मेरठ। सरकारी नौकरी को आज भी सुरक्षित करियर और बेहतर भविष्य की गारंटी माना जाता है। खासकर बैंक की स्थायी नौकरी, अच्छी सैलरी और नौकरी की सुरक्षा मिलने के बाद आमतौर पर कोई व्यक्ति इसे छोड़ने के बारे में नहीं सोचता। लेकिन उत्तर प्रदेश के मेरठ की स्निग्धा बोस ने इन सभी सुविधाओं के बावजूद अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया। भारतीय स्टेट बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम कर चुकीं स्निग्धा ने अब योग और वेलनेस को अपना करियर बना लिया है और मेरठ में अपना योगा वेलनेस स्टूडियो चला रही हैं।
बैंक की नौकरी में सबकुछ था, फिर क्यों लिया इस्तीफा?
स्निग्धा ने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि बैंक की नौकरी बाहर से जितनी आकर्षक और सुरक्षित नजर आती थी, उनके लिए उसका रोज का अनुभव उतना ही चुनौतीपूर्ण होता जा रहा था। लंबे समय तक ऑफिस में बैठकर काम करना, लगातार काम का दबाव और तनाव उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके थे। धीरे-धीरे इसका असर उनकी मानसिक स्थिति और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ने लगा।
उनके मुताबिक, हर दिन एक जैसी दिनचर्या दोहराना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा था। सुबह काम के लिए निकलना, घंटों ऑफिस में बैठे रहना, लगातार जिम्मेदारियों और काम के दबाव से जूझना और फिर थककर घर लौटना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया था। अगले दिन फिर यही सिलसिला शुरू हो जाता था। इस लगातार चलने वाली दिनचर्या के बीच उन्हें अपने लिए समय निकालना भी मुश्किल लगता था।
तनाव और सिरदर्द ने बदल दी सोच
स्निग्धा ने बताया कि काम के तनाव के कारण उन्हें अक्सर सिरदर्द की परेशानी रहती थी और कई बार दर्द की दवा तक लेनी पड़ती थी। एक समय के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अगर वह इसी रूटीन में आगे भी चलती रहीं तो शायद अपनी पसंद और मानसिक सुकून के लिए समय नहीं निकाल पाएंगी। इसी एहसास ने उन्हें अपने करियर को नए सिरे से देखने के लिए मजबूर किया।
नौकरी छोड़ने का फैसला उनके लिए आसान नहीं था। बैंक की स्थायी नौकरी, नियमित आमदनी और सुरक्षित करियर छोड़ने को लेकर उन्हें आसपास के लोगों से भी सलाह और रोक-टोक का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद स्निग्धा ने अपनी प्राथमिकताओं को समझते हुए अलग रास्ता चुनने का निर्णय लिया। उन्होंने बैंक की नौकरी से इस्तीफा दिया और योग तथा वेलनेस के क्षेत्र में अपना काम शुरू कर दिया।
नौकरी छोड़ी, अब योग स्टूडियो चला रहीं
नौकरी छोड़ने के बाद स्निग्धा ने मेरठ में तुला वेलनेस स्टूडियो की शुरुआत की। अब वह योग के जरिए लोगों को बेहतर शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक शांति और स्वस्थ जीवनशैली की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका कहना है कि जीवन में काम और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
दूसरों को भी दी जरूरी सलाह
हालांकि स्निग्धा अपनी कहानी को हर व्यक्ति के लिए नौकरी छोड़ने की सलाह नहीं मानतीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर किसी के लिए नौकरी छोड़कर नया करियर शुरू करना संभव नहीं होता। परिवार की जिम्मेदारियां, आर्थिक स्थिति और भविष्य की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। ऐसे में नौकरी करते हुए भी अपनी सेहत और मानसिक शांति के लिए समय निकाला जा सकता है।
स्निग्धा के मुताबिक, योग के लिए नौकरी छोड़ना जरूरी नहीं है। नियमित योग और व्यायाम को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाकर शरीर की ताकत और लचीलापन बढ़ाया जा सकता है। साथ ही मानसिक तनाव को कम करने और खुद के लिए समय निकालने की कोशिश भी की जा सकती है।
इस वजह से चर्चा में आई स्निग्धा की कहानी
स्निग्धा की कहानी इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने ऐसी नौकरी छोड़ी जिसे पाने के लिए देशभर में लाखों युवा मेहनत करते हैं। उन्होंने नौकरी की सुरक्षा और स्थिर आय के बजाय अपनी पसंद, स्वास्थ्य और मानसिक सुकून को प्राथमिकता दी। उनका फैसला यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि करियर में सफलता केवल अच्छी नौकरी और सैलरी तक सीमित है या फिर उस काम में संतुष्टि और बेहतर जीवन भी उतना ही जरूरी है।
