erer | Source: ererनई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन समारोह में पूरे वंदे मातरम का गायन हुआ तो इसका असर सीधे सियासी गलियारों तक पहुंच गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला समेत कई प्रमुख नेता राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े रहे। हालांकि, कांग्रेस ने अपनी ही सहयोगी नेशनल कांफ्रेंस के इस रुख पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई।

कांग्रेस महासचिव ने सहयोगी दलों को दी अलग राय

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वंदे मातरम के पूरे संस्करण का गायन उस बहुलतावादी और सामंजस्यपूर्ण विचार से मेल नहीं खाता, जिसकी कल्पना स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान की गई थी। उन्होंने सहयोगी दलों से अपील की कि स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा स्वीकार किए गए वंदे मातरम के दो छंदों वाले संस्करण का ही गायन किया जाए। कांग्रेस का तर्क है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम के शुरुआती दो छंदों को अपनाने के पीछे देश की विविधता और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की भावना थी।

नेशनल कांफ्रेंस के रुख ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस नेताओं की मौजूदगी में पूरे वंदे मातरम का गायन कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा करने वाला माना जा रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला का राष्ट्रगीत के दौरान सम्मानपूर्वक खड़ा रहना भी चर्चा का विषय बन गया। कांग्रेस जहां पूरे गीत के गायन को लेकर अपनी आपत्ति जता रही है, वहीं उसके सहयोगी दल के प्रमुख नेताओं का समारोह में अलग रुख दिखाई दिया।

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

कांग्रेस के बयान के बाद बीजेपी ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया। बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वंदे मातरम के पूरे गायन पर आपत्ति जताकर कांग्रेस ने अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट कर दिया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस के कई सहयोगी दल पूरे वंदे मातरम के गायन में शामिल हो रहे हैं, लेकिन कांग्रेस को इस पर आपत्ति है।

‘कांग्रेस के सहयोगी भी उसके साथ नहीं’ का दावा

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसे गठबंधन सहयोगियों के नेताओं की ओर से पूरे वंदे मातरम के गायन में भाग लेने के बावजूद कांग्रेस का विरोधाभासी रुख सामने आया है। उन्होंने इसी आधार पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के अपने सहयोगी भी इस मुद्दे पर उसकी राय से सहमत दिखाई नहीं दे रहे हैं।

कांग्रेस का कहना- फैसले के पीछे थी ऐतिहासिक सोच

कांग्रेस की ओर से लगातार यह तर्क दिया जा रहा है कि वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो छंदों को स्वीकार किए जाने के पीछे तत्कालीन परिस्थितियां और देश की सामाजिक विविधता महत्वपूर्ण कारण थे। पार्टी का कहना है कि उस समय इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्र की एकता, धार्मिक सद्भाव और समावेशी भावना को बनाए रखना था। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि आज भी इस ऐतिहासिक संदर्भ को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

‘21वीं सदी की मुस्लिम लीग’ वाले बयान से बढ़ा विवाद

वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के रुख को लेकर और भी तीखी टिप्पणी की है। सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण को लेकर जिस तरह की आपत्ति जता रही है, उससे उसकी राजनीतिक सोच सामने आती है। उन्होंने कांग्रेस को ‘21वीं सदी की मुस्लिम लीग’ तक कह दिया। बीजेपी नेता ने दावा किया कि कांग्रेस पर धर्मनिरपेक्षता का जो राजनीतिक आवरण है, वह इस विवाद के बाद हटता हुआ दिