erere | Source: rereनई दिल्ली। सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का असर सरकारी खजाने पर साफ दिखाई दिया है। 13 मई से 2 अगस्त के बीच इन तीनों कीमती धातुओं के आयात से सरकार ने कुल 10,463 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी वसूली है। इस अवधि में सबसे ज्यादा कमाई सोने के आयात से हुई, जिससे सरकार को अकेले 10,040 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में यह जानकारी दी।

तीन महीने से भी कम समय में 10 हजार करोड़ से ज्यादा की वसूली

सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 13 मई से 2 अगस्त के बीच सोना, चांदी और प्लैटिनम पर बढ़ी हुई कस्टम ड्यूटी से कुल 10,463 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई। इसमें सोने की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही।

सोने के आयात से सरकार को 10,040 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी मिली। वहीं चांदी से 328 करोड़ रुपये और प्लैटिनम से 95 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इस तरह तीनों धातुओं से सरकार की कुल कस्टम ड्यूटी वसूली 10,463 करोड़ रुपये रही।

सोने से आई कुल कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा

आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकार की कुल वसूली में सोने का योगदान सबसे ज्यादा रहा। 10,463 करोड़ रुपये की कुल कस्टम ड्यूटी में अकेले सोने से 10,040 करोड़ रुपये मिले। इसके मुकाबले चांदी और प्लैटिनम से हुई कमाई काफी कम रही।

सोने से इतनी बड़ी राशि मिलने की एक प्रमुख वजह भारत में सोने की लगातार बनी रहने वाली मांग है। देश में आभूषणों की मांग काफी अधिक है और इसी कारण भारत बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है।

13 मई से बढ़ाई गई थी कस्टम ड्यूटी

सरकार ने 13 मई से सोने और चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। वहीं प्लैटिनम पर कस्टम ड्यूटी 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत की गई थी।

कस्टम ड्यूटी में यह बदलाव केवल सोना, चांदी और प्लैटिनम तक सीमित नहीं था। इनसे संबंधित कुछ अन्य उत्पादों, जिनमें गोल्ड और सिल्वर डोरे, सिक्के तथा फाइंडिंग्स शामिल हैं, पर भी शुल्क व्यवस्था में बदलाव किया गया था।

आखिर सरकार ने क्यों बढ़ाई थी आयात ड्यूटी?

सोना और अन्य कीमती धातुओं पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के पीछे सरकार का एक प्रमुख उद्देश्य गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करना बताया गया। सरकार आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए विदेशी मुद्रा को सुरक्षित रखना चाहती है।

कच्चा तेल, उर्वरक, औद्योगिक कच्चा माल और पूंजीगत सामान जैसे जरूरी आयात के लिए विदेशी मुद्रा की आवश्यकता होती है। ऐसे में गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करके विदेशी मुद्रा के दबाव को कम करने की कोशिश की गई।

पश्चिम एशिया के तनाव का भी पड़ा असर

इस अवधि में पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े रणनीतिक संकट का भी असर आयात लागत पर पड़ा। कच्चे तेल और खाद्य पदार्थों के आयात की लागत बढ़ने से विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ा। ऐसे माहौल में सरकार की ओर से आयात नीति में बदलाव को विदेशी मुद्रा प्रबंधन के नजरिए से भी देखा गया।

कीमती धातुओं के आयात पर अधिक शुल्क लगाने से इनके आयात को नियंत्रित करने और देश से विदेशी मुद्रा के बहिर्गमन को कम करने की कोशिश की गई।

सोने की तस्करी पर भी सरकार की सख्ती

सरकार ने कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के साथ सोने की तस्करी के खिलाफ भी कार्रवाई तेज की है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि 13 मई से 30 जून के बीच अधिकारियों ने 161 किलोग्राम तस्करी का सोना जब्त किया।

इसी अवधि में सोने की तस्करी के मामलों में 116 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। सरकार की कार्रवाई से संकेत मिलता है कि आयात शुल्क व्यवस्था के साथ-साथ अवैध तरीके से देश में लाए जा रहे सोने पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।

भारत में सोने की मांग क्यों है इतनी बड़ी?

भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। यहां सोने की मांग में आभूषणों की बड़ी भूमिका है। शादी-ब्याह, त्योहारों और पारंपरिक उपयोग के कारण भारतीय बाजार में सोने की मांग लंबे समय से महत्वपूर्ण बनी हुई है।

सोने की इस बड़ी मांग को पूरा करने के लिए भारत को बड़ी मात्रा में सोना आयात करना पड़ता है। इससे विदेशी मुद्रा का एक बड़ा हिस्सा सोने के आयात पर खर्च होता है। इसी वजह से सोने के आयात को नियंत्रित करना सरकार की आर्थिक नीति में महत्वपूर्ण विषय बना रहता है।

सरकार के लिए बढ़ी ड्यूटी से दोहरा फायदा

कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से सरकार को एक तरफ आयात पर अधिक राजस्व प्राप्त हुआ, वहीं दूसरी तरफ इसका उद्देश्य गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करना भी रहा। 13 मई से 2 अगस्त के बीच 10,463 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी वसूली इस व्यवस्था से सरकार को हुई बड़ी राजस्व प्राप्ति को दर्शाती है।

हालांकि उपलब्ध आंकड़ों में सोने से प्राप्त 10,040 करोड़ रुपये की राशि सबसे महत्वपूर्ण है। चांदी और प्लैटिनम से क्रमशः 328 करोड़ रुपये और 95 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी प्राप्त हुई।

सोने की तस्करी रोकना भी बड़ी चुनौती

भारत में सोने की भारी मांग के कारण इसकी तस्करी पर नियंत्रण भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। वित्त राज्य मंत्री की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 13 मई से 30 जून के बीच 161 किलोग्राम तस्करी का सोना जब्त किया गया और 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

सरकार की ओर से की गई यह कार्रवाई आयात शुल्क व्यवस्था के साथ अवैध सोने के कारोबार पर निगरानी की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।