नई दिल्ली। महिलाओं के बीच अक्सर यह बात कही जाती है कि अगर 35 साल की उम्र तक मां नहीं बनीं तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। कई महिलाओं को बच्चे न होने या देर से मां बनने को लेकर इस तरह की बातें सुननी पड़ती हैं। लेकिन क्या 35 वर्ष की उम्र तक बच्चा न होने का मतलब यह है कि महिला को ब्रेस्ट कैंसर हो जाएगा? डॉक्टर मिताली ने इस दावे पर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया है कि इस तरह महिलाओं को डराना सही नहीं है। उनके मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कई अलग-अलग कारकों से जुड़ा होता है और केवल बच्चे न होने के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी महिला को यह बीमारी होगी।
‘35 की उम्र हो गई और बच्चा नहीं हुआ तो कैंसर होगा’—क्या यह सच है?
डॉक्टर मिताली ने एक वीडियो के माध्यम से इस मुद्दे पर बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें भी कभी-कभी ऐसी बातें सुननी पड़ी हैं कि 35 वर्ष की उम्र तक बच्चा नहीं हुआ तो ब्रेस्ट कैंसर हो जाएगा। उन्होंने महिलाओं को इस तरह के डर और तानों से बचने की सलाह देते हुए कहा कि किसी महिला के बच्चे न होने को ब्रेस्ट कैंसर होने की निश्चित वजह मानना सही नहीं है।
बच्चे न होने से जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन कैंसर होना तय नहीं
डॉक्टर मिताली के अनुसार, जिन महिलाओं के कभी बच्चे नहीं होते, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कुछ हद तक बढ़ सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि ऐसी हर महिला को ब्रेस्ट कैंसर होगा। यानी 35 वर्ष की उम्र तक मां नहीं बनने और ब्रेस्ट कैंसर के बीच ऐसा सीधा संबंध नहीं है, जिसके आधार पर किसी महिला के लिए बीमारी की निश्चित भविष्यवाणी की जा सके।
उम्र और पारिवारिक इतिहास भी महत्वपूर्ण कारक
ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को समझने के लिए महिला की उम्र के साथ उसके पारिवारिक इतिहास को भी ध्यान में रखना जरूरी है। डॉक्टर मिताली ने बताया कि परिवार में मां, मौसी या नानी समेत करीबी रिश्तेदारों में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास रहा है या नहीं, यह भी जोखिम को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल मातृत्व की स्थिति के आधार पर ब्रेस्ट कैंसर का खतरा तय करना उचित नहीं है।
BRCA1 और BRCA2 जीन में बदलाव का भी संबंध
ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम से जुड़े महत्वपूर्ण कारकों में कुछ आनुवंशिक बदलाव भी शामिल हैं। डॉक्टर मिताली ने BRCA1 और BRCA2 जैसे जेनेटिक म्यूटेशन का उल्लेख किया। इन जीन में कुछ बदलाव होने पर ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम प्रभावित हो सकता है। इसी कारण कुछ महिलाओं के लिए पारिवारिक स्वास्थ्य इतिहास और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर जोखिम का आकलन महत्वपूर्ण हो सकता है।
पहले ब्रेस्ट से जुड़ी बीमारी हुई है तो भी ध्यान जरूरी
यदि किसी महिला को पहले ब्रेस्ट से जुड़ी कोई समस्या या कंडीशन रह चुकी है, तो यह भी उसके भविष्य के जोखिम को समझने में एक महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है। डॉक्टर मिताली ने ब्रेस्ट से जुड़ी पिछली कंडीशन को भी उन कारकों में शामिल किया, जिनका ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम का आकलन करते समय ध्यान रखा जाता है।
शराब और मोटापा भी प्रभावित कर सकते हैं जोखिम
डॉक्टर मिताली ने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम केवल उम्र, गर्भधारण या पारिवारिक इतिहास तक सीमित नहीं है। शराब का सेवन और मोटापा भी जोखिम को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कई हार्मोनल और प्रजनन संबंधी कारक भी भूमिका निभा सकते हैं।
महिलाओं को डराने के बजाय सही जानकारी जरूरी
35 वर्ष की उम्र तक मां नहीं बनने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का डर दिखाना सही नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्चे न होना कुछ महिलाओं में जोखिम को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसे बीमारी होने की निश्चित वजह नहीं माना जा सकता। ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को समझने के लिए उम्र, पारिवारिक इतिहास, आनुवंशिक कारक, पहले की ब्रेस्ट कंडीशन, शराब, मोटापा तथा अन्य हार्मोनल और प्रजनन संबंधी कारकों को एक साथ देखा जाता है।
