वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए मिसाइल हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह हमला अपने सैनिकों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए किया गया। वहीं ईरान ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिकी सेना के अनुसार, जॉर्डन में मौजूद उसके सैन्य अड्डे को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गई थीं। अमेरिका का दावा है कि अधिकतर मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोक लिया गया, लेकिन इस घटना के बाद जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया गया। इसके बाद अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन से जुड़े ठिकानों के अलावा कुछ अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और भविष्य में अमेरिकी सैनिकों पर होने वाले हमलों को रोकना है।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनके देश पर किया गया हमला क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाएगा। ईरान का यह भी कहना है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मामलों पर किसी भी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।
पिछले कुछ सप्ताह से दोनों देशों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। कभी मिसाइल हमले, कभी ड्रोन हमले और फिर जवाबी सैन्य कार्रवाई ने हालात को और गंभीर बना दिया है। शांति की कोशिशों की चर्चा जरूर हुई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आ पाया है।
इस बढ़ते संघर्ष का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। मध्य पूर्व के कई देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
दुनिया के कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। उनका कहना है कि लगातार सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिसका असर आम लोगों पर भी पड़ेगा।
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो मध्य पूर्व में एक और बड़ा संकट खड़ा
हो सकता है।
