ere | Source: ereनई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में ऐसी गिरावट देखने को मिली है, जिसने निवेशकों से लेकर आम खरीदारों तक को चौंका दिया है। मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं के भाव में भारी टूट दर्ज की गई। एक तरफ चांदी की कीमत एक ही दिन में 8,528 रुपये प्रति किलोग्राम गिर गई, तो दूसरी तरफ सोना भी करीब 2,079 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चांदी अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर से करीब 2.44 लाख रुपये प्रति किलोग्राम नीचे आ चुकी है। वहीं, सोने की कीमत भी अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग 55,128 रुपये प्रति 10 ग्राम गिर चुकी है। लगातार बदलते वैश्विक हालात, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर आशंकाएं और अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेत इस गिरावट के पीछे प्रमुख वजह माने जा रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि क्या कीमतों में गिरावट का दौर अभी जारी रहेगा या मौजूदा स्तर से बाजार में फिर तेजी लौट सकती है?

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एक दिन में चांदी 8,528 रुपये और सोना 2,079 रुपये टूटा

मंगलवार को MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी में तेज बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 8,528 रुपये प्रति किलोग्राम गिरकर 1,75,251 रुपये पर पहुंच गई। यह नवंबर 2025 के आखिर के बाद चांदी का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है। सोमवार को बाजार में मामूली सुधार देखने को मिला था, लेकिन मंगलवार को एक बार फिर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

सोने की कीमतों में भी कमजोरी का सिलसिला जारी रहा। मंगलवार को सोना करीब 2,079 रुपये प्रति 10 ग्राम टूटकर 1,37,863 रुपये पर पहुंच गया। दोनों कीमती धातुओं में एक साथ आई इस गिरावट ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। निवेशक अब आगे के कारोबार और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।

रिकॉर्ड भाव से चांदी 2.44 लाख और सोना 55 हजार रुपये से ज्यादा सस्ता

सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट का अंदाजा इनके पुराने रिकॉर्ड भाव से लगाया जा सकता है। चांदी का अब तक का सर्वोच्च स्तर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम रहा है। मंगलवार को इसकी कीमत घटकर 1,75,251 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। इस तरह चांदी अपने ऐतिहासिक उच्चतम भाव से करीब 2,44,797 रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।

इसी तरह सोने का रिकॉर्ड भाव 1,92,991 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा था। मंगलवार को सोना 1,37,863 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। इस हिसाब से सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 55,128 रुपये प्रति 10 ग्राम नीचे आ चुका है। इतनी बड़ी गिरावट के बाद अब बाजार में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या कीमती धातुओं की कीमतें अपने निचले स्तर के करीब पहुंच चुकी हैं या अभी और गिरावट बाकी है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी क्यों हो रहे सस्ते?

कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते घटनाक्रमों को अहम माना जा रहा है। इनमें अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी शामिल है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप पर हमला किया है। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई और क्रूड ऑयल करीब एक प्रतिशत उछल गया।

मध्य पूर्व दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ने की आशंका रहती है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो पेट्रोल-डीजल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका पैदा होती है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रखने या उनमें बढ़ोतरी करने का फैसला ले सकते हैं। इसका असर सोने और चांदी की मांग पर पड़ सकता है।

अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ीं तो सोने-चांदी पर और बढ़ सकता है दबाव

सोने और चांदी से निवेशकों को बैंक जमा या सरकारी बॉन्ड की तरह नियमित ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में जब बैंक जमा और सरकारी बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद बढ़ती है, तो निवेशक कीमती धातुओं से पैसा निकालकर दूसरे विकल्पों में निवेश करना पसंद कर सकते हैं। इससे सोने और चांदी की मांग प्रभावित होती है और कीमतों में गिरावट का दबाव बढ़ सकता है।

फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है। सीएमई फेडवॉच के आंकड़ों के मुताबिक, कारोबारियों को दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की करीब 75 प्रतिशत संभावना दिखाई दे रही है। यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है या उन्हें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखता है, तो सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी जारी रह सकती है। यही वजह है कि निवेशक फेडरल रिजर्व के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

अमेरिका के चुनाव और रोजगार के आंकड़ों से भी बदल सकती है बाजार की चाल

सोने और चांदी के बाजार में निवेश करने वाले लोगों की नजर अमेरिका के मध्यावधि चुनावों पर भी टिकी हुई है। इन चुनावों से यह तय होगा कि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में किस राजनीतिक दल का नियंत्रण रहेगा। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच मुकाबले के कारण पैदा होने वाली अनिश्चितता का असर वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

इसके अलावा अमेरिका के नए रोजगार आंकड़े भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ये आंकड़े इसी सप्ताह जारी होने वाले हैं। इनके आधार पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रोजगार की स्थिति का आकलन किया जाएगा। यदि रोजगार बाजार मजबूत रहता है और महंगाई का दबाव भी बना रहता है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकता है। इसका असर आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।

