पटना। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद आपत्तिजनक और हिंसक बयान दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR तथा मतदाता सूची को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच सहनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि संविधान एक हत्या की अनुमति देता और उन्हें एक हत्या माफ होती, तो वह ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते। यह बयान सहनी की ओर से दिया गया है और इसमें उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
‘जनता के साथ अपमान हो रहा है’, सहनी ने क्या कहा?
मुकेश सहनी ने कहा कि जिस तरह से देश की जनता के साथ कथित तौर पर अपमान हो रहा है और जिस तरह जनता के मत तथा जनादेश को प्रभावित किए जाने की बात सामने आ रही है, उसमें जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भाजपा के लिए काम करने और कथित तौर पर फर्जी तरीके से सरकार बनाने में मदद करने का आरोप लगाया।
इसी संदर्भ में सहनी ने कहा कि यदि उन्हें एक हत्या माफ हो और देश का संविधान इसकी अनुमति देता हो, तो वह ज्ञानेश कुमार को गोली मार देंगे। उन्होंने अपने बयान में देश की आजादी के लिए शहीद हुए लोगों और भगत सिंह का भी उल्लेख किया। सहनी ने कहा कि देश किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को सर्वोच्च माना गया है।
चुनाव कराने को लेकर भी उठाए सवाल
VIP प्रमुख ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव इसी तरह जीतने हैं, जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करना है, सेना को चुनाव में उतारना है या मतदाताओं के नाम काटकर चुनाव कराना है, तो चुनाव नहीं कराया जाना चाहिए। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की।
सहनी ने यह भी दावा किया कि बिहार में चुनाव के दौरान आचार संहिता के बावजूद पैसे बांटे गए और पश्चिम बंगाल में सेना की तैनाती तथा लाखों मतदाताओं के नाम काटे जाने के कारण चुनाव जीता गया। ये आरोप मुकेश सहनी की ओर से लगाए गए हैं।
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग तेज
इसी बीच भारतीय युवा कांग्रेस ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन नागरिक याचिका अभियान शुरू किया है। संगठन ने मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर युवाओं तथा आम नागरिकों से अभियान में शामिल होने की अपील की है।
युवा कांग्रेस ने अपनी मांगों में ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने, उनके खिलाफ गिरफ्तारी और अभियोजन की कार्रवाई, मतदाता सूची सहित पूरी ‘वोट चेन’ और चुनावी प्रक्रिया की व्यापक जांच तथा कथित भाजपा संबंधों की जांच की मांग की है।
चुनावी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की भी मांग
भारतीय युवा कांग्रेस ने चुनाव से संबंधित रिकॉर्ड और चुनाव आयोग के भीतर दर्ज की गई कथित आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग भी रखी है। संगठन का कहना है कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियादी व्यवस्था का हिस्सा है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने की स्थिति में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा है कि इस अभियान को कॉलेजों, परिसरों और समुदायों तक पहुंचाकर व्यापक नागरिक अभियान का रूप दिया जाएगा।
SIR को लेकर पहले से जारी है राजनीतिक विवाद
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद उस समय और तेज हुआ जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया से जुड़े मामलों में दो चुनाव आयुक्तों की कथित असहमति को लेकर मीडिया रिपोर्ट सामने आईं। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना हमला तेज कर दिया।
विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने और SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी उठाई है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस चल रही है।
राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने भी उठाए सवाल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी ने कथित चुनावी गड़बड़ियों को देशद्रोह का कृत्य बताया था। हालांकि, यह राहुल गांधी की राजनीतिक टिप्पणी है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि मुद्दा केवल मतदान में कथित धांधली तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं से जुड़ा हुआ है। खरगे ने प्रधानमंत्री से जवाब मांगने की बात कही थी।
आरोपों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका पर बहस
SIR और मतदाता सूची से जुड़े विवाद के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। विपक्षी दल जहां प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग की ओर से निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विषयों पर उसका आधिकारिक पक्ष अलग महत्व रखता है।
ऐसे में राजनीतिक नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों और आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच अंतर को समझना जरूरी है। किसी नेता द्वारा लगाया गया आरोप अपने आप में तथ्य की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता।
मुकेश सहनी के बयान से विवाद और गहराया
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मुकेश सहनी का गोली मारने वाला बयान इस पूरे विवाद को और तीखा बना रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक असहमति तथा आलोचना सार्वजनिक रूप से सामने आ सकती है, लेकिन किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ हिंसा की बात गंभीर प्रकृति का बयान है।
SIR, मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता को लेकर विपक्षी दलों के आरोपों के बीच अब सहनी के बयान ने राजनीतिक बहस का दायरा और बढ़ा दिया है। आने वाले समय में इस बयान और चुनाव आयोग से जुड़ी विपक्ष की मांगों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
