नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों तथा कारोबार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में कटौती की संभावना पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, ऊंची कस्टम ड्यूटी के कारण सोने की तस्करी और अनौपचारिक रास्तों से होने वाले कारोबार को बढ़ावा मिलने की आशंका के बीच सरकार यह आकलन कर रही है कि शुल्क घटाने से स्थिति में कितना बदलाव आ सकता है।
सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल क्या है?
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में तीन सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार यह जांच रही है कि आयात शुल्क कम करने से सोने की तस्करी को हतोत्साहित किया जा सकता है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कम शुल्क से कारोबारी और आयातक आधिकारिक तथा कानूनी माध्यमों से अधिक सोना देश में ला सकते हैं या नहीं। हालांकि, सरकार के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि आयात शुल्क घटाने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
15% से सीधे 6% ड्यूटी करने की मांग
सूत्रों के मुताबिक, सोने-चांदी के कारोबारी, ज्वैलर्स और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि मौजूदा 15 प्रतिशत आयात शुल्क को घटाकर 6 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि शुल्क की ऊंची दर कानूनी आयात और अनौपचारिक माध्यमों से आने वाले सोने के बीच कीमत का अंतर बढ़ाती है। इस अंतर के कारण तस्करी करने वालों के लिए अधिक मुनाफे की गुंजाइश बन सकती है।
13 मई 2026 को बढ़ाई गई थी ड्यूटी
सोने के आयात को नियंत्रित करने और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के उद्देश्य से 13 मई 2026 को आयात शुल्क बढ़ाया गया था। उस समय सोने के आयात में तेज वृद्धि सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। अब शुल्क बढ़ने के बाद तस्करी और समानांतर अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखते हुए संभावित कटौती पर विचार किया जा रहा है।
कम ड्यूटी से तस्करी पर कैसे लग सकती है लगाम?
उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि कानूनी रूप से आयात किए गए सोने और अनौपचारिक माध्यम से देश में लाए गए सोने की कीमत का अंतर कम होता है, तो तस्करी का आर्थिक आकर्षण भी घट सकता है। ऊंची ड्यूटी के कारण गैरकानूनी तरीके से सोना लाने वालों को अधिक मुनाफे की संभावना मिलती है। वहीं, आधिकारिक आयात में शुल्क का भुगतान करना पड़ता है, जिससे दोनों रास्तों के बीच कीमत का अंतर पैदा होता है।
ड्यूटी कम होने की स्थिति में सरकार को उम्मीद हो सकती है कि अधिक कारोबारी आधिकारिक आयात का रास्ता अपनाएं। इससे आयातित सोने पर कस्टम ड्यूटी के माध्यम से सरकारी राजस्व हासिल करने की संभावना भी बनी रहेगी। हालांकि, शुल्क में किसी भी बदलाव का वास्तविक असर सरकार के निर्णय और उसके लागू होने के बाद के बाजार व्यवहार पर निर्भर करेगा।
भारत हर साल करीब 700-800 टन सोना करता है आयात
भारत दुनिया के बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, देश हर साल करीब 700-800 टन सोने का आयात करता है। भारत यूएई, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे देशों को सोने के आभूषणों का निर्यात भी करता है। ऐसे में आयात शुल्क में बदलाव का असर केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आयात, कारोबार और निर्यात से जुड़े पूरे तंत्र पर पड़ सकता है।
अप्रैल में सोने का आयात 82% बढ़ा था
ड्यूटी बढ़ाए जाने से पहले अप्रैल 2026 में भारत का सोना आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 82 प्रतिशत बढ़ गया था। आयात में इस तेज उछाल ने सरकार की चिंता बढ़ाई थी, क्योंकि सोने के बड़े पैमाने पर आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ सकता है। इसके साथ ही चालू खाता घाटा बढ़ने और रुपये पर दबाव पड़ने की आशंका भी रहती है।
मई के मध्य तक रुपया साल-दर-साल आधार पर पहले ही 6 प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका था। रिपोर्ट के मुताबिक, सोने पर आयात शुल्क बढ़ाना रुपये पर दबाव के पीछे कई कारणों में से एक था।
ड्यूटी बढ़ी तो भी आयात में तेजी क्यों दिखी?
