नई दिल्ली। किसी रिश्ते के टूटने, किसी बेहद करीबी व्यक्ति को खोने या अचानक मिले गहरे भावनात्मक सदमे के बाद लोग अक्सर कहते हैं कि उनका दिल टूट गया। आम बोलचाल में यह सिर्फ भावनाओं को व्यक्त करने का तरीका लगता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में ऐसी स्थिति मौजूद है जिसमें बहुत अधिक भावनात्मक या शारीरिक तनाव का असर कुछ समय के लिए हृदय की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। इसे ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम कहा जाता है। लंदन स्थित कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जेरेमी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में इसी स्थिति के बारे में जानकारी दी है।
‘दिल टूटना’ सिर्फ भावनात्मक एहसास नहीं, शरीर पर भी पड़ सकता है असर
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को मेडिकल भाषा में Takotsubo cardiomyopathy कहा जाता है। यह स्थिति अचानक हुए गंभीर भावनात्मक या शारीरिक तनाव के बाद सामने आ सकती है। किसी बड़े दुख या सदमे के दौरान शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन, खासकर एड्रेनालिन, तेजी से बढ़ सकते हैं। कुछ लोगों में इस तरह के हार्मोनल बदलाव का असर हृदय की मांसपेशियों की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि किसी गंभीर भावनात्मक घटना के बाद सामने आने वाले सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षणों को केवल तनाव मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है। हालांकि हर भावनात्मक सदमा ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम का कारण नहीं बनता और इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बाद ही की जा सकती है।
ब्रेकअप ही नहीं, कई दूसरी घटनाएं भी बन सकती हैं वजह
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को केवल प्रेम संबंध टूटने से जोड़ना सही नहीं है। शरीर और मन पर अचानक पड़ा कोई भी बड़ा भावनात्मक या शारीरिक तनाव कुछ लोगों में इस स्थिति से जुड़ा हो सकता है। किसी करीबी की मृत्यु, ब्रेकअप या तलाक, धोखा मिलने का भावनात्मक सदमा, अचानक बहुत अधिक डर या तनाव, कोई बड़ा हादसा, गंभीर बीमारी या सर्जरी जैसी परिस्थितियों का उल्लेख इसके संभावित ट्रिगर के रूप में किया जाता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि ऐसी किसी घटना के बाद हर व्यक्ति को हृदय संबंधी समस्या हो जाएगी। स्थिति व्यक्ति और परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में क्या होता है?
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में हृदय की मांसपेशी कुछ समय के लिए कमजोर पड़ सकती है। इसके पीछे अचानक हुए भावनात्मक या शारीरिक तनाव की भूमिका मानी जाती है। तनाव की स्थिति में शरीर में एड्रेनालिन और अन्य तनाव हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। कुछ मामलों में इसका असर हृदय की मांसपेशियों के सामान्य कामकाज पर पड़ता है।
इस स्थिति की एक खास बात यह है कि इसके लक्षण कई बार हार्ट अटैक जैसे दिखाई दे सकते हैं। यही कारण है कि मरीज के लिए दोनों स्थितियों में अंतर करना आसान नहीं होता। सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी होने पर इसे केवल भावनात्मक तनाव समझने के बजाय चिकित्सा सहायता लेना जरूरी हो सकता है।
हार्ट अटैक से कैसे अलग है ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम?
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम और हार्ट अटैक के लक्षणों में समानता हो सकती है, लेकिन दोनों के पीछे की प्रक्रिया अलग होती है। ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में आमतौर पर अचानक हुए भावनात्मक या शारीरिक तनाव के बाद हृदय की मांसपेशी अस्थायी रूप से कमजोर हो जाती है और आमतौर पर कोरोनरी धमनियों में वैसा अवरोध नहीं मिलता जैसा हार्ट अटैक में होता है।
वहीं, हार्ट अटैक में आमतौर पर कोरोनरी धमनी में रुकावट के कारण हृदय की मांसपेशी तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है। दोनों स्थितियों के लक्षण एक जैसे नजर आ सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से निष्कर्ष निकालना सुरक्षित नहीं है।
सीने में दर्द और सांस फूलना दिखे तो सावधान रहें
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में सीने में दर्द, सांस फूलना और तेज धड़कन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। समस्या यह है कि ऐसे लक्षणों को कई बार व्यक्ति तनाव, घबराहट या भावनात्मक परेशानी से जोड़कर नजरअंदाज कर देता है। लेकिन क्योंकि यही लक्षण हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति में भी हो सकते हैं, इसलिए इनका चिकित्सकीय मूल्यांकन महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से अचानक सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या तेज धड़कन जैसे लक्षण महसूस हों तो इसे केवल ‘दिल टूटने’ या तनाव का असर मानकर घर पर छोड़ना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी हो सकता है।
किन जांचों से पता चलता है समस्या क्या है?
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम की पहचान केवल बातचीत या लक्षणों के आधार पर नहीं की जाती। डॉक्टर स्थिति का आकलन करने के लिए कई तरह की जांचों का सहारा ले सकते हैं। इनमें ब्लड टेस्ट, ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी और कोरोनरी एंजियोग्राफी जैसी जांच शामिल हो सकती हैं।
इन जांचों की मदद से डॉक्टर यह समझने की कोशिश करते हैं कि हृदय पर किस प्रकार का असर पड़ा है और लक्षणों के पीछे ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम है या हार्ट अटैक जैसी दूसरी हृदय संबंधी स्थिति। सही कारण की पहचान के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन बेहद महत्वपूर्ण होता है।
क्या ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम जानलेवा हो सकता है?
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि कुछ मामलों में हृदय की कार्यक्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है। हालांकि, इसे केवल किसी व्यक्ति के भावनात्मक दुख या ब्रेकअप के आधार पर मृत्यु का कारण मान लेना सही नहीं होगा। वास्तविक स्थिति का पता चिकित्सकीय जांच से ही चलता है।
इसलिए किसी बड़े भावनात्मक सदमे के बाद अगर सीने में दर्द, सांस फूलना या तेज धड़कन जैसे शारीरिक लक्षण सामने आते हैं, तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित है।
भावनात्मक तनाव को भी गंभीरता से समझना जरूरी
दिल टूटने जैसी स्थिति को लोग अक्सर केवल भावनात्मक परेशानी समझते हैं, लेकिन गहरा तनाव शरीर में कई तरह के बदलाव पैदा कर सकता है। ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम इसी बात का उदाहरण है कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हालांकि, हर तनावपूर्ण घटना के बाद हृदय संबंधी बीमारी होना जरूरी नहीं है।
इसलिए किसी व्यक्ति को अचानक लगे बड़े सदमे के बाद यदि सामान्य भावनात्मक परेशानी के साथ कोई नया या असामान्य शारीरिक लक्षण महसूस होता है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय जांच से स्थिति को समझने और उचित उपचार की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
