नई दिल्ली। मोबाइल फोन चोरी होना अब सिर्फ महंगे डिवाइस के नुकसान तक सीमित नहीं रह गया है। साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे ने एक वीडियो के जरिए मोबाइल चोरी होने के बाद सिम के संभावित दुरुपयोग को लेकर लोगों को सतर्क किया है। उनके मुताबिक, अपराधी चोरी किए गए मोबाइल से सिम निकालकर दूसरे फोन में डालने के बाद उपलब्ध बैंकिंग और यूपीआई सुविधाओं का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं।
फोन चोरी होते ही बढ़ सकता है वित्तीय जोखिम
अक्सर लोग स्मार्टफोन चोरी होने के बाद सबसे पहले फोन को लॉक करने, डेटा सुरक्षित करने या डिवाइस को ट्रैक करने पर ध्यान देते हैं। लेकिन सिम कार्ड की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है। अमित दुबे ने बताया कि मोबाइल में मौजूद सिम का दुरुपयोग होने पर साइबर अपराधी वित्तीय लेनदेन से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
बिना UPI ऐप खोले भी उपलब्ध है एक भुगतान सुविधा
अमित दुबे के अनुसार, भारत में *99# जैसी सुविधा के माध्यम से मोबाइल के डायलर से यूपीआई आधारित सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए फोन में यूपीआई ऐप खोलना जरूरी नहीं होता। *99# डायल करने पर स्क्रीन पर अलग-अलग विकल्प दिखाई देते हैं, जिनमें पैसे भेजने, पैसे का अनुरोध करने, खाते का बैलेंस देखने, प्रोफाइल, लंबित अनुरोध, लेनदेन और यूपीआई पिन से जुड़े विकल्प शामिल होते हैं।
चोरी हुए फोन की सिम दूसरे मोबाइल में डालने का खतरा
साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल चोरी हो जाता है और चोर उसमें मौजूद सिम कार्ड निकालकर किसी दूसरे फोन में डाल देता है, तो वह उस सिम से जुड़ी उपलब्ध सेवाओं का दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकता है। ऐसी स्थिति में चोरी हुए फोन का स्क्रीन लॉक या पासवर्ड हर प्रक्रिया में सुरक्षा की गारंटी नहीं देता, क्योंकि सिम दूसरे डिवाइस में इस्तेमाल किया जा सकता है।
यूपीआई पिन को लेकर भी अमित दुबे ने दी चेतावनी
अमित दुबे के मुताबिक, यूपीआई लेनदेन के लिए यूपीआई पिन महत्वपूर्ण सुरक्षा स्तर है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में सिम के माध्यम से यूपीआई पिन से संबंधित प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने बताया कि एसएमएस के जरिए आने वाले सत्यापन संदेशों का इस्तेमाल पिन रीसेट जैसी प्रक्रिया में किया जा सकता है। इसलिए मोबाइल चोरी होने के बाद केवल यूपीआई ऐप को सुरक्षित मानकर निश्चिंत रहना पर्याप्त नहीं है।
मोबाइल चोरी होते ही सबसे पहले क्या करें?
फोन चोरी या गुम होने की स्थिति में समय गंवाए बिना मोबाइल ऑपरेटर से संपर्क करके संबंधित सिम को बंद या ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। सिम जितनी जल्दी निष्क्रिय होगी, उसके अनधिकृत इस्तेमाल की आशंका उतनी ही कम की जा सकती है। इसके साथ ही चोरी हुए मोबाइल की शिकायत दर्ज कराना और आवश्यक ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्रक्रिया पूरी करना भी महत्वपूर्ण है।
ई-सिम को बताया गया एक सुरक्षा विकल्प
अमित दुबे ने ई-सिम के इस्तेमाल को भी एक विकल्प के रूप में बताया है। यदि स्मार्टफोन ई-सिम सुविधा को सपोर्ट करता है, तो उपयोगकर्ता इसका इस्तेमाल कर सकता है। ई-सिम में भौतिक सिम कार्ड निकालकर दूसरे मोबाइल में डालने जैसी स्थिति नहीं होती, जिससे चोरी के बाद सिम से जुड़े कुछ प्रकार के दुरुपयोग का जोखिम कम हो सकता है।
सिर्फ फोन लॉक करके न रहें निश्चिंत
मोबाइल फोन में स्क्रीन लॉक, पासवर्ड या पिन लगाना जरूरी सुरक्षा उपाय है, लेकिन फोन चोरी होने की स्थिति में केवल इसी पर निर्भर रहना उचित नहीं है। सिम कार्ड मोबाइल की बैंकिंग और संचार सेवाओं से जुड़ा हो सकता है। इसलिए फोन चोरी होने पर डिवाइस के साथ-साथ सिम की सुरक्षा पर भी तत्काल कार्रवाई करना जरूरी है।
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए तुरंत उठाएं कदम
मोबाइल चोरी होने की स्थिति में सिम ब्लॉक कराने के साथ बैंक और संबंधित यूपीआई सेवाओं को भी आवश्यकतानुसार सूचित किया जा सकता है। किसी संदिग्ध लेनदेन या अनधिकृत गतिविधि की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित बैंक और आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था से संपर्क करना चाहिए।
