सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने वाली एक बड़ी फैक्ट्री का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक, यहां करोड़ों रुपये मूल्य के नकली सिक्के तैयार किए जा रहे थे। कार्रवाई के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में इस अवैध कारोबार के पीछे 10वीं फेल उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह का नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार, लूथरा ने अलग-अलग जगहों पर नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में पहुंचाने का नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
ज्वैलरी शॉप की चोरी के बाद बदली जिंदगी, फिर नकली सिक्कों की दुनिया में उतरा
पुलिस के मुताबिक, दिल्ली के उत्तम नगर स्थित एक ज्वैलरी शॉप में चोरी की घटना के बाद लूथरा ने अपना काम बदलने की कोशिश की। उसने कपड़ों की दुकान शुरू की, लेकिन कारोबार सफल नहीं हुआ। इसके बाद देहरादून के गुलशन गंभीर से उसकी मुलाकात हुई। इसी संपर्क के बाद उसने नकली सिक्के बनाने की तकनीक सीखी और धीरे-धीरे इसी अवैध कारोबार में सक्रिय हो गया।
1997 में सीखा नकली सिक्के बनाने का हुनर, दो साल बाद ही पहुंच गया जेल
जांच के दौरान सामने आया कि लूथरा ने वर्ष 1997 के आसपास गुलशन गंभीर के संपर्क में आने के बाद नकली सिक्के तैयार करने का काम सीखा था। वर्ष 1999 में कनॉट प्लेस पुलिस ने उसे नकली सिक्कों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने कथित तौर पर अपना नेटवर्क और मजबूत किया और पुलिस की नजरों से बचने के लिए नेपाल तक चला गया।
2017 में फिर पकड़ा गया, एक लाख रुपये का था इनाम
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लूथरा को हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया था। उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से पांच रुपये के हजारों नकली सिक्के बरामद किए गए थे। पूछताछ में नकली सिक्के बनाने के नेटवर्क से जुड़े कई अहम खुलासे हुए थे।
सहारनपुर में छह मशीनों से रोज बन रहे थे हजारों नकली सिक्के
पुलिस की मौजूदा कार्रवाई में पता चला कि सहारनपुर में भी कथित तौर पर नकली सिक्के तैयार करने का ठिकाना बनाया गया था। पुलिस के अनुसार, यहां छह मशीनों की मदद से रोजाना करीब 10 से 12 हजार 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार किए जा रहे थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 6,400 तैयार सिक्के बरामद किए, जबकि बड़ी संख्या में अधबने सिक्के भी मिले हैं।
असली कीमत 20 रुपये, लेकिन एजेंटों को 12 से 15 रुपये में देते थे नकली सिक्का
जांच में नकली सिक्कों को बाजार तक पहुंचाने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह तैयार सिक्कों को सीधे दुकानदारों तक पहुंचाने के बजाय एजेंटों की मदद लेता था। एक 20 रुपये का नकली सिक्का एजेंट को कथित तौर पर 12 से 15 रुपये में दिया जाता था। इसके बाद एजेंट कमीशन के आधार पर इन्हें अलग-अलग दुकानों और दूसरे कारोबारी ठिकानों पर खपाते थे।
शराब ठेके और टोल प्लाजा बने नकली सिक्के खपाने का बड़ा जरिया
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह ऐसे स्थानों को निशाना बनाता था, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में नकदी का लेनदेन होता है। इनमें शराब के ठेके, टोल प्लाजा और किराना दुकानें शामिल बताई गई हैं। पुलिस के अनुसार, शराब के ठेकों को नकली सिक्के खपाने के लिए गिरोह की प्राथमिकता में रखा गया था।
पांच-छह रुपये में तैयार होता था सिक्का, 20 रुपये में बाजार में चलता था
पुलिस के मुताबिक, एक नकली सिक्का तैयार करने में करीब पांच से छह रुपये का खर्च आता था। इसके बाद वही सिक्का अंकित मूल्य 20 रुपये के रूप में बाजार में चलाया जाता था। कम लागत और अधिक अंकित मूल्य के अंतर से गिरोह को प्रत्येक सिक्के पर बड़ा मुनाफा होता था। बड़ी मात्रा में उत्पादन के चलते यह कथित कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच गया।
सात रजिस्टर खोलेंगे पूरे नेटवर्क का राज, एजेंटों तक पहुंचने में जुटी पुलिस
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस को सात रजिस्टर भी मिले हैं। इन रजिस्टरों में कथित तौर पर लेनदेन और सिक्कों की सप्लाई से संबंधित हिसाब-किताब दर्ज होने की संभावना है। अब पुलिस इन दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि नकली सिक्कों को किन-किन इलाकों में भेजा गया और इस नेटवर्क में कितने एजेंट जुड़े हुए थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह के नेटवर्क और अब तक बाजार में पहुंचाए गए नकली सिक्कों की वास्तविक मात्रा की जांच जारी है।