क्या चांदी अब 1.70 लाख रुपये तक पहुंच जाएगी? विशेषज्ञ ने बताए अहम स्तर

बाजार विशेषज्ञ Ponmudi R के अनुसार, फिलहाल चांदी का तकनीकी चार्ट कमजोर दिखाई दे रहा है। सोमवार को कीमतों में तेजी आने के बावजूद चांदी 1,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर टिकने में सफल नहीं रही। इससे संकेत मिलता है कि ऊंचे स्तर पर अभी भी बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

विशेषज्ञ के मुताबिक, चांदी के लिए 1,72,000 से 1,70,000 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि कीमतों में गिरावट जारी रहती है, तो बाजार की नजर इसी दायरे पर रहेगी। वहीं, तेजी आने की स्थिति में 1,86,000 से 1,88,000 रुपये का स्तर पहला रेजिस्टेंस माना गया है। इसके ऊपर 1,94,000 से 1,96,000 रुपये प्रति किलोग्राम का दायरा अगली बड़ी चुनौती बन सकता है।

तकनीकी संकेतकों में चांदी का आरएसआई करीब 23 पर बताया गया है। यह ओवरसोल्ड स्थिति का संकेत है। इसका मतलब है कि बाजार में काफी बिकवाली हो चुकी है। हालांकि, ओवरसोल्ड स्थिति का यह अर्थ नहीं है कि कीमतों में तुरंत तेजी आना तय है। विशेषज्ञ के अनुसार, एमएसीडी भी फिलहाल कमजोरी का संकेत दे रहा है।

सोने के लिए 1.34 लाख रुपये का स्तर बन सकता है सबसे अहम

चांदी के साथ सोने की कीमतों में भी फिलहाल कमजोरी दिखाई दे रही है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1,34,000 से 1,35,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। यदि कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है, तो यह स्तर बाजार के लिए काफी अहम हो सकता है।

वहीं, सोने में तेजी लौटने पर 1,40,000 से 1,41,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर पहला रेजिस्टेंस रहेगा। इसके बाद 1,43,000 से 1,43,700 रुपये का दायरा अगला महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

तकनीकी संकेतकों के अनुसार, सोने का आरएसआई करीब 32 पर है। यह बाजार में कमजोरी की स्थिति दर्शाता है। इसके अलावा एमएसीडी भी बिकवाली के दबाव की ओर संकेत कर रहा है। ऐसे में फिलहाल सोने में मजबूत तेजी की पुष्टि नहीं हुई है।

इतनी बड़ी गिरावट के बाद क्या अभी चांदी खरीदना सही रहेगा?

चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड स्तर से आई भारी गिरावट के बाद आम खरीदारों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अब खरीदारी का सही मौका आ गया है। हालांकि, बाजार में कीमतों का गिरना और निवेश के लिए सही समय होना दो अलग-अलग बातें हैं। केवल इस आधार पर खरीदारी करना उचित नहीं होगा कि चांदी अपने रिकॉर्ड भाव से काफी नीचे आ चुकी है।

यदि चांदी 1,70,000 से 1,72,000 रुपये प्रति किलोग्राम के सपोर्ट जोन में टिकती है और वहां से सुधार के संकेत देती है, तो बाजार में राहत देखने को मिल सकती है। लेकिन यदि यह स्तर टूट जाता है, तो कीमतों में और गिरावट का दबाव बन सकता है।

लंबी अवधि के निवेशक एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। वहीं, कम समय के लिए कारोबार करने वालों को बाजार में तेजी के स्पष्ट संकेत मिलने का इंतजार करना चाहिए। निवेश से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

आने वाले दिनों में सोना-चांदी सस्ता होगा या फिर लौटेगी तेजी?

फिलहाल सोने और चांदी के तकनीकी संकेतक बाजार में कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आशंका और अमेरिका के रोजगार आंकड़े आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

चांदी का आरएसआई ओवरसोल्ड क्षेत्र में पहुंचना संभावित सुधार की संभावना की ओर संकेत करता है, लेकिन इससे तेजी की गारंटी नहीं मिलती। इसी तरह सोने के तकनीकी संकेतक भी फिलहाल मजबूत रिकवरी की पुष्टि नहीं कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को बाजार के अगले रुझान पर नजर रखनी होगी।

कुल मिलाकर, 3 नवंबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। चांदी का रिकॉर्ड भाव से करीब 2.44 लाख रुपये और सोने का 55 हजार रुपये से अधिक सस्ता होना बाजार की बड़ी हलचल है। अब आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक नीतियां तय करेंगी कि कीमती धातुओं में गिरावट का दौर आगे बढ़ेगा या बाजार में एक बार फिर तेजी देखने को मिलेगी।