ere | Source: rerमुंबई। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को अचानक जोरदार बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान दबाव इतना बढ़ा कि सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत टूटकर 73,580.54 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी भी 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,063.10 पर पहुंच गया। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

फार्मा क्षेत्र को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टोरल सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बैंकिंग और वित्तीय सेवा कंपनियों के शेयरों में विशेष रूप से तेज बिकवाली देखने को मिली। बाजार में दबाव बढ़ने के पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और रुपये में कमजोरी जैसे कई कारण बताए गए।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने बढ़ाई चिंता

बाजार की गिरावट के प्रमुख कारणों में अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में तेज बढ़ोतरी रही। रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी यील्ड 13.89 बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.106 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह स्तर वर्ष 2007 के बाद सबसे ऊंचा बताया गया है।

बॉन्ड यील्ड में इस तरह की बढ़ोतरी का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी पड़ सकता है। जब बॉन्ड से मिलने वाला संभावित रिटर्न आकर्षक होता है, तो निवेशकों के लिए इक्विटी की तुलना में डेट इंस्ट्रूमेंट का आकर्षण बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में शेयर बाजारों पर दबाव देखने को मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमत 102 डॉलर के पार

भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय रहती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा।

हालांकि दिन के दौरान कच्चे तेल की कीमत में मामूली नरमी दिखाई दी, लेकिन पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड करीब 4 प्रतिशत तक उछल चुका था। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर मतभेद बने रहने से तेल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

महंगे कच्चे तेल का असर भारत के आयात बिल, रुपये की विनिमय दर और महंगाई से जुड़ी चिंताओं पर पड़ सकता है। यही वजह है कि तेल की ऊंची कीमतों को भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण दबाव वाले कारकों में गिना जा रहा है।

फेड की ब्याज दरों पर नजर, बाजार में बढ़ी बेचैनी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भी बाजार की नजर बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, फेड फंड्स फ्यूचर्स में कारोबार करने वाले ट्रेडर्स अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की 66 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं।

अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया तेजी के कारण महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। यदि महंगाई पर नियंत्रण के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, तो वैश्विक वित्तीय बाजारों पर इसका असर पड़ सकता है।

ब्याज दरों को लेकर ऐसी आशंकाओं के बीच निवेशकों ने जोखिम वाली परिसंपत्तियों में सतर्कता बढ़ाई, जिसका असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी दिखाई दिया।

बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव

गुरुवार की गिरावट में बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा क्षेत्र के शेयर प्रमुख दबाव में रहे। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को और गहरा किया।

बीमा क्षेत्र में भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीएआई की ओर से कमीशन नियमों में बदलाव के प्रस्ताव को लेकर भी बाजार में चर्चा रही। प्रस्ताव में कमीशन भुगतान पर सीमा लगाने, कमीशन को उत्पाद की जटिलता से जोड़ने और जीवन बीमा कंपनियों के कमीशन भुगतान को पॉलिसी के पहले साल से आगे तक फैलाने जैसे बदलाव शामिल बताए गए हैं।

इन बड़े शेयरों में भी आई तेज गिरावट

बाजार में बिकवाली का असर कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। एचडीएफसी लाइफ, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व निफ्टी 50 के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे।

रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती कारोबार के दौरान इनमें कुछ शेयरों में 8.5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में आई इस बिकवाली ने बाजार के व्यापक रुख को कमजोर करने में भूमिका निभाई।

रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाया दबाव

शेयर बाजार में गिरावट के साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे कमजोर होकर 95.87 के स्तर पर पहुंच गया।

कच्चे तेल की ऊंची कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच रुपये पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा भारतीय बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली से भी बाजार की धारणा सतर्क बनी हुई है।

एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट एवं वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, रुपया 95.60 से 95.95 के दायरे में बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी-ईरान घटनाक्रम, शी चिनफिंग की अमेरिका यात्रा और संयुक्त राष्ट्र की बैठक से जुड़े अपडेट आगे मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं।

कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर टिकी बाजार की नजर

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार की गिरावट किसी एक वजह तक सीमित नहीं रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, कच्चे तेल की ऊंची कीमत, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर आशंका, रुपये की कमजोरी और घरेलू वित्तीय शेयरों में बिकवाली ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ाया।

सेंसेक्स के 1,247 अंक से ज्यादा टूटने और निफ्टी के 23,063.10 पर बंद होने से कारोबारी सत्र में निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी। आने वाले सत्रों में वैश्विक बाजारों के संकेत, कच्चे तेल की दिशा, अमेरिकी मौद्रिक नीति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की चाल के लिए महत्वपूर्ण कारक रह सकती हैं।