लखनऊ। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और चर्चित कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने कथित विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार विवाद भगवान श्रीराम के पिता को लेकर की गई उनकी टिप्पणी से शुरू हुआ है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रही एक वीडियो क्लिप में धीरेंद्र शास्त्री कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं कि भगवान राम के पांच पिता थे। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल मच गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर वीडियो साझा करते हुए धीरेंद्र शास्त्री की आलोचना की और उनके सभी कार्यक्रम रद्द करने की मांग उठाई है।
'राम जी के पांच पिता थे', वायरल वीडियो में क्या कहते सुनाई दिए धीरेंद्र शास्त्री?
वायरल वीडियो क्लिप में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भगवान श्रीराम के पांच पिता होने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं। वह इस बात को विचित्र बताते हुए कथित तौर पर कहते हैं कि इसे स्वीकार करना मुश्किल है, लेकिन यह सत्य है। वह यह भी कहते हैं कि इस बात का उल्लेख किसी लेख में नहीं मिलेगा और उनसे यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि इसका आधार किस लेख में है।
वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री भगवान दशरथ का उल्लेख करते हुए कहते सुनाई देते हैं कि दशरथ जी के प्राण चले गए, लेकिन भगवान राम ने उनकी अंत्येष्टि क्रिया नहीं की। इसी तर्क को आधार बनाकर वह पांच पिता होने की बात समझाने का प्रयास करते हैं। हालांकि, वायरल वीडियो के इस अंश में पांच पिताओं के नामों का पूरा विवरण सामने नहीं आता है। ऐसे में उनके बयान का संपूर्ण संदर्भ जानने के लिए पूरी कथा और वक्तव्य को देखना जरूरी है।
अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर जताई कड़ी नाराजगी
धीरेंद्र शास्त्री के कथित बयान पर अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया कि आखिर सनातन विरोधी गतिविधियों में शामिल लोग किसके कहने पर सक्रिय हैं। अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में भगवान श्रीकृष्ण को लेकर पहले सामने आए विवादित वीडियो का भी जिक्र किया।
उन्होंने लिखा, 'ये सनातन विरोधी किसके कहने पर सक्रिय है। पहले भगवान कृष्ण के बारे में विवादित वीडियो आया अब भगवान राम के पिता के बारे अभद्रता की बात प्रसारित हो रही है। इसके राजनीतिक आकाओं को ये सब मंजूर होगा, हमें अंश मात्र भी स्वीकार्य नहीं है।'
सपा अध्यक्ष ने आगे मांग की कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के अपराध में ऐसे व्यक्ति के सभी कार्यक्रम रद्द किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अब सच्चे सनातनी इनकी पर्ची लिखेंगे। अखिलेश यादव की इस प्रतिक्रिया के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
पहले भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की तुलना को लेकर भी हुआ था विवाद
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह कथित बयान ऐसे समय सामने आया है, जब इससे पहले भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना को लेकर भी विवाद हो चुका है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री की एक टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था।
इस टिप्पणी पर संत समाज के एक वर्ग ने आपत्ति जताई थी। विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच किसी प्रकार का भेद पैदा करने का इरादा नहीं था। उन्होंने कहा था कि यदि उनकी बातों से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए क्षमा मांगते हैं।
उन्होंने अपनी टिप्पणी को भक्ति परंपरा और ब्रज की प्रेमपूर्ण अभिव्यक्ति के संदर्भ में बताया था। साथ ही स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य किसी भगवान का अपमान करना या दोनों अवतारों के बीच भेद पैदा करना नहीं था।
श्रीकृष्ण के वीडियो पर भी अखिलेश यादव ने उठाए थे सवाल
भगवान श्रीकृष्ण को लेकर सामने आए वीडियो पर भी अखिलेश यादव ने सोमवार शाम एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने सुदर्शन चक्रधारी भगवान श्रीकृष्ण का वीडियो साझा करते हुए धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधा था।
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है कि कोई राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्ति सनातन समाज की एकता को तोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच अपमानजनक तुलना करके एक अवतार को दूसरे से बेहतर बताने की कोशिश पर सवाल उठाए थे।
सपा अध्यक्ष ने कहा था कि दोनों ही लोक के रक्षक और लोक को आनंद देने वाले अवतार हैं। ऐसे में उनके बीच गरिमाहीन तुलना करने का क्या औचित्य है, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने इस तरह की टिप्पणियों को सनातन समाज के खिलाफ गहरी साजिश बताते हुए इसकी आलोचना की थी।
सभी राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों से एकजुट होने की अपील
अखिलेश यादव ने अपनी पिछली पोस्ट में यह भी कहा था कि धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे विषयों पर सभी राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों को एकजुट होकर आपत्ति जतानी चाहिए। उनके अनुसार, यदि इस तरह की गतिविधियों पर रोक नहीं लगी तो समाज में अशांति, असंतोष और आपसी वैमनस्य का माहौल पैदा हो सकता है।
उन्होंने इसे अक्षम्य पाप बताते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। साथ ही सवाल उठाया था कि जो लोग खुद को सनातन धर्म का ठेकेदार बताते हैं, वे ऐसे मामलों पर चुप क्यों हैं। अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया था कि किसी भी धर्म, मजहब, संप्रदाय, आराध्य या महापुरुष के प्रति अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।
धार्मिक बयानों पर बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कथित बयान और अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद धार्मिक आस्था, सार्वजनिक वक्तव्यों की मर्यादा और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ अखिलेश यादव इस तरह की टिप्पणियों को सनातन समाज की एकता के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं, वहीं इससे पहले धीरेंद्र शास्त्री भगवान राम और कृष्ण के बीच भेद पैदा करने के आरोपों को खारिज कर चुके हैं।
फिलहाल भगवान श्रीराम के पांच पिता होने संबंधी कथित बयान को लेकर विवाद का केंद्र वायरल वीडियो बना हुआ है। पूरे वक्तव्य और उसके संदर्भ को सामने रखे बिना किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। हालांकि, इस घटनाक्रम ने एक बार फिर धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों की मर्यादा और उनके राजनीतिक प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
