नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश और भारत के बीच शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। बांग्लादेश की ओर से अब भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों में सुधार को शेख हसीना की वापसी से जोड़ते हुए इसे महत्वपूर्ण शर्त बताया गया है। ढाका की ओर से शेख हसीना के साथ अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर और पार्टी के अन्य नेताओं के प्रत्यर्पण की मांग भी दोहराई गई है।
शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर फिर तेज हुई मांग
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना जुलाई 2023 में हुए हिंसक छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश की नई सरकार लगातार भारत से उनकी वापसी की मांग करती रही है। अब इस मुद्दे को दोनों देशों के संबंधों से जोड़कर ढाका की ओर से नया बयान सामने आया है।
बांग्लादेश का कहना है कि दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य और बेहतर बनाने की दिशा में शेख हसीना का प्रत्यर्पण महत्वपूर्ण विषय होगा। इसके साथ ही ढाका ने अवामी लीग के अन्य नेताओं को भी वापस भेजने की मांग की है।
भारत के सामने रखी गई प्रत्यर्पण की शर्त
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सूचना एवं प्रसारण मामलों के सलाहकार जाहेद उर रहमान ने बुधवार को प्रेस ब्रीफिंग में इस मुद्दे पर बांग्लादेश का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि शेख हसीना और अवामी लीग के अन्य नेताओं का प्रत्यर्पण दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की दिशा में एक अहम शर्त होगी।
जाहेद उर रहमान के अनुसार, इस विषय पर ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के साथ हुई बैठक में भी चर्चा की गई थी। इससे साफ है कि शेख हसीना का प्रत्यर्पण बांग्लादेश की वर्तमान सरकार के लिए भारत के साथ संबंधों से जुड़े प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
शेख हसीना को सुनाई जा चुकी है मौत की सजा
इस बीच बांग्लादेश में शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। उन पर छात्र आंदोलन के दौरान दमन से जुड़े आरोप लगाए गए और उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी माना गया। हालांकि, शेख हसीना ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों के बीच बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई है।
भारत में शरण लेने के बाद पिछले महीने शेख हसीना ने पहली बार मीडिया से लाइव बातचीत भी की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि वह अवामी लीग के अन्य नेताओं के साथ दिसंबर में बांग्लादेश जा सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके संबंध में अंतिम फैसला बांग्लादेश की जनता करेगी कि वह अपराधी हैं या नहीं।
प्रत्यर्पण पर भारत का रुख क्या है?
शेख हसीना की वापसी को लेकर बांग्लादेश की ओर से लगातार मांग किए जाने के बावजूद भारत ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का रुख अपनाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत का कहना है कि प्रत्यर्पण से जुड़े कानूनों और संबंधित पहलुओं की जांच के बाद ही इस विषय पर विचार किया जाएगा।
इस वजह से शेख हसीना का प्रत्यर्पण केवल राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच लागू कानूनी प्रक्रियाओं से भी जुड़ा हुआ मामला है। बांग्लादेश की मांग और भारत की कानूनी प्रक्रिया के बीच आगे क्या रुख सामने आता है, इस पर दोनों देशों की नजर बनी हुई है।
तारिक रहमान ने अब तक भारत से क्यों बनाई दूरी?
शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर बांग्लादेश के सख्त रुख के बीच प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, तारिक रहमान को भारत की ओर से यात्रा के लिए निमंत्रण मिलने के बावजूद उन्होंने अब तक भारत का दौरा नहीं किया है।
तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भारत से मिले निमंत्रण के बावजूद उन्होंने भारत के बजाय चीन की यात्रा की थी। इसके बाद भारत ने हाल ही में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने के लिए बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया था। हालांकि, तारिक रहमान इस कार्यक्रम में भी नई दिल्ली नहीं पहुंचे।
दिसंबर में भारत आ सकते हैं तारिक रहमान
अब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान दिसंबर में भारत की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि, उनके भारत दौरे को लेकर अभी तक अंतिम स्थिति सामने नहीं आई है।
एक तरफ बांग्लादेश शेख हसीना के प्रत्यर्पण को दोनों देशों के संबंधों से जोड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री तारिक रहमान के संभावित भारत दौरे की चर्चा दोनों देशों के भविष्य के संबंधों को लेकर अहम मानी जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में ढाका और नई दिल्ली के बीच बातचीत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।
शेख हसीना का मामला क्यों बना अहम मुद्दा?
शेख हसीना के भारत में रहने और बांग्लादेश की ओर से उनके प्रत्यर्पण की मांग के कारण यह मामला दोनों देशों के बीच लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब बांग्लादेश सरकार के प्रतिनिधि द्वारा इसे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की शर्त बताए जाने से इस मुद्दे की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
बांग्लादेश की ओर से शेख हसीना तथा अवामी लीग के अन्य नेताओं की वापसी की मांग के बीच भारत को अपने कानूनी और द्विपक्षीय पहलुओं पर विचार करना होगा। वहीं बांग्लादेश की सरकार के लिए यह मुद्दा उसके वर्तमान राजनीतिक रुख का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।
