अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देशभर में योग कार्यक्रमों की धूम है। आज योग न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हालांकि आधुनिक भारत में योग को लोकप्रिय बनाने और इसे आम लोगों तक पहुंचाने में योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी का योगदान बेहद अहम माना जाता है। बिहार के मधुबनी में जन्मे धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने योग को घर-घर तक पहुंचाने का काम किया और 1970 व 1980 के दशक में देश के सबसे चर्चित योग गुरुओं में शामिल रहे। वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योग गुरु भी थे और दूरदर्शन के माध्यम से लाखों लोगों को योग सिखाते थे।

Source : NDTV
भारत के पहले सेलिब्रिटी योग गुरु माने जाते थे धीरेंद्र ब्रह्मचारी
बिहार के मधुबनी से निकलकर धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने योग को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया। दिल्ली उनकी प्रमुख कर्मस्थली रही, जहां दक्षिण दिल्ली की फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित उनका आवास योग साधना का केंद्र माना जाता था। यहां नेता, उद्योगपति और समाज के कई प्रभावशाली लोग योग सीखने पहुंचते थे। उनकी व्यस्त दिनचर्या और लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग उनसे कुछ मिनट की मुलाकात के लिए भी लंबे समय तक इंतजार करते थे। उस दौर में उन्हें भारत का पहला सेलिब्रिटी योग गुरु माना जाता था। योग के माध्यम से वे लोगों को न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक शांति की राह भी दिखाते थे।
दूरदर्शन से बदली योग को लेकर लोगों की सोच
धीरेंद्र ब्रह्मचारी का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली माना जाता था। उनकी लंबी कद-काठी और तेजस्वी व्यक्तित्व लोगों को आकर्षित करता था। वर्ष 1978 से 1983 के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित उनके योग कार्यक्रम ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। कार्यक्रम में वे विभिन्न योगासन सिखाते थे और दूरदर्शन के माध्यम से योग को लाखों घरों तक पहुंचाते थे। उस समय आम धारणा थी कि योग केवल बुजुर्गों के लिए है, लेकिन धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने इस सोच को बदला और युवाओं को भी योग के प्रति प्रेरित किया।
नेहरू और इंदिरा गांधी से रहा विशेष जुड़ाव
धीरेंद्र ब्रह्मचारी का गांधी परिवार से गहरा संबंध था। वे इंदिरा गांधी को नियमित रूप से योग सिखाते थे और सफदरजंग रोड स्थित प्रधानमंत्री आवास पर प्रतिदिन योग कक्षाएं लेने जाते थे। कड़ाके की सर्दी में भी उनका यह क्रम नहीं टूटता था। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी योग के प्रति सजग थे और धीरेंद्र ब्रह्मचारी की योग संबंधी जानकारी से प्रभावित थे। बताया जाता है कि नेहरू शीर्षासन का अभ्यास करते थे और उनसे योग के विभिन्न पहलुओं को समझते थे। आर.के. धवन, बूटा सिंह और यशपाल कपूर जैसे कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भी उनके मार्गदर्शन में योग सीखा।
स्कूलों तक पहुंचाया योग, शिक्षकों को मिली नई पहचान
धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने योग को केवल आश्रमों और केंद्रों तक सीमित नहीं रहने दिया। उनके प्रयासों से केंद्रीय विद्यालयों में योग शिक्षकों की नियुक्ति शुरू हुई और योग को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। योग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने से बच्चों को शुरुआती शिक्षा के साथ ही योग की जानकारी मिलने लगी। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय तक योग को खेल का दर्जा दिलाने और इसे व्यापक पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए।
विमान हादसे में हुआ दुखद निधन
9 जून 1994 को 70 वर्ष की आयु में धीरेंद्र ब्रह्मचारी का निधन एक विमान हादसे में हो गया। जम्मू-कश्मीर के मंतलाई स्थित अपने आश्रम जाते समय उनका विमान वहां बनी हवाई पट्टी पर उतरते वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में धीरेंद्र ब्रह्मचारी और उनके पायलट दोनों की मृत्यु हो गई। आज जब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देश और दुनिया में योग का महत्व बढ़ रहा है, तब भारत में योग को लोकप्रिय बनाने में धीरेंद्र ब्रह्मचारी के योगदान को भी याद किया जाता है।
