओडिशा कैडर की IAS अधिकारी थीं, ने मार्च 2025 में इस्तीफा दिया था। इसके बाद जून 2026 में वह BJD में शामिल हुईं। इन घटनाओं ने भी ओडिशा प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के VRS और इस्तीफे को लेकर सार्वजनिक चर्चा को बढ़ाया।

जगमोहन मीणा और CA रामदास का मामला भी आया सामने

2013 बैच के IPS अधिकारी जगमोहन मीणा ने भी पिछले महीने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर एक कॉर्पोरेट कंपनी से जुड़ने का फैसला किया। वहीं, इस वर्ष की शुरुआत में 2025 बैच के IPS अधिकारी CA रामदास ने हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान ही इस्तीफा दे दिया था।

इस तरह ओडिशा में हाल के वर्षों में वरिष्ठ और युवा दोनों स्तर के अधिकारियों के सरकारी सेवा से बाहर होने के अलग-अलग मामले सामने आए हैं। हालांकि, आर. संथान गोपालन ने अपने मामले में निजी और पारिवारिक कारणों को ही VRS के फैसले की वजह बताया है।

SIR के बाद ओडिशा में अब आगे क्या?

आर. संथान गोपालन के VRS आवेदन के साथ ओडिशा में SIR के बाद की चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी ध्यान गया है। संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित हो चुकी है और इसी प्रक्रिया के दौरान लाखों नामों में बदलाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अलग-अलग दावे किए हैं। दूसरी ओर, गोपालन लगातार यह कहते रहे हैं कि उनका व्यक्तिगत निर्णय SIR विवाद से जुड़ा हुआ नहीं है।

उनके मुताबिक, सरकारी सेवा में 25 वर्ष पूरे होने, निजी मामलों पर ध्यान देने और परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा ने उन्हें VRS के लिए आवेदन करने का आधार दिया। फिलहाल उनके आवेदन पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जानी है।