नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज हासिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में नई व्यवस्था तैयार कर रहा है। इसके तहत कारोबारियों के UPI लेनदेन के आंकड़ों को उनकी कर्ज पात्रता का आकलन करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। खास बात यह है कि यह सुविधा उन छोटे कारोबारियों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है, जिनके पास GST रजिस्ट्रेशन नहीं है। SBI के वरिष्ठ अधिकारी और प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार तिवारी ने इस संबंध में जानकारी दी है।
UPI ट्रांजैक्शन बनेगा कारोबार की बिक्री का संकेत
SBI की प्रस्तावित व्यवस्था का आधार छोटे कारोबारियों के डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड होगा। यदि किसी छोटे कारोबार में लगातार बिक्री हो रही है और ग्राहक उस कारोबार का भुगतान UPI के माध्यम से कर रहे हैं, तो इन डिजिटल लेनदेन के आंकड़ों को कारोबार की बिक्री के संकेतक के तौर पर देखा जा सकता है। बैंक इसी दिशा में UPI आधारित एक नया समाधान विकसित कर रहा है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे कारोबारियों की ऋण लेने की क्षमता का आकलन करना है, जिनके पास GST रजिस्ट्रेशन नहीं है। यानी किसी छोटे व्यापारी के पास GST नंबर नहीं होने की स्थिति में उसके नियमित डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड कर्ज मूल्यांकन के लिए उपयोगी आंकड़ा बन सकता है।
GST वाले कारोबारियों को पहले से मिल रही तेज लोन सुविधा
SBI के मुताबिक GST के तहत पंजीकृत कारोबारियों को कर्ज देने से जुड़ी चुनौती का बैंक समाधान कर चुका है। ऐसे मामलों में बैंक 10 मिनट के भीतर लोन देने की स्थिति में है। पिछले 18 महीनों के दौरान SBI ने GST और PAN से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल करके एक लाख करोड़ रुपये के लोन दिए हैं।
हालांकि GST नंबर नहीं रखने वाले कारोबारियों के मामले में बैंक के सामने अलग तरह की चुनौती रहती है। ऐसे कारोबारियों के कारोबार और आय का आकलन करने के लिए पारंपरिक दस्तावेज हमेशा पर्याप्त नहीं होते। इसी वजह से वैकल्पिक डिजिटल आंकड़ों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो सकता है।
बैंक को कहां से मिलेगी UPI भुगतान की जानकारी?
UPI भुगतान से जुड़े आंकड़ों के इस्तेमाल को लेकर अश्विनी कुमार तिवारी ने एक महत्वपूर्ण पहलू बताया है। उनके अनुसार कर्ज देने वाले बैंक के पास हर समय यह स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि किसी लेनदेन में पैसा कहां जा रहा है। वहीं प्राप्तकर्ता बैंक और लेनदेन में मदद करने वाले तीसरे पक्ष के भुगतान ऐप के पास इस संबंध में जानकारी मौजूद होती है।
ऐसे में ग्राहक की सहमति के आधार पर बैंक अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल कर सकता है। UPI भुगतान के साथ दूरसंचार कंपनियों से मिलने वाले आंकड़े जैसे अन्य स्रोत भी ऐसे मॉडल का हिस्सा हो सकते हैं। इन सूचनाओं के आधार पर बैंक ग्राहक की कर्ज पात्रता का आकलन करने वाला मॉडल तैयार कर सकता है।
ग्राहक की सहमति से इस्तेमाल होगा डेटा
SBI की प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहक की सहमति महत्वपूर्ण होगी। अश्विनी कुमार तिवारी के अनुसार बैंक ग्राहक की अनुमति के आधार पर UPI भुगतान और अन्य स्रोतों से मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल कर सकता है। यानी डिजिटल लेनदेन के आंकड़ों को कर्ज मूल्यांकन में शामिल करने की प्रक्रिया ग्राहक की सहमति से आगे बढ़ाई जा सकती है।
इस तरह बैंक के सामने कारोबारी की वास्तविक डिजिटल भुगतान गतिविधि का एक अतिरिक्त आधार उपलब्ध हो सकता है। इससे उन छोटे कारोबारियों का आकलन करने में मदद मिल सकती है, जिनके पास GST रजिस्ट्रेशन नहीं है।
छोटे दुकानदारों के लिए क्यों अहम है SBI का यह कदम?
