रियाद। मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के किनारे स्थित रणनीतिक और व्यापारिक शहर मोचा पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद हूती विद्रोहियों की नजर अब बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर बताई जा रही है। इस घटनाक्रम ने सऊदी अरब की सुरक्षा, तेल निर्यात और लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मोचा पर कब्जे के बाद बाब अल-मंडेब पर नजर
रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही मोचा पर कब्जे के बाद बाब अल-मंडेब समुद्री मार्ग के और करीब पहुंच गए हैं। बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिहाज से भी इस क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत काफी अधिक है।
ऐसे में यदि बाब अल-मंडेब क्षेत्र में हूतियों का प्रभाव और मजबूत होता है, तो सऊदी अरब पर रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि लाल सागर में हूती गतिविधियों को लेकर रियाद की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
MBS ने ट्रंप को दो बार फोन किया, मांगी सैन्य कार्रवाई
Axios की रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दो बार फोन किया। इस दौरान उन्होंने हूती विद्रोहियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य हमले का अनुरोध किया। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने सऊदी अरब के इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।
सऊदी अरब की ओर से यह अपील ऐसे समय में की गई है जब ईरान समर्थित हूती गुट लाल सागर के एक महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट के और करीब पहुंच गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल अमेरिकी प्रशासन की हूतियों के खिलाफ सीधे तौर पर सैन्य हस्तक्षेप करने की कोई योजना नहीं है।
सऊदी के लिए क्यों अहम है यह समुद्री मार्ग?
बाब अल-मंडेब दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। यह लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच संपर्क स्थापित करता है। इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष या समुद्री मार्ग पर नियंत्रण की कोशिश का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
सऊदी अरब के लिए इसकी अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि क्षेत्र में तेल निर्यात से जुड़े मार्गों की सुरक्षा सीधे तौर पर समुद्री स्थिरता से जुड़ी है। हूतियों की बढ़ती गतिविधियों ने इसी कारण रियाद के सामने नई रणनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
तेल की कीमत करीब 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची
सऊदी क्राउन प्रिंस की ओर से ट्रंप से हूतियों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का अनुरोध किए जाने वाले दिन ही तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को तेल की कीमत करीब 116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई।
लाल सागर में संघर्ष बढ़ने और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के लिए खतरा पैदा होने की आशंका को तेल बाजार में तेजी की प्रमुख वजहों में बताया गया है। मध्य-पूर्व में पहले से जारी तनाव के बीच बाब अल-मंडेब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ा सकती है।
होर्मुज के बाद बाब अल-मंडेब ने बढ़ाई परेशानी
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान पहले से ही होर्मुज समुद्री मार्ग से होने वाली शिपिंग में बाधा डाल रहा है। ऐसे में बाब अल-मंडेब के आसपास हूती गतिविधियों का बढ़ना अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों के लिए एक अतिरिक्त चुनौती बन सकता है।
बाब अल-मंडेब पर हूतियों का संभावित कब्जा या वहां सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी ईरान और उसके सहयोगियों को अमेरिका तथा उसके खाड़ी सहयोगियों पर दबाव बनाने का एक और माध्यम दे सकती है। इसी कारण लाल सागर और उसके आसपास की गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
अमेरिका ने सीधे युद्ध में उतरने से क्यों किया इनकार?
सऊदी अरब की मांग के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हमले से इनकार किए जाने के पीछे यमन में प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से बचने की रणनीति बताई जा रही है।
अमेरिका को आशंका है कि यमन में सीधे सैन्य हस्तक्षेप से संघर्ष और अधिक गहरा सकता है तथा इसका दायरा मध्य-पूर्व के दूसरे देशों तक फैल सकता है। ऐसे में अमेरिका फिलहाल सीधे हमले से दूरी बनाए रखना चाहता है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका सऊदी अरब के साथ सुरक्षा सहयोग से पूरी तरह पीछे हट रहा है। इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर के गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचने की खबर सामने आई। उनकी यात्रा को क्षेत्रीय सुरक्षा और दोनों देशों के बीच समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सऊदी अरब और हूतियों के बीच टकराव कैसे बढ़ा?
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव जुलाई में और बढ़ गया था। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय रियाद ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से लौट रहे वरिष्ठ हूती अधिकारियों को ले जा रहे एक ईरानी विमान को सना में उतरने से रोक दिया था।
इसके बाद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सना हवाई अड्डे पर सऊदी हमले के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से राजनीतिक समर्थन मांगा था। उस समय रियाद ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसे अमेरिकी सैन्य मदद की आवश्यकता नहीं है और वह हूती खतरे से खुद निपट सकता है।
अब सऊदी अरब ने बदला अपना रुख
गुरुवार को सऊदी अरब की ओर से अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की सीधी मांग को उसके पुराने रुख में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब हूती विद्रोहियों की ओर से लाल सागर में सऊदी टैंकरों पर हमले और देश के तेल निर्यात मार्गों को धमकाने की खबरें सामने आई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने इसके बाद सऊदी ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। बढ़ते खतरे के जवाब में सऊदी अरब और उसके यमनी सहयोगियों ने हूती ठिकानों के खिलाफ हवाई हमले और जमीनी अभियान भी चलाए हैं।
सऊदी पलटवार के बाद भी हूतियों का दबाव
सऊदी अरब और उसके यमनी सहयोगियों की ओर से हूती ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बावजूद रिपोर्ट के मुताबिक हूती विद्रोहियों की गतिविधियों में कमी नहीं आई है। लाल सागर के तटीय क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी और बाब अल-मंडेब के करीब बढ़ती गतिविधियां रियाद के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
मौजूदा हालात में लाल सागर और बाब अल-मंडेब की सुरक्षा का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि मध्य-पूर्व पहले से ही गंभीर तनाव से गुजर रहा है। एक समुद्री मार्ग पर बढ़ता सैन्य दबाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को प्रभावित कर सकता है।
अब आगे क्या करेगा अमेरिका और सऊदी अरब?
मध्य-पूर्व के मौजूदा घटनाक्रम ने सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष को एक नए मोड़ पर ला दिया है। सऊदी अरब हूती हमलों का जवाब दे रहा है, लेकिन अब उसने अमेरिका से सीधे सैन्य सहयोग की मांग भी की है। दूसरी ओर, अमेरिका फिलहाल यमन में सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाए हुए है।
मोचा पर हूती नियंत्रण और बाब अल-मंडेब के आसपास बढ़ती गतिविधियों के बीच अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि सऊदी अरब आगे किस रणनीति के साथ आगे बढ़ता है और अमेरिका रियाद की सुरक्षा चिंताओं का किस तरह जवाब देता है। लाल सागर के इस रणनीतिक क्षेत्र में तनाव का आगे बढ़ना पूरे मध्य-पूर्व के साथ-साथ समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