मई 2026 में सोने का आयात करीब 34 प्रतिशत बढ़ा। खास बात यह रही कि उस महीने बढ़ी हुई ड्यूटी केवल आधे महीने के लिए लागू थी। इसके बाद ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद आने वाले पहले दो पूरे महीनों जून और जुलाई में सोने का आयात 5.5 प्रतिशत बढ़कर 6.13 अरब डॉलर हो गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 5.81 अरब डॉलर था।
इस आंकड़े ने यह सवाल भी खड़ा किया कि आयात शुल्क बढ़ाने के बावजूद सोने की मांग और आयात पर अपेक्षित असर कितना पड़ा। इसी पृष्ठभूमि में अब सरकार शुल्क में संभावित बदलाव के प्रभावों का आकलन कर रही है।
इंडस्ट्री ने कहा, तस्करी में आया काफी उछाल
उद्योग से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, कीमती धातुओं पर ड्यूटी बढ़ने के बाद तस्करी में काफी वृद्धि हुई। सूत्र ने कहा कि सरकार डॉलर बचाना चाहती है, लेकिन समानांतर अर्थव्यवस्था के माध्यम से बड़ी मात्रा में डॉलर बाहर जा रहे थे। उनके मुताबिक, टैक्स में बदलाव से मुख्य रूप से यह प्रभावित हुआ कि कानूनी माध्यम से कितना सोना आयात किया गया।
यह तर्क सरकार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि ऊंची ड्यूटी के कारण कानूनी आयात घटता है और तस्करी बढ़ती है, तो सरकार को कस्टम ड्यूटी का राजस्व भी नहीं मिलता। ऐसे में शुल्क की दर और तस्करी के बीच संतुलन बनाना नीति निर्धारकों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
सिर्फ सोना नहीं, चांदी और प्लेटिनम पर भी नजर
सरकार के विचार का दायरा केवल सोने तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। माना जा रहा है कि चांदी और प्लेटिनम के आयात शुल्क को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, उद्योग से जुड़े एक अन्य सूत्र ने स्पष्ट किया है कि संभावित बदलाव का स्वरूप, समय और दायरा अभी तय नहीं हुआ है।
इसका मतलब है कि फिलहाल किसी निश्चित कटौती या लागू होने की तारीख को लेकर आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए मौजूदा स्थिति में 6 प्रतिशत शुल्क की मांग को उद्योग की मांग के तौर पर देखा जा रहा है, न कि सरकार के अंतिम निर्णय के रूप में।
चांदी और प्लेटिनम का औद्योगिक इस्तेमाल भी बड़ा कारण
सोने की तरह चांदी और प्लेटिनम को भी निवेश के लिए सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखा जाता है। लेकिन इन दोनों धातुओं का इस्तेमाल विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर होता है। चांदी सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में महत्वपूर्ण घटक के रूप में इस्तेमाल होती है।
वहीं, प्लेटिनम का उपयोग वाहन उद्योग और स्वास्थ्य क्षेत्र में किया जाता है। ऐसे में इन धातुओं पर अधिक आयात शुल्क का असर केवल निवेश या आभूषण बाजार पर नहीं पड़ता, बल्कि उन उद्योगों की लागत पर भी पड़ सकता है जो इन्हें उत्पादन में इस्तेमाल करते हैं।
सरकार के सामने राजस्व और उद्योग लागत के बीच संतुलन
कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने का एक उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत और आयात को नियंत्रित करना है। दूसरी ओर, बहुत अधिक शुल्क से कानूनी आयात और अनौपचारिक कारोबार के बीच कीमत का अंतर बढ़ सकता है। यही अंतर तस्करी को बढ़ावा देने की वजह बन सकता है। अब सरकार इसी संतुलन को ध्यान में रखकर संभावित शुल्क कटौती का आकलन कर रही है।
अभी अंतिम फैसला नहीं, बाजार की नजर सरकार पर
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से सोने-चांदी के आयात शुल्क में कटौती को लेकर कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है। उद्योग की ओर से 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत करने की मांग जरूर सामने आई है और सरकार के स्तर पर इसके संभावित प्रभावों का अध्ययन किए जाने की बात कही गई है। इसलिए आने वाले समय में इस मुद्दे पर होने वाला कोई भी आधिकारिक निर्णय सोने-चांदी के आयात, तस्करी, सरकारी राजस्व और संबंधित उद्योगों की लागत पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।
