नई दिल्ली। नई दिल्ली में शनिवार से 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का औपचारिक आगाज होने जा रहा है। भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में BRICS के 11 सदस्य देशों के नेता हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित मुलाकातों पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। वैश्विक व्यापार तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बदलती विश्व व्यवस्था के बीच यह सम्मेलन BRICS की बढ़ती भूमिका के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सात साल बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग, साथ होगा बड़ा प्रतिनिधिमंडल
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए उनका शनिवार को नई दिल्ली पहुंचने का कार्यक्रम है। रिपोर्ट के अनुसार, शी जिनपिंग अकेले नहीं बल्कि बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि चीन के राष्ट्रपति के साथ करीब 400 लोगों का प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंच सकता है। इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ जिनपिंग की भारत यात्रा ने सम्मेलन को लेकर कूटनीतिक और रणनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
मोदी-शी मुलाकात पर दुनिया की खास नजर
इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित मुलाकात को सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में गिना जा रहा है। दोनों नेताओं की बातचीत भारत और चीन के संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के संदर्भ में भी अहम मानी जा रही है। BRICS का मंच दोनों देशों को बहुपक्षीय स्तर पर संवाद का अवसर भी प्रदान करेगा।
पुतिन और पेजेशकियन पहले ही पहुंच चुके दिल्ली
BRICS सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। सम्मेलन में उनकी मौजूदगी ऐसे समय हो रही है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अंतरराष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। ऐसे में BRICS मंच पर इन संकटों और उनके वैश्विक प्रभावों पर चर्चा महत्वपूर्ण होगी।
BRICS में व्यापार से लेकर नई विश्व व्यवस्था तक पर मंथन
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना, ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना, वैश्विक व्यापार तनाव, युद्धों के प्रभाव और नई विश्व व्यवस्था जैसे विषय प्रमुख हैं। BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने और वैश्विक मंच पर विकासशील देशों के हितों को अधिक मजबूती से रखने पर भी ध्यान रहेगा।
डॉलर के विकल्प के रूप में स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा देने पर जोर
BRICS देशों के बीच आपसी व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देना सम्मेलन के प्रमुख आर्थिक विषयों में शामिल है। इसके तहत रुपया, युआन और रूबल जैसी स्थानीय मुद्राओं के माध्यम से व्यापार को बढ़ावा देने के विकल्पों पर चर्चा होती रही है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करना और व्यापार के लिए वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की कोशिश
BRICS के एजेंडे में ग्लोबल साउथ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। विकासशील और अल्पविकसित देशों के आर्थिक तथा कूटनीतिक हितों को वैश्विक मंचों पर अधिक प्रमुखता देने का मुद्दा सम्मेलन में चर्चा का प्रमुख विषय रहेगा। BRICS के माध्यम से विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी ढंग से उठाने पर जोर दिया जा सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट भी अहम मुद्दा
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति व्यवस्था पर असर भी सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रहेगा। युद्ध और क्षेत्रीय तनावों के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर पड़ने वाले प्रभाव, व्यापारिक गतिविधियों और आर्थिक स्थिरता से जुड़े विषयों पर भी चर्चा महत्वपूर्ण होगी। पारस की खाड़ी में तनाव का वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर असर भी चर्चा के दायरे में रहेगा।
न्यू डेवलपमेंट बैंक के विस्तार पर भी चर्चा
BRICS के न्यू डेवलपमेंट बैंक के विस्तार और उसकी भूमिका को मजबूत करने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। बैंक के माध्यम से सदस्य देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने में न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका BRICS के आर्थिक एजेंडे का अहम हिस्सा है।
WHO प्रमुख डॉ. टेड्रोस भी पहुंचे भारत
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस भी 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शनिवार को नई दिल्ली पहुंच गए। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सामाजिक माध्यम ‘X’ पर पोस्ट के जरिए उनके भारत आगमन की जानकारी साझा करते हुए उनका स्वागत किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने लिखा, “18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आगमन पर डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस का हार्दिक स्वागत है। उनकी यह यात्रा साझा प्रगति और समृद्धि के लिए स्वास्थ्य संबंधी मामलों में वैश्विक सहयोग के महत्व को रेखांकित करती है।”
मोदी की कई वैश्विक नेताओं से द्विपक्षीय बातचीत
BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी करेंगे। इनमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली संभावित बातचीत पर विशेष नजर रहेगी। सम्मेलन के बहुपक्षीय कार्यक्रमों के साथ-साथ ऐसी द्विपक्षीय बैठकें भी भारत की कूटनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगी।
दिल्ली में BRICS का बड़ा शक्ति प्रदर्शन
12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाला 18वां BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब दुनिया वैश्विक व्यापार, युद्ध, क्षेत्रीय संघर्ष और बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसी कई बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे माहौल में 11 सदस्य देशों के नेताओं की मौजूदगी BRICS को वैश्विक मंच पर चर्चा के केंद्र में ला रही है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग से लेकर वैश्विक राजनीतिक मुद्दों तक कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
