ere | Source: ereपटना। बिहार में गंगा और कोसी की बाढ़ से राहत मिलने से पहले गंडक नदी के बढ़े जलस्तर ने कई जिलों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली और मुजफ्फरपुर में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर प्रभावित और संवेदनशील जिलों में प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आपदा राहत बल की 41 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें एनडीआरएफ की 14 और एसडीआरएफ की 27 टीमें शामिल हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिलों की स्थिति की समीक्षा

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर गुरुवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने आपदा प्रबंधन विभाग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील जिलों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। बैठक में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली और मुजफ्फरपुर के जिला पदाधिकारी, एसएसपी और एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल भी बैठक में उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने संबंधित जिलाधिकारियों को बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य पूरी तत्परता से संचालित करने का निर्देश दिया। प्रशासन को प्रभावित आबादी की जरूरतों के अनुसार राहत अभियान को आगे बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने को कहा गया है।

गंडक के उफान से कई जिलों में बढ़ी परेशानी

बिहार में इस समय गंडक नदी का पानी बड़ी चुनौती बना हुआ है। गंडक की बाढ़ से पूर्वी और पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण तथा वैशाली के बड़ी संख्या में गांव प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार चार दिनों के भीतर 14 स्थानों पर गंडक के तटबंध या बांध टूटने से स्थिति और गंभीर हुई है। पटना जिले के दियारा क्षेत्र में भी बाढ़ का असर बढ़ा है।

गंडक के साथ गंगा, कोसी और बागमती नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण करीब 1200 गांव प्रभावित बताए गए हैं। इन इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। प्रभावित परिवारों के सामने भोजन, दवाइयों और पशुओं के चारे की व्यवस्था प्रमुख चुनौती बनी हुई है।

41 टीमें संभाल रही हैं राहत और बचाव अभियान

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य में आपदा राहत बल की 41 टीमें तैनात की गई हैं। इनमें एनडीआरएफ की 14 और एसडीआरएफ की 27 टीमें शामिल हैं। इन टीमों की तैनाती का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को गति देना तथा जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में प्रशासन की मदद करना है।

सारण और गोपालगंज के प्रभावित इलाकों में कई परिवार जरूरी सामान लेकर तटबंधों पर पहुंच गए हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को खुले स्थानों अथवा प्लास्टिक के टेंट में समय गुजारना पड़ रहा है। घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाना भी लोगों के लिए चुनौती बना हुआ है।

सम्राट चौधरी ने राहत सामग्री की गुणवत्ता और वितरण पर दिया जोर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में बनाए गए सूखा राशन पैकेजिंग सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां तैयार किए जा रहे खाद्य पदार्थों और उनकी गुणवत्ता की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में किसी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए।

राहत पैकेट में चूड़ा, चना, सत्तू, चीनी, मसाला, ओआरएस, माचिस और मोमबत्ती सहित अन्य जरूरी सामग्री रखी जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रभावित परिवारों को समय पर खाद्य सामग्री के साथ आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जाएं।

हेलीकॉप्टर से भी पहुंचाई जाएगी राहत सामग्री

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए एयरफोर्स के दो हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए उन इलाकों तक भी राहत सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, जहां बाढ़ के कारण सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे प्रभावित आबादी तक जरूरी खाद्य सामग्री पहुंचाने के राहत अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

तटबंधों पर दबाव, जल संसाधन विभाग भी लगातार निगरानी में

उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने राज्य में बाढ़ की स्थिति को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि गंडक सहित अन्य नदियों के तटबंधों पर दबाव की स्थिति बनी हुई है। बगहा और लालगंज में तीन-चार स्थानों पर नया उच्चतर बाढ़ स्तर बना हुआ है। उनके अनुसार अब तक के इतिहास में इन स्थानों पर पानी का स्तर सबसे अधिक ऊंचा पहुंचा है।

विजय कुमार चौधरी ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हुई बारिश के कारण गंगा के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हुई है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। इन परिस्थितियों के बीच तटबंधों की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखने की जरूरत बताई गई है।

प्रशासन का फोकस राहत, बचाव और निगरानी पर

बाढ़ की स्थिति के बीच राज्य सरकार की ओर से प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव अभियान को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव स्तर से जिलों की समीक्षा की गई है और एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ की 41 टीमें मैदान में उतारी गई हैं। इसके साथ ही सूखा राशन तैयार कर प्रभावित परिवारों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

फिलहाल गंडक, गंगा, कोसी और बागमती के जलस्तर तथा तटबंधों की स्थिति पर प्रशासन की निगरानी जारी है। प्रभावित जिलों के अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी बनाए रखने और जरूरतमंद लोगों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।