ere | Source: errनई दिल्ली। अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को समय से पहले जेल से बाहर आने की उम्मीद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में सजा काट रहे सलेम की रिहाई की मांग को देश की सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया। सलेम ने दावा किया था कि वह 25 साल की सजा पूरी कर चुका है और अब उसे जेल में रखने का कोई आधार नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दलील को स्वीकार नहीं किया।

2030 तक जेल में रहना होगा?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सलेम की उस दलील पर सवाल उठाया, जिसके आधार पर वह समय से पहले रिहाई चाहता था। अदालत ने कहा कि अगर 11 नवंबर 2005 से सजा की गणना की जाए तो 25 साल की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है। इस हिसाब से उसकी 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी।

पुर्तगाल में गिरफ्तारी की तारीख पर था पूरा विवाद

अबू सलेम की ओर से दलील दी गई कि उसकी सजा की गणना 18 सितंबर 2002 से की जानी चाहिए। इसी दिन भारत के अनुरोध पर इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे पुर्तगाल में हिरासत में लिया गया था। सलेम का कहना था कि उस अवधि को भी उसकी सजा में शामिल किया जाना चाहिए। यदि ऐसा माना जाता तो उसकी 25 साल की अवधि पहले ही पूरी मानी जा सकती थी।

केंद्र ने बताया क्यों नहीं जुड़ सकता पुराना हिरासत काल

केंद्र सरकार ने सलेम की इस दलील का विरोध किया। सरकार का कहना था कि पुर्तगाल में उसकी हिरासत उस अपराध से संबंधित नहीं थी, जिसके लिए बाद में उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया। सरकार के मुताबिक उसे वहां पासपोर्ट से जुड़े एक अलग अपराध के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था। इसलिए उस अवधि को भारत में मिली सजा के साथ जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

प्रत्यर्पण से पहले भारत ने पुर्तगाल को दिया था भरोसा

अबू सलेम को 1993 के मुंबई बम धमाकों और कारोबारी प्रदीप जैन की हत्या सहित मामलों में मुकदमे का सामना करने के लिए भारत लाया गया था। उसके प्रत्यर्पण के दौरान भारत सरकार ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि उसे 25 साल से अधिक की जेल की सजा नहीं दी जाएगी। बाद में भारतीय अदालतों ने दोनों मामलों में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।

सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में सजा को लेकर दिया था अहम फैसला

ट्रायल कोर्ट से उम्रकैद की सजा मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 13 जुलाई 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने पुर्तगाल को दिए गए भारत के आश्वासन को ध्यान में रखते हुए अबू सलेम की सजा को 25 साल तक सीमित कर दिया था। इसी फैसले को आधार बनाकर सलेम अब समय से पहले रिहाई की मांग कर रहा था।

बॉम्बे हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत

समय से पहले जेल से बाहर आने की कोशिश में अबू सलेम ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट ने उसकी रिहाई की मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। लेकिन यहां भी उसकी उम्मीदों को झटका लगा और अदालत ने उसकी याचिका को स्वीकार नहीं किया।

1993 के मुंबई धमाकों में मिली थी उम्रकैद

अबू सलेम को जून 2017 में 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराया गया था। विशेष TADA अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उस पर धमाकों में इस्तेमाल किए जाने वाले हथियार गुजरात से मुंबई पहुंचाने में भूमिका निभाने का आरोप साबित हुआ था। 1993 के इन सिलसिलेवार धमाकों में 257 लोगों की जान गई थी, जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

प्रदीप जैन हत्याकांड में भी हुई थी सजा

अबू सलेम को सिर्फ मुंबई धमाकों के मामले में ही नहीं, बल्कि कारोबारी प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया गया था। इस मामले में उसे 2015 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। दोनों मामलों की सजा और भारत द्वारा पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन के बीच कानूनी स्थिति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।

अब 2030 तक जेल से बाहर आने की राह मुश्किल

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। अदालत के सामने उसकी 25 साल की सजा की गणना 11 नवंबर 2005 से किए जाने की बात प्रमुख रही। ऐसे में नवंबर 2030 से पहले उसकी रिहाई का रास्ता फिलहाल आसान नजर नहीं आ रहा है।