ere | Source: ererमुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने का ऐलान किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलनरत अभ्यर्थियों के समर्थन में मैदान में उतरने की घोषणा की है। CJP की ओर से रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि अभिजीत दीपके और पार्टी के अन्य नेता MPSC अभ्यर्थियों के साथ चल रहे प्रदर्शन में शामिल होंगे।

MPSC अभ्यर्थियों के साथ आंदोलन में उतरेंगे दीपके

कॉकरोच जनता पार्टी के अनुसार, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की अलग-अलग ऑनलाइन परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। पार्टी ने कहा है कि वह इस आंदोलन में अभ्यर्थियों का साथ देगी और उनकी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाएगी।

इससे पहले MPSC के कुछ अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के वालुज इलाके में स्थित अभिजीत दीपके के आवास पर उनसे मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद दीपके ने अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।

24 सितंबर तक का अल्टीमेटम

CJP ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग का उल्लेख किया है। पार्टी ने कहा है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक संबंधित मांग पूरी नहीं होती।

पार्टी के मुताबिक, यदि 24 सितंबर तक मांग पूरी नहीं हुई तो अभिजीत दीपके और CJP के अन्य नेता MPSC अभ्यर्थियों से बातचीत करने के लिए राज्यव्यापी दौरा करेंगे। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को समझने और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

‘इस्तीफा होने तक अभ्यर्थियों के साथ खड़े रहेंगे’

MPSC अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में अपनी स्थिति स्पष्ट की।

दीपके ने कहा, "मैं और CJP MPSC अभ्यर्थियों की इस लड़ाई में उनके साथ हैं। हम अभ्यर्थियों के साथ तब तक खड़े रहेंगे, जब तक इस्तीफा नहीं हो जाता।"

CJP के इस रुख के बाद महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। पार्टी पहले भी युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मुद्दे उठाती रही है।

प्रथमेश देशमुख की मौत के बाद गरमाया मामला

MPSC परीक्षाओं से जुड़ा यह मुद्दा उस समय अधिक चर्चा में आया जब 28 वर्षीय प्रथमेश देशमुख ने पुणे में आत्महत्या कर ली थी। उसके पास से मिले सुसाइड नोट में करीब 2.5 लाख रुपये के कर्ज का उल्लेख होने की बात सामने आई थी।

इसके बाद CJP ने फडणवीस सरकार को निशाने पर लिया। पार्टी का कहना है कि प्रथमेश देशमुख व्यवस्था, बेरोजगारी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं की आर्थिक परिस्थितियों से परेशान था और इसी वजह से उसने यह कठोर कदम उठाया।

हालांकि, इन दावों के संदर्भ में उपलब्ध जानकारी में CJP की ओर से लगाए गए आरोपों का उल्लेख है। प्रथमेश देशमुख की मौत के बाद परीक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं पर पड़ने वाले दबाव को लेकर बहस तेज हुई।

प्रथमेश के परिवार से भी मिले दीपके

अभिजीत दीपके ने इस सप्ताह प्रथमेश देशमुख के परिवार से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रथमेश नौकरी हासिल करने और अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के सपने के साथ पुणे गया था।

दीपके के मुताबिक, प्रथमेश ने अपने खर्च पूरे करने के लिए दोस्तों से पैसे उधार लिए थे। उन्होंने पेपर लीक और परिणामों में देरी को छात्रों पर बढ़ते दबाव से जोड़ते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाए।

दीपके ने कहा, "उसने अपने खर्चों को पूरा करने के लिए दोस्तों से पैसे उधार लिए थे। लेकिन पेपर लीक और परिणामों में देरी के कारण छात्रों पर दबाव बढ़ता गया। यह व्यवस्था की गलती है और यह व्यवस्था द्वारा की गई हत्या है।"

क्या फिर शुरू होगा ‘सीजन-2’ वाला आंदोलन?

अभिजीत दीपके इससे पहले भी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन का संकेत दे चुके हैं। करीब एक महीने पहले उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के संदर्भ में ‘सीजन-2’ शुरू करने की बात कही थी।

उस समय दीपके ने आरोप लगाया था कि भाजपा देश के युवाओं से डरती है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आने वाली कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए संकेत दिया था कि देशभर में एक बार फिर आंदोलन शुरू किया जा सकता है।

अब महाराष्ट्र में MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल होने के ऐलान के बाद उनके पुराने बयान की भी चर्चा होने लगी है। हालांकि, मौजूदा आंदोलन का केंद्र महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं और उससे जुड़ी अभ्यर्थियों की मांगें हैं।

मनोज जरांगे के समर्थन में भी उतरे दीपके

MPSC मुद्दे के अलावा अभिजीत दीपके हाल के दिनों में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के समर्थन को लेकर भी फडणवीस सरकार पर निशाना साध चुके हैं। बीते शुक्रवार को दीपके ने जरांगे से मुलाकात की थी।

मुलाकात के बाद दीपके ने सरकार से जरांगे की मांगों को समझने और उनसे बातचीत करने की अपील की। उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को आंदोलन कर रहे लोगों से संवाद करना चाहिए।

दीपके ने कहा, "सरकार को उनकी मांगों को समझने के लिए उनसे बातचीत करनी चाहिए...।"

सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल

मनोज जरांगे से मुलाकात के बाद अभिजीत दीपके ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं? वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेजते हैं, वहीं यहां के स्कूलों का स्तर ठीक नहीं हैं।"

उन्होंने सरकार से यह भी सवाल किया कि क्या वह मनोज जरांगे को सोनम वांगचुक की तरह 26 दिनों तक भूखा रखना चाहती है। दीपके ने कहा कि सरकार को बातचीत के जरिए मामले का समाधान निकालना चाहिए।

‘जरांगे को छुआ तो पूरा महाराष्ट्र आ जाएगा’

अभिजीत दीपके ने अपने बयान में मनोज जरांगे के आंदोलन को लेकर सरकार को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, "जैसा उन्होंने सोनम वांगचुक के मामले में किया, वैसा मनोज जरांगे के साथ करने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। लेकिन यह महाराष्ट्र है और यहां यह नहीं चलेगा। अगर किसी ने मनोज जरांगे को छुआ, तो पूरा महाराष्ट्र यहां आ जाएगा।"

उन्होंने राजनीतिक नेताओं की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाया। दीपके का कहना था कि नेताओं के पास हास्य कलाकारों से मिलने का समय है, लेकिन जरांगे से बातचीत करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा।

महाराष्ट्र में एक साथ कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

कॉकरोच जनता पार्टी के हालिया बयानों और गतिविधियों से संकेत मिलता है कि पार्टी महाराष्ट्र सरकार को अलग-अलग मुद्दों पर घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। MPSC अभ्यर्थियों की परीक्षा संबंधी मांगों से लेकर बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और मनोज जरांगे के आंदोलन तक CJP लगातार सरकार पर सवाल उठा रही है।

फिलहाल सबसे ताजा ऐलान MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को लेकर है। CJP ने 24 सितंबर की समयसीमा का उल्लेख करते हुए कहा है कि मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में राज्यव्यापी दौरा किया जाएगा। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की ओर से अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है और CJP अपने घोषित आंदोलन को किस रूप में आगे बढ़ाती है।