ere | Source: ererनई दिल्ली। अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक अहम योजना तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने की तैयारी में है, जिसके तहत अग्निवीरों को चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अचानक रोजगार की तलाश में नहीं निकलना पड़ेगा। खास तौर पर सेना में स्थायी किए जाने वाले 25 प्रतिशत अग्निवीरों की योग्यता सूची उनके चार साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही जारी किए जाने की तैयारी है।

यह बदलाव अग्निपथ योजना के तहत सेना में शामिल हुए पहले बैच के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैच में शामिल 19 हजार से अधिक अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है और वे जनवरी 2027 में सेवामुक्त होने वाले हैं। इन अग्निवीरों की भर्ती एक जनवरी 2023 को हुई थी।

पहले क्या व्यवस्था थी, अब क्या बदलेगा?

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, अग्निवीरों के लिए एक अलग ‘एग्जिट प्लान’ तैयार किया गया है। मौजूदा योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा में बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवामुक्त किया जाना है।

अब सरकार की तैयारी इस प्रक्रिया को सेवाकाल खत्म होने से पहले पूरा करने की है। इसके लिए आंतरिक परीक्षा आयोजित कर योग्यता और मेरिट सूची तैयार की जाएगी। सेना में स्थायी किए जाने वाले 25 प्रतिशत अग्निवीरों के नाम कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही सामने लाने की योजना है।

पहले विचार यह था कि चार साल की सेवा पूरी होने के बाद सभी अग्निवीर सेवामुक्त होंगे और इसके बाद 25 प्रतिशत योग्य अग्निवीरों की दोबारा भर्ती की जाएगी। अब इस व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी की जा रही है, ताकि चयन प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा सके।

75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए भी नौकरी का रास्ता

सबसे महत्वपूर्ण पहलू उन 75 प्रतिशत अग्निवीरों से जुड़ा है, जिन्हें चार साल बाद सेना से सेवामुक्त किया जाएगा। सरकार की योजना के मुताबिक, इन अग्निवीरों के लिए अर्धसैनिक बलों और पुलिस बलों में रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जा रही है।

इसके लिए गृह मंत्रालय के विशेष पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है। सरकार का उद्देश्य बताया गया है कि अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल समाप्त होने तक उन्हें अर्धसैनिक बलों, पुलिस या अन्य सरकारी विभागों में उपलब्ध अवसरों से जोड़ा जा सके।

इस व्यवस्था से सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को सैन्य सेवा के बाद रोजगार के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत कम हो सकती है।

25 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना में रखने का प्रावधान

अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत को नियमित कैडर में बनाए रखने का प्रावधान है। इसके लिए चयन प्रक्रिया में उनकी योग्यता और मेरिट को आधार बनाया जाना है।

रक्षा मंत्रालय की प्रस्तावित व्यवस्था में इसी चयन प्रक्रिया को चार साल की सेवा समाप्त होने से पहले पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे सेना में बनाए जाने वाले अग्निवीरों को लेकर स्थिति पहले ही स्पष्ट हो सकेगी।

बाकी अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण

सेवामुक्त होने वाले 75 प्रतिशत अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में आरक्षण तथा प्राथमिकता से जुड़े प्रावधान किए गए हैं। इसका उद्देश्य सैन्य सेवा के बाद उनके लिए रोजगार के वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराना है।

अग्निवीरों के लिए अलग-अलग सरकारी सेवाओं में पहले से आरक्षण की व्यवस्थाएं भी की गई हैं। इनमें अर्धसैनिक बलों से लेकर रेलवे तक के अवसर शामिल हैं।

बीएसएफ से असम राइफल्स तक 50 प्रतिशत आरक्षण

प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और असम राइफल्स में पूर्व अग्निवीरों के लिए सिपाही तथा राइफलमैन के पदों पर 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।

इन भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों को लिखित परीक्षा, शारीरिक मानक परीक्षण और शारीरिक दक्षता परीक्षा से भी छूट दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। इससे सैन्य प्रशिक्षण और सेवा का अनुभव रखने वाले अग्निवीरों के लिए इन बलों में भर्ती का रास्ता अलग तरीके से तैयार किया गया है।

रेलवे में भी रोजगार के अवसर

अग्निवीरों के लिए रेलवे में भी क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। इसके तहत श्रेणी-2 और उससे ऊपर के पदों में 5 प्रतिशत तथा श्रेणी-1 के पदों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित किया गया है।

इस तरह अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीरों के लिए रोजगार के विकल्प केवल सेना तक सीमित नहीं रहेंगे। केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों तथा सुरक्षा बलों में उपलब्ध आरक्षण और प्राथमिकताओं के जरिए उन्हें आगे के अवसर देने की व्यवस्था की जा रही है।

जनवरी 2027 में सामने आएगी पहली बड़ी तस्वीर

अग्निपथ योजना के तहत सेना में शामिल पहले बैच के 19 हजार से अधिक अग्निवीर जनवरी 2027 में चार साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इसलिए उनके सेवामुक्त होने से पहले चयन और पुनर्वास की प्रक्रिया को लेकर सरकार की तैयारियां महत्वपूर्ण हो गई हैं।

यदि प्रस्तावित ‘एग्जिट प्लान’ के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो सेना में बनाए जाने वाले 25 प्रतिशत अग्निवीरों की मेरिट सूची कार्यकाल पूरा होने से पहले सामने आ सकती है। वहीं, बाकी 75 प्रतिशत के लिए अर्धसैनिक बलों, पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में उपलब्ध अवसरों के जरिए रोजगार का रास्ता तैयार किया जा सकता है।

नौकरी को लेकर अनिश्चितता कम करने पर जोर

पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यही बताया जा रहा है कि चार साल की सैन्य सेवा समाप्त होने के बाद अग्निवीरों को रोजगार के लिए पूरी तरह नए सिरे से शुरुआत न करनी पड़े। एक तरफ 25 प्रतिशत को नियमित सैन्य सेवा में बनाए रखने की प्रक्रिया पहले पूरी करने की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों के लिए विभिन्न सरकारी सेवाओं में आरक्षण और प्राथमिकताओं का इस्तेमाल करने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

इस प्रस्तावित व्यवस्था के लागू होने पर अग्निवीरों के पहले बैच के लिए यह प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है। जनवरी 2027 में सेवामुक्त होने वाले पहले बैच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि सरकार की तैयार की जा रही व्यवस्था किस तरह जमीन पर लागू होती है।