पटना। बिहार में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जांच को लेकर राज्य सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब बिहार सरकार के लोकसेवकों के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू करने से पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। इस संबंध में बिहार सरकार के गृह विभाग की ओर से नई अधिसूचना जारी कर दी गई है।
सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई से पहले सरकार की मंजूरी जरूरी
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी मामले में बिहार सरकार के अधीन काम करने वाले लोकसेवक या राज्य सरकार के नियंत्रण वाले किसी संस्थान के कर्मचारी के खिलाफ सीबीआई जांच का प्रस्ताव आता है, तो एजेंसी सीधे जांच की कार्रवाई शुरू नहीं कर सकेगी। पहले संबंधित मामले का प्रस्ताव बिहार सरकार को भेजना होगा। इसके बाद सरकार मामले की परिस्थितियों और तथ्यों की समीक्षा करेगी और तय करेगी कि सीबीआई को जांच की अनुमति दी जाए या नहीं।
इसका मतलब साफ है कि राज्य सरकार के अधीन आने वाले कर्मचारियों से जुड़े मामलों में सीबीआई की जांच के लिए अब पहले से राज्य की सहमति आवश्यक होगी। सरकार प्रत्येक मामले पर अलग-अलग निर्णय लेने के लिए अधिकृत होगी।
किन मामलों में नहीं लगेगी अनुमति की शर्त?
सरकार की नई अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था हर व्यक्ति पर लागू नहीं होगी। बिहार की सीमा के भीतर काम करने वाले केंद्र सरकार या केंद्र सरकार के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों के मामलों में सीबीआई को ऐसी अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
इसी तरह निजी व्यक्तियों से संबंधित मामलों में भी राज्य सरकार से पूर्व अनुमति की बाध्यता नहीं रखी गई है। यानी सीबीआई को केंद्र सरकार से जुड़े कर्मचारियों और निजी लोगों के खिलाफ अपने अधिकार क्षेत्र के तहत जांच करने की शक्ति पहले की तरह उपलब्ध रहेगी।
राज्य सरकार से जुड़े संस्थानों पर भी लागू होगा नया नियम
नई व्यवस्था का दायरा केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। बिहार सरकार द्वारा नियंत्रित निगम, कंपनी या बैंक तथा राज्य सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त संस्थानों से जुड़े मामलों को भी इसमें शामिल किया गया है।
यदि ऐसे संस्थानों से संबंधित लोकसेवकों के खिलाफ कोई ऐसा अपराध सामने आता है, जो उनके सरकारी कार्य से जुड़ा हुआ है, तो सीबीआई को जांच शुरू करने से पहले बिहार सरकार की अनुमति प्राप्त करनी होगी। इसके लिए एजेंसी को बाकायदा प्रस्ताव भेजना होगा और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही जांच की कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी।
हर मामले पर अलग फैसला लेगी बिहार सरकार
अधिसूचना के मुताबिक सरकार किसी भी मामले में स्वतः अनुमति देने के लिए बाध्य नहीं होगी। सीबीआई की ओर से प्रस्ताव मिलने के बाद संबंधित प्रकरण की समीक्षा की जाएगी और उसके बाद केस के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
यानी एक मामले में सरकार जांच की अनुमति दे सकती है, जबकि किसी दूसरे मामले में परिस्थितियों के आधार पर अलग निर्णय लिया जा सकता है। इसी वजह से नई व्यवस्था को लेकर बिहार में जांच एजेंसी और राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के बीच संतुलन पर चर्चा तेज होने की संभावना है।
पुरानी अधिसूचनाएं हटाईं, नई व्यवस्था प्रभावी
गृह विभाग की आरक्षी शाखा की ओर से जारी अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि इस विषय से संबंधित पूर्व में जारी सभी अधिसूचनाओं को समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब सीबीआई जांच से जुड़े मामलों में अनुमति और अधिकार क्षेत्र का निर्धारण इसी प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
अधिसूचना बिहार सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव कुंदन कुमार के हस्ताक्षर से जारी की गई है। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य के लोकसेवकों से जुड़े उन मामलों पर विशेष नजर रहेगी, जिनमें सीबीआई की जांच का प्रस्ताव सामने आता है।
भ्रष्टाचार से लेकर साइबर अपराध तक जांच का दायरा
सीबीआई को विभिन्न गंभीर अपराधों की जांच के लिए जाना जाता है। केंद्र सरकार या निजी व्यक्तियों से जुड़े मामलों में एजेंसी भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, साइबर अपराध तथा भ्रष्टाचार निवारण कानून से जुड़े मामलों की जांच कर सकती है।
हालांकि बिहार सरकार के कार्य से जुड़े राज्य लोकसेवकों और राज्य सरकार के नियंत्रण वाले संस्थानों के मामलों में नई व्यवस्था के तहत जांच से पहले राज्य सरकार की सहमति आवश्यक होगी।
सीबीआई और राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र पर बढ़ेगी नजर
सीबीआई को देश की प्रमुख केंद्रीय जांच एजेंसियों में माना जाता है। गंभीर अपराध, भ्रष्टाचार और कई संवेदनशील मामलों की जांच के लिए एजेंसी की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। कई मामलों में उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर भी सीबीआई जांच होती है।
बिहार सरकार की नई अधिसूचना के बाद राज्य के लोकसेवकों से जुड़े मामलों में सीबीआई की कार्रवाई किस तरह आगे बढ़ेगी, इस पर अब सबकी नजर रहेगी।
