नई दिल्ली। दोपहर में कुछ देर आंखें बंद करके आराम करना आमतौर पर शरीर और दिमाग को तरोताजा करने वाला माना जाता है। लेकिन कई लोगों के साथ इसका उलटा होता है। थोड़ी देर की झपकी लेने के बाद जैसे ही आंख खुलती है, सिर भारी लगने लगता है या तेज सिरदर्द शुरू हो जाता है। कई बार यह दर्द इतना परेशान करने वाला होता है कि दिनभर की दिनचर्या प्रभावित हो जाती है। बार-बार ऐसा होने पर इसे केवल थकान मानकर नजरअंदाज करने के बजाय इसके संभावित कारणों पर ध्यान देना जरूरी है।
झपकी के बाद सिरदर्द की कई वजहें हो सकती हैं
झपकी के बाद सिरदर्द होने का कोई एक कारण नहीं होता। नींद से जुड़ी परेशानियां, सांस लेने में दिक्कत, दांत पीसने की आदत, शरीर में पानी की कमी, खाली पेट सोना और गलत मुद्रा में आराम करना इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं। नींद की गुणवत्ता और सोने-जागने का समय भी इस समस्या से जुड़ा हो सकता है।
नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, नींद से संबंधित समस्याओं वाले लोगों में सिरदर्द की समस्या आम लोगों की तुलना में दो से आठ गुना अधिक देखी जाती है। इसलिए अगर हर बार या अक्सर झपकी लेने के बाद सिरदर्द होता है, तो अपनी नींद की आदतों पर गौर करना उपयोगी हो सकता है।
खर्राटे सिर्फ आवाज नहीं, नींद की समस्या का संकेत भी हो सकते हैं
झपकी के बाद सिरदर्द की एक संभावित वजह सोते समय सांस लेने में परेशानी हो सकती है। जिन लोगों को तेज खर्राटे आते हैं, उनमें कभी-कभी नींद के दौरान सांस से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद न मिलने से जागने के बाद सिरदर्द महसूस हो सकता है।
अगर खर्राटों के साथ रात में बार-बार नींद टूटती है, नींद के दौरान सांस रुकने जैसा महसूस होता है या दिन में अत्यधिक नींद आती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेकर कारण की जांच कराना उचित रहता है।
सोते समय दांत पीसने की आदत भी बन सकती है वजह
कुछ लोगों को नींद में अनजाने में दांत पीसने या जबड़े को कसकर दबाने की आदत होती है। इसे स्लीप ब्रक्सिज्म कहा जाता है। इस दौरान जबड़े की मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ सकता है।
इसके कारण सुबह या झपकी के बाद जबड़े में जकड़न, दांतों में दर्द या सिरदर्द महसूस हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को सोकर उठने के बाद बार-बार जबड़े में दर्द या दांतों में संवेदनशीलता के साथ सिरदर्द होता है, तो दांत पीसने की समस्या की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
गलत तकिया और सोने की मुद्रा भी कर सकती है परेशान
दोपहर की झपकी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला तकिया, सोने की स्थिति और शरीर का झुकाव भी महत्वपूर्ण है। बहुत ऊंचा या बहुत नीचा तकिया गर्दन को असामान्य स्थिति में रख सकता है। इसी तरह लंबे समय तक गलत मुद्रा में लेटने से गर्दन और सिर के आसपास की मांसपेशियों में तनाव पैदा हो सकता है।
जो लोग लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करते हैं या दिनभर वाहन चलाते हैं, उनमें गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर पहले से तनाव हो सकता है। ऐसी स्थिति में गलत मुद्रा में झपकी लेने के बाद यह तनाव और बढ़ सकता है और सिरदर्द महसूस हो सकता है।
जरूरत से ज्यादा देर तक सोना भी बन सकता है परेशानी
दोपहर की झपकी का उद्देश्य थोड़े समय के लिए आराम करना है, लेकिन अगर झपकी जरूरत से ज्यादा लंबी हो जाए तो कुछ लोगों में जागने के बाद सिरदर्द या भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए अपनी जरूरत और दिनचर्या के अनुसार झपकी की अवधि को संतुलित रखना महत्वपूर्ण है।
सोने-जागने के समय में बार-बार बड़ा बदलाव करने से भी नींद की प्राकृतिक लय प्रभावित हो सकती है। नियमित नींद का समय बनाए रखना अच्छी नींद की आदतों का हिस्सा माना जाता है।
पानी की कमी और खाली पेट सोना भी हो सकता है कारण
अगर शरीर में पानी की कमी है और इसी स्थिति में आप सो जाते हैं, तो जागने के बाद सिरदर्द या कमजोरी महसूस हो सकती है। डिहाइड्रेशन के साथ मुंह और होंठ सूखना, चक्कर आना और पेशाब का रंग गहरा होना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
इसी तरह लंबे समय तक कुछ न खाने के बाद सोने से भी कुछ लोगों को असहजता या सिरदर्द हो सकता है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और अपनी नियमित भोजन व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।
सिरदर्द से बचने के लिए नींद की आदत सुधारें
झपकी के बाद होने वाले सिरदर्द से राहत पाने का तरीका उसकी वजह पर निर्भर करता है। अगर समस्या गलत नींद की आदतों से जुड़ी है, तो रोजमर्रा की नींद की दिनचर्या में सुधार किया जा सकता है। आरामदायक और सही ऊंचाई वाला तकिया इस्तेमाल करना तथा गर्दन को प्राकृतिक स्थिति में रखना भी मददगार हो सकता है।
इसके अलावा कैफीन का सेवन कम करना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और दिन में बहुत लंबी झपकी लेने से बचना नींद की बेहतर आदतों का हिस्सा हो सकता है। सोने से पहले शरीर और दिमाग को आराम देने वाली दिनचर्या अपनाना भी उपयोगी हो सकता है।
बार-बार समस्या हो तो सिर्फ दर्द दबाने के बजाय वजह तलाशें
अगर झपकी लेने के बाद कभी-कभार हल्का सिरदर्द होता है और आराम या पानी पीने के बाद ठीक हो जाता है, तो अपनी दिनचर्या और नींद की आदतों पर ध्यान दिया जा सकता है। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है या इसके साथ खर्राटे, नींद में सांस लेने में परेशानी, जबड़े में दर्द अथवा दांत पीसने जैसे लक्षण मौजूद हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि नींद से संबंधित किसी समस्या की आगे जांच आवश्यक है या स्लीप स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।
