ere | Source: ereवॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार रात ईरान को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया और कहा कि अब फैसला करने की घड़ी आ चुकी है। फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरानी शासन का रवैया नहीं बदला तो अमेरिका की ओर से कोई बड़ा कदम उठाया जा सकता है।

ट्रंप के इस बयान के साथ ही ईरान के उस दावे की भी चर्चा तेज हो गई है, जिसमें उसने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक युद्ध समाप्त करने की अपनी शर्तें पहुंचाने की बात कही है। ईरान के मुताबिक, ये शर्तें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने से जुड़ी हैं। ऐसे में एक तरफ अमेरिका की ओर से कड़े संकेत मिल रहे हैं तो दूसरी ओर ईरान बातचीत के लिए अपनी शर्तें सामने रख रहा है।

ट्रंप ने कहा- फैसले की घड़ी आ चुकी है

फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर कहा कि अब फैसला करने का समय आ गया है। उन्होंने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर अपना मन बना चुके हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि बहुत जल्द कुछ बड़ा होने वाला है।

ट्रंप ने ईरानी शासन के व्यवहार को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। उनके बयान के मुताबिक, यदि ईरान का रवैया सही नहीं रहता है तो परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कितनी दूर तक जा सकता है। ट्रंप के इस बयान को ईरान के लिए एक कड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

ईरान के सामने ट्रंप ने बताए तीन विकल्प

ट्रंप के मुताबिक, युद्ध को खत्म करने के लिए ईरान के सामने तीन संभावित रास्ते हो सकते हैं। इनमें पहला विकल्प ईरान को तबाह करने का बताया गया। दूसरा विकल्प ईरान की अर्थव्यवस्था पर बेहद गंभीर दबाव डालने से जुड़ा है।

तीसरे विकल्प के तौर पर ट्रंप ने ईरान के अमेरिका के साथ समझौता करने की बात कही। इस तरह ट्रंप के बयान में सैन्य कार्रवाई, आर्थिक दबाव और बातचीत—तीनों संभावनाओं का उल्लेख सामने आया।

हालांकि, इन विकल्पों में से आगे किस दिशा में कदम उठाया जाएगा, इसे लेकर ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कोई अंतिम घोषणा नहीं की है। उनके बयान में आने वाले समय में बड़े फैसले के संकेत जरूर दिए गए हैं।

होर्मुज खोलने को लेकर ईरान की शर्तें

इस बीच ईरान ने अमेरिका तक अपनी शर्तें पहुंचाने का दावा किया है। ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के मुताबिक, मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक संदेश पहुंचाया गया है। बताया गया है कि इन शर्तों का संबंध होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने से है।

ईरान की ओर से सामने आए इस रुख से यह संकेत मिलता है कि युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के बीच बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। हालांकि, दोनों पक्षों के बयानों में अभी भी काफी कड़ापन दिखाई दे रहा है।

क्या न्यूयॉर्क में ट्रंप और पेजेश्कियान आमने-सामने होंगे?

इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क जाने की संभावनाओं की भी चर्चा है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके साथ वरिष्ठ राजनयिकों का एक दल भी अमेरिका जा सकता है।

ट्रंप से जब पेजेश्कियान के साथ संभावित मुलाकात के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने संकेत दिया कि वह ईरानी राष्ट्रपति से मिलना चाह सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पेजेश्कियान की अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ भी मुलाकातें प्रस्तावित बताई गई हैं।

अगर दोनों नेताओं की मुलाकात होती है तो यह अमेरिका-ईरान तनाव के बीच महत्वपूर्ण राजनयिक घटनाक्रम हो सकता है। फिलहाल ट्रंप की ओर से ऐसी मुलाकात की कोई अंतिम पुष्टि इस खबर में नहीं दी गई है।

ईरान ने भी दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

ईरान की ओर से भी अमेरिका को कड़ा संदेश दिया गया है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अपनी शर्तें रखने के साथ यह चेतावनी दी है कि यदि उसके खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की कोशिश की गई तो वह पहले की तुलना में अधिक ताकत के साथ जवाब देने के लिए तैयार है।

अलजजीरा को दिए एक इंटरव्यू में ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रजाई ने कहा कि ईरान ने कतरी मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक अपनी शर्तें पहुंचा दी हैं। उनके मुताबिक, फरवरी के उत्तरार्ध में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए युद्ध के शुरुआती 40 दिनों की तुलना में ईरान अब किसी नए संघर्ष के लिए बेहतर तरीके से तैयार है।

यमन के हूतियों को लेकर भी ट्रंप का बयान

क्षेत्र में जारी अन्य संघर्षों पर भी ट्रंप ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका यमन के हूती विद्रोही समूह के संपर्क में है। ट्रंप के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिकी सैनिकों पर हमला नहीं करने की बात कही है।

इस बयान के बीच अमेरिका-ईरान तनाव का क्षेत्रीय असर भी चर्चा में बना हुआ है। ईरान, अमेरिका और इजरायल से जुड़े घटनाक्रमों के साथ यमन में हूतियों की भूमिका भी पश्चिम एशिया की स्थिति को प्रभावित करने वाले मुद्दों में शामिल है।

अब आगे किस दिशा में बढ़ेगा तनाव?

फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से सख्त बयान सामने आ रहे हैं, लेकिन साथ ही मध्यस्थों के जरिए संदेशों के आदान-प्रदान की बात भी सामने आई है। एक तरफ ट्रंप ने किसी बड़े कदम के संकेत दिए हैं, वहीं ईरान ने अपनी शर्तों के साथ बातचीत का रास्ता सामने रखा है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है या बातचीत के जरिए किसी समाधान की दिशा निकलती है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी राष्ट्रपति की संभावित अमेरिका यात्रा और ट्रंप-पेजेश्कियान की संभावित मुलाकात भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम कड़ी बन सकती है।