देश में बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं। दुकान, व्यापार या अन्य छोटे कारोबार में ग्राहकों से UPI के जरिए मिलने वाली रकम का रिकॉर्ड कारोबार की नियमितता का संकेत दे सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में इसी डिजिटल गतिविधि को कर्ज मूल्यांकन की प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
यदि यह मॉडल सफल होता है तो GST रजिस्ट्रेशन नहीं रखने वाले छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और अन्य छोटे कारोबारियों के लिए बैंकिंग प्रणाली से कर्ज हासिल करने का रास्ता आसान हो सकता है। खासतौर पर उन कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड उपयोगी साबित हो सकता है, जिनका कारोबार नियमित रूप से चलता है और जिनके पास UPI के जरिए होने वाले लेनदेन का पर्याप्त इतिहास मौजूद है।
SBI को उम्मीद, वैकल्पिक आंकड़ों से बढ़ेगी कर्ज की पहुंच
अश्विनी कुमार तिवारी ने उम्मीद जताई है कि नए प्रकार के आंकड़ों के आधार पर छोटे कारोबारियों को लोन उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसका उद्देश्य उन कारोबारियों की ऋण संबंधी मुश्किलों को कम करना है, जिन्हें GST जैसे पारंपरिक कारोबारी आंकड़ों के अभाव में कर्ज मूल्यांकन के दौरान कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
UPI आधारित आंकड़ों को कर्ज आकलन से जोड़ने की पहल बैंकिंग व्यवस्था में डिजिटल लेनदेन की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है। जहां पहले कारोबार की क्षमता समझने के लिए कागजी दस्तावेजों और औपचारिक कारोबारी आंकड़ों पर अधिक निर्भरता रहती थी, वहीं अब डिजिटल भुगतान गतिविधि को भी एक संभावित मूल्यांकन आधार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है।
क्या हर UPI इस्तेमाल करने वाले कारोबारी को तुरंत मिलेगा लोन?
SBI की बताई गई व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि केवल UPI भुगतान करने से किसी कारोबारी को अपने आप लोन मिल जाएगा। UPI लेनदेन के आंकड़ों का इस्तेमाल कर्ज पात्रता का आकलन करने वाले मॉडल में किया जा सकता है। अंतिम कर्ज पात्रता बैंक की संबंधित प्रक्रिया और मूल्यांकन पर निर्भर होगी।
फिलहाल SBI इस दिशा में UPI आधारित समाधान विकसित कर रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य GST रजिस्ट्रेशन नहीं रखने वाले छोटे कारोबारियों के लिए उपलब्ध आंकड़ों का दायरा बढ़ाना और उनके कर्ज मूल्यांकन को अधिक डिजिटल बनाना है।
डिजिटल भुगतान से कर्ज तक, बदल सकती है छोटे कारोबारियों की तस्वीर
SBI की यह पहल सफल रहती है तो छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान केवल पैसे लेने का माध्यम नहीं रहेगा, बल्कि कारोबार की गतिविधि का महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड भी बन सकता है। नियमित UPI लेनदेन वाले कारोबारियों के लिए यही रिकॉर्ड भविष्य में बैंक के कर्ज मूल्यांकन में उपयोगी भूमिका निभा सकता है।
कुल मिलाकर SBI की नई पहल का केंद्र GST रजिस्ट्रेशन से बाहर रहने वाले छोटे कारोबारी हैं। UPI लेनदेन और ग्राहक की सहमति से उपलब्ध अन्य आंकड़ों का इस्तेमाल करके कर्ज पात्रता का आकलन करने की तैयारी की जा रही है। बैंक को उम्मीद है कि वैकल्पिक डिजिटल आंकड़ों के सहारे छोटे कारोबारियों तक कर्ज की पहुंच बढ़ाने और उनकी ऋण संबंधी कठिनाइयों को कम करने में मदद मिल सकती है।
