rrt | Source: rtrtनई दिल्ली। सोने की कीमतों को लेकर बाजार में एक बार फिर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। हाल के महीनों में सोने के भाव में करेक्शन देखने को मिला है, लेकिन इसके बावजूद कुछ बड़े वैश्विक निवेशक और विश्लेषक लंबी अवधि में सोने को लेकर सकारात्मक नजरिया बनाए हुए हैं। इसी बीच अरबपति और Electrum के चेयरमैन थॉमस कपलान के एक अनुमान ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

कपलान का मानना है कि आने वाले लंबे समय में सोने की कीमत मौजूदा स्तर से कई गुना ऊपर जा सकती है। उन्होंने सोने के लिए 30,000 डॉलर, 40,000 डॉलर और यहां तक कि 50,000 डॉलर प्रति औंस तक के संभावित स्तर की बात कही है। यदि 50,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर हासिल होता है और डॉलर-रुपये की दर 95 रुपये प्रति डॉलर के आसपास रहती है, तो भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 15 लाख रुपये के आसपास बैठ सकती है।

₹15 लाख प्रति 10 ग्राम का अनुमान कैसे निकला?

फिलहाल दिए गए आंकड़े के अनुसार, भारत में 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.50 लाख रुपये है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत लगभग 4,600 डॉलर प्रति औंस मानी गई है। ऐसे में 50,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमत की तुलना में करीब दस गुना अधिक होगा।

यदि डॉलर की विनिमय दर 95 रुपये प्रति डॉलर मानी जाए, तो 50,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर का भारतीय मुद्रा में रूपांतरण करने पर 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 15 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती है। हालांकि, यह गणना एक संभावित परिदृश्य पर आधारित है और इसे सोने की कीमत का निश्चित भविष्य का लक्ष्य नहीं माना जाना चाहिए।

थॉमस कपलान ने क्या कहा?

Electrum के चेयरमैन थॉमस कपलान का मानना है कि सोने में लंबी अवधि की तेजी अभी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने सोने के संभावित भविष्य के स्तरों की चर्चा करते हुए 30,000 डॉलर से 50,000 डॉलर प्रति औंस तक के आंकड़े सामने रखे हैं।

हालांकि, कपलान ने यह स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई है कि सोना 50,000 डॉलर प्रति औंस या भारतीय बाजार में लगभग 15 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक कब पहुंच सकता है। इसलिए इस अनुमान को किसी निश्चित तारीख या निकट अवधि के लक्ष्य के रूप में देखना सही नहीं होगा।

क्या अभी सोने में और गिरावट आ सकती है?

कपलान के मुताबिक, निकट अवधि में सोने की कीमत में आगे भी गिरावट या करेक्शन देखने को मिल सकता है। यानी लंबे समय में तेजी की संभावना जताए जाने के बावजूद सोने का सफर सीधा ऊपर जाने वाला नहीं माना जा रहा है।

निवेशकों को इस दौरान कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। सोने और चांदी में संभावित बड़ी तेजी के साथ-साथ बीच-बीच में मजबूत करेक्शन भी देखने को मिल सकते हैं। यही वजह है कि 50,000 डॉलर प्रति औंस का अनुमान लंबी अवधि की संभावित तस्वीर के तौर पर देखा जा रहा है।

2025 की तेजी के बाद क्यों बढ़ी चिंता?

साल 2025 में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। इसके बाद हाल के महीनों में सोने के भाव में करेक्शन आया। इस गिरावट के बाद बाजार में यह सवाल उठने लगा कि क्या सोने का लंबा तेजी वाला दौर अब समाप्त हो गया है।

हालांकि, थॉमस कपलान समेत कई वैश्विक विश्लेषक अभी भी लंबी अवधि में सोने को लेकर सकारात्मक रुख रखते हैं। कपलान मौजूदा कमजोरी को बड़े तेजी वाले बाजार के बीच आने वाला सामान्य करेक्शन मानते हैं।

1987 के बाजार संकट से क्यों की तुलना?

कपलान ने मौजूदा स्थिति को समझाने के लिए 1987 के अमेरिकी शेयर बाजार की बड़ी गिरावट का उदाहरण भी दिया। उस समय ब्लैक मंडे के दौरान अमेरिकी शेयर बाजार में करीब 36 फीसदी की तेज गिरावट आई थी।

कपलान के मुताबिक, उस समय बाजार की गिरावट बेहद बड़ी और डरावनी दिखाई दे रही थी। लेकिन लंबी अवधि के चार्ट पर पीछे मुड़कर देखने पर उस गिरावट का प्रभाव काफी छोटा नजर आता है। इसी उदाहरण के जरिए वह यह संकेत देते हैं कि किसी बड़े तेजी वाले बाजार के बीच आने वाली तेज गिरावट को केवल बाजार खत्म होने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

तेज गिरावट को खरीदारी का मौका मानते हैं कपलान

थॉमस कपलान पहले भी कह चुके हैं कि सोने और चांदी में यदि तेज गिरावट आती है तो उसे केवल कमजोरी के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, बड़ी गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का अवसर भी बन सकती है।

उन्होंने 1987 की बाजार गिरावट का उदाहरण देते हुए कहा है कि उस समय की भारी गिरावट पूरे तेजी वाले दौर में बेहतरीन खरीदारी के अवसरों में से एक साबित हुई थी। इसी तरह उनका मानना है कि सोने और चांदी में भी लंबी अवधि में मौजूदा स्तरों से कई गुना ऊपर जाने की संभावना बनी रह सकती है।

सोने की कीमत किन चीजों पर निर्भर करेगी?

भविष्य में सोने की वास्तविक कीमत कई आर्थिक और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। इसमें वैश्विक स्तर पर सोने की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, ब्याज दरों में बदलाव, महंगाई की स्थिति, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी डॉलर की चाल जैसे कई प्रमुख कारक शामिल हैं।

इसके अलावा भारतीय बाजार में सोने का भाव तय होने पर रुपये और डॉलर के बीच विनिमय दर का भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत बढ़ने या घटने का असर भारतीय बाजार में उसी अनुपात में हो, यह जरूरी नहीं है।

₹15 लाख का मतलब अभी सोना खरीदना तय मुनाफा नहीं

सोने के 10 ग्राम का भाव 15 लाख रुपये तक पहुंचने की चर्चा आकर्षक जरूर है, लेकिन इसे निश्चित भविष्यवाणी या तय मुनाफे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 50,000 डॉलर प्रति औंस का अनुमान एक लंबी अवधि की संभावित स्थिति है और इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है।

इसी तरह 15 लाख रुपये का भारतीय मूल्यांकन 95 रुपये प्रति डॉलर की विनिमय दर मानकर निकाला गया है। भविष्य में डॉलर-रुपये की दर अलग होने पर भारतीय बाजार में सोने की संभावित कीमत भी अलग हो सकती है।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?

सोने को लेकर थॉमस कपलान का अनुमान बाजार में लंबी अवधि की संभावनाओं को लेकर उत्सुकता जरूर बढ़ाता है। लेकिन मौजूदा करेक्शन और भविष्य की संभावित तेजी के बीच निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि सोने की कीमत में बड़े उतार-चढ़ाव हो सकते हैं।

इसलिए 50,000 डॉलर प्रति औंस और भारतीय बाजार में करीब 15 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा फिलहाल एक संभावित दीर्घकालिक परिदृश्य है, न कि निकट भविष्य का निश्चित मूल्य लक्ष्य।