पटना। बिहार में खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायतों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक परिवार और व्यक्ति को शुद्ध एवं सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा विभाग को मिलावट की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने त्योहारों के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे साल खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी रखने की तैयारी की है।
दीपावली के आसपास बाजारों में नकली मावा, मिलावटी मिठाइयों और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक खाद्य सामग्री की बिक्री की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बिहार की राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में दुकानों की जांच और छापेमारी तेज कर दी है। इसी क्रम में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने खाद्य पदार्थों में मिलावट से जुड़ी कुछ गंभीर शिकायतों का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि मिलावटखोरी के खिलाफ विभाग पूरी गंभीरता से काम कर रहा है और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दूध में फॉर्मेलिन मिलाने की शिकायत से बढ़ी चिंता
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बताया कि कुछ दिनों पहले उनके संज्ञान में ऐसी शिकायतें आई थीं, जिनमें गायों को अधिक दूध देने के लिए ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाए जाने की बात कही गई थी। इसके अलावा दूध दुहने के बाद उसकी शेल्फ लाइफ यानी उपयोग करने की अवधि बढ़ाने के लिए उसमें फॉर्मेलिन मिलाए जाने की शिकायतें भी सामने आईं। मंत्री के अनुसार, दूध में डिटर्जेंट और स्टार्च की मिलावट किए जाने की सूचनाएं भी मिली हैं।
उन्होंने फलों को जल्दी पकाने के लिए कार्बाइड, कैल्शियम कार्बाइड और इथीफोन जैसे पदार्थों के अनुचित इस्तेमाल की शिकायतों को भी गंभीर बताया। इन रसायनों और पदार्थों के गलत इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य विभाग चिंतित है। मंत्री ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हैं। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर दिए निर्देश
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निशांत कुमार ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मिलावटखोरी पर रोक लगाने के लिए व्यापक अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि शिकायत मिलने पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए।
स्वास्थ्य मंत्री का जोर इस बात पर है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की नियमित जांच के माध्यम से उनका पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए खाद्य प्रतिष्ठानों, मिठाई की दुकानों, होटलों और रेस्टोरेंट की निगरानी की जा रही है।
तीन महीने में 38 जिलों के 530 से अधिक प्रतिष्ठानों की जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पिछले तीन महीनों में बिहार के सभी 38 जिलों में कार्रवाई की गई है। इस अवधि में 530 से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई। विभागीय टीमों ने होटलों, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य कारोबारियों के यहां निरीक्षण तथा छापेमारी की।
जांच के दौरान कई स्थानों पर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। ऐसे मामलों में संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। विभाग ने कई जगहों से खाद्य सामग्री जब्त की और संबंधित कारोबारियों को नोटिस जारी कर चेतावनी भी दी। खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर विभाग की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल त्योहारों के दौरान मिलावट पर नियंत्रण करना नहीं है, बल्कि आम दिनों में भी बाजार में उपलब्ध खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। विभाग की कार्रवाई से खाद्य कारोबारियों को यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि नियमों की अनदेखी करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
साल के 365 दिन जारी रहेगा मिलावट के खिलाफ अभियान
निशांत कुमार ने साफ किया है कि मिलावटखोरी के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान केवल दीपावली या अन्य त्योहारों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान साल के 365 दिन जारी रहेगा। खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने और खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री के इस निर्देश के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। अधिकारियों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखने और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया है। विभाग का प्रयास है कि उपभोक्ताओं को बाजार से सुरक्षित खाद्य सामग्री मिल सके और मिलावट के कारण उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
खाद्य सामग्री खरीदते समय उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की सलाह
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने प्रदेशवासियों से खाद्य सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को किसी भी खाद्य पदार्थ को खरीदने से पहले उसकी पैकेजिंग, निर्माण तिथि और समाप्ति तिथि अवश्य जांचनी चाहिए। यदि किसी सामग्री की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो या किसी प्रकार की गड़बड़ी दिखाई दे, तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को देनी चाहिए।
उन्होंने खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और वितरण से जुड़े कारोबारियों से भी निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराएं। जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पटना के प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों पर भी हुई कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई हाल के दिनों में पटना के कई प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों तक पहुंची है। इन प्रतिष्ठानों पर की गई छापेमारी के दौरान गलत और अनुपयोगी खाद्य सामग्री जब्त की गई। कुछ स्थानों पर ऐसी सामग्री भी मिली, जिसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों के रूप में नहीं किया जा सकता था। विभागीय अधिकारियों ने ऐसी सामग्री को अपनी निगरानी में नष्ट कराया।
इस तरह की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा विभाग केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य कारोबार से जुड़े विभिन्न प्रतिष्ठानों की जांच कर रहा है। विभाग की ओर से जारी अभियान में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, उसके भंडारण और निर्धारित मानकों के पालन पर ध्यान दिया जा रहा है।
मिलावट के खिलाफ लगातार निगरानी पर जोर
बिहार में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निर्देशों के बाद विभाग ने जांच और कार्रवाई का दायरा बढ़ाया है। दूध में फॉर्मेलिन, डिटर्जेंट और स्टार्च की मिलावट से लेकर फलों को जल्दी पकाने में रसायनों के अनुचित इस्तेमाल तक की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। तीन महीनों में सभी 38 जिलों के 530 से अधिक प्रतिष्ठानों की जांच और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि लोगों को शुद्ध और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है और मिलावटखोरी के खिलाफ कार्रवाई पूरे वर्ष जारी रहेगी।
