erer | Source: ereBTech की डिग्री, इंजीनियरिंग का अनुभव और IAS-IPS बनने का सपना… सब कुछ था। लेकिन परिवार पर आई लगातार त्रासदियों ने 25 वर्षीय युवक की पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। UPSC की तैयारी के लिए नौकरी छोड़ी, इसी दौरान पिता और दादा का निधन हो गया, बीमार दादी और बहन की जिम्मेदारी सामने आ गई। अब स्थिति यह है कि नोएडा में रहते हुए केवल किराए के ₹12 हजार से ज्यादा का खर्च भी चिंता का कारण बन गया है। इसके बावजूद युवक का कहना है कि उसने अभी हार नहीं मानी है।

BTech के बाद नौकरी थी, लेकिन मंजिल UPSC को बनाया

कहानी उस युवक की है जिसने वर्ष 2022 में कंप्यूटर साइंस से BTech की पढ़ाई पूरी की थी। डिग्री हासिल करने के बाद उसने ग्रेजुएट इंजीनियरिंग ट्रेनी के तौर पर काम भी शुरू किया। उसके सामने एक सामान्य करियर का रास्ता मौजूद था, लेकिन उसका लक्ष्य कुछ और था।

युवक सिविल सेवा में जाना चाहता था। IAS या IPS अधिकारी बनने के सपने को पूरा करने के लिए उसने नौकरी छोड़ने जैसा बड़ा फैसला लिया और पूरी तरह UPSC की तैयारी में जुट गया। उस समय उसे उम्मीद थी कि कुछ वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा में सफलता मिलेगी और उसका करियर नई दिशा में आगे बढ़ेगा।

लेकिन उसे शायद अंदाजा नहीं था कि परीक्षा की तैयारी के बीच उसकी निजी जिंदगी में ऐसी घटनाएं होंगी, जो उसके पूरे करियर प्लान को बदल देंगी।

UPSC की तैयारी चल रही थी, तभी परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

युवक के मुताबिक, जब वह UPSC की तैयारी कर रहा था, उसी दौरान उसके पिता का निधन हो गया। परिवार का एक बड़ा सहारा अचानक चला गया और घर की जिम्मेदारियां उसके सामने आ खड़ी हुईं।

इसके बाद उसके दादा का भी निधन हो गया। दूसरी तरफ उसकी दादी पार्किंसंस बीमारी से जूझ रही हैं और उनकी देखभाल की जरूरत है। ऐसे हालात में उसके लिए केवल अपने करियर के बारे में सोचना आसान नहीं रहा।

परिवार की जिम्मेदारियों के साथ बहन की शादी की चिंता भी सामने थी। एक के बाद एक मुश्किल परिस्थितियां आती गईं और UPSC की तैयारी प्रभावित होती चली गई।

अफसर बनने का सपना पीछे छूटा, अब किसी नौकरी की तलाश

एक समय जिस युवक का लक्ष्य UPSC पास करके अधिकारी बनने का था, आज वह आर्थिक स्थिरता के लिए नौकरी तलाश रहा है। उसने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में उसके लिए कम वेतन वाली नौकरी भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि घर की आर्थिक जरूरतें लगातार बनी हुई हैं।

नौकरी की तलाश में वह नोएडा पहुंचा। कई जगहों पर टेस्ट और इंटरव्यू दिए। कुछ कंपनियों ने उसे आगे नहीं चुना, जबकि कुछ जगहों से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

उसके सामने एक और चुनौती करियर गैप की है। लंबे समय तक नौकरी से दूर रहने के पीछे परिवार की परिस्थितियां और जिम्मेदारियां थीं, लेकिन नौकरी तलाशते समय यही अंतर उसके लिए मुश्किल पैदा कर रहा है।

MNC में नौकरी मिली तो लगा सब ठीक हो जाएगा, फिर आया नया झटका

नौकरी की तलाश के दौरान एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में उसका चयन भी हुआ। इस खबर से उसे उम्मीद जगी कि शायद अब आर्थिक परेशानियों से बाहर निकलने का रास्ता मिल जाएगा।

उसे लगा कि नौकरी शुरू होने के बाद जिंदगी दोबारा पटरी पर आ सकती है। लेकिन इसी बीच कंपनी ने भर्ती पर रोक लगा दी। नौकरी की उम्मीद एक बार फिर अधूरी रह गई और आर्थिक संकट बना रहा।

यह स्थिति उसके लिए इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि उसके पास नियमित आय का कोई मजबूत स्रोत नहीं है।

नोएडा में सिर्फ किराए का खर्च ₹12 हजार से ज्यादा

युवक ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि वह फिलहाल नोएडा में रह रहा है। उसके अनुसार, अगर खाने-पीने, आने-जाने और दूसरे खर्चों को अलग कर दिया जाए, तब भी केवल रहने के लिए हर महीने ₹12 हजार से अधिक खर्च हो जाता है।

हर महीने उसके सामने यही सवाल रहता है कि अगले महीने के खर्च की व्यवस्था कैसे होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल घर का खर्च उसकी दादी की आधी पेंशन के सहारे चल रहा है।

आर्थिक परेशानी के साथ मानसिक दबाव भी बढ़ा है। युवक ने अपनी पोस्ट में बताया कि कई बार वह बेहद थका हुआ महसूस करता है और एंग्जायटी, तनाव तथा डिप्रेशन जैसी परेशानियों से जूझ रहा है।

मुश्किलों के बीच भी बोला- मैंने हार नहीं मानी

इतनी परेशानियों के बावजूद युवक ने अपनी पोस्ट में यह स्पष्ट किया कि उसने पूरी तरह हार नहीं मानी है। वह दोबारा सरकारी नौकरी की परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।

इसके साथ ही कंप्यूटर साइंस से जुड़ी नौकरियों के लिए भी खुद को तैयार कर रहा है। यानी एक तरफ वह अपने पुराने तकनीकी क्षेत्र में वापसी का रास्ता तलाश रहा है, तो दूसरी ओर सरकारी नौकरी की तैयारी भी जारी है।

अब उसकी सबसे बड़ी दुविधा यही है कि आगे किस रास्ते को प्राथमिकता दी जाए।

UPSC जारी रखे या नौकरी पर ध्यान दे? यही सबसे बड़ा सवाल

युवक ने सोशल मीडिया पर लोगों से सलाह मांगते हुए कई सवाल सामने रखे। क्या उसे प्राइवेट नौकरी हासिल करने पर पूरा ध्यान देना चाहिए? क्या सरकारी नौकरी की तैयारी जारी रखना बेहतर होगा? क्या उसे वापस घर जाकर खर्च कम कर देना चाहिए? या फिर कोई ऐसा रास्ता अपनाया जाए जिससे परिवार की जिम्मेदारियां भी पूरी हों और करियर भी दोबारा खड़ा किया जा सके?

उसके पास कंप्यूटर साइंस में BTech की डिग्री है और लगभग डेढ़ साल का कार्य अनुभव भी है। लेकिन परिवार की परिस्थितियों के कारण बने करियर गैप और आर्थिक दबाव ने उसके लिए अगला कदम तय करना कठिन कर दिया है।

युवक ने अपनी पोस्ट में लोगों से पूछा कि अगर वे उसकी जगह होते तो ऐसी परिस्थिति में क्या फैसला लेते।

UPSC की तैयारी को लेकर संजीव सान्याल की राय भी चर्चा में

रिपोर्ट में UPSC की तैयारी को लेकर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल की पुरानी राय का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, एक इंटरव्यू में संजीव सान्याल ने कहा था कि एक-दो बार UPSC परीक्षा देना ठीक है, लेकिन इसके बाद अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने UPSC की तैयारी में 5 से 8 साल लगाने को युवाओं की ऊर्जा के लिहाज से नुकसानदायक बताया था।

हालांकि, किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को लेकर फैसला व्यक्ति की परिस्थितियों, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक जिम्मेदारियों और करियर विकल्पों पर निर्भर करता है।

एक सपने से शुरू हुई कहानी अब संघर्ष की परीक्षा बन गई

इस 25 वर्षीय युवक की कहानी केवल UPSC की तैयारी और नौकरी के बीच फंसे एक करियर की कहानी नहीं है। BTech के बाद उसके पास नौकरी थी, एक लक्ष्य था और अधिकारी बनने का सपना था। लेकिन परिवार में लगातार हुई घटनाओं ने उसे अपने करियर की दिशा बदलने पर मजबूर कर दिया।

आज उसके सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं—परिवार की जिम्मेदारी, आर्थिक दबाव, करियर गैप और भविष्य को लेकर अनिश्चितता। फिर भी उसकी कहानी का सबसे अहम हिस्सा यही है कि मुश्किल हालात के बीच भी वह नए रास्ते की तलाश कर रहा है।

UPSC का सपना पूरा हो या वह कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में वापस लौटे या किसी दूसरी नौकरी के जरिए अपनी जिंदगी को दोबारा व्यवस्थित करे, फिलहाल उसके सामने सबसे बड़ा लक्ष्य आर्थिक स्थिरता हासिल करना और परिवार की जिम्मेदारियों को संभालना है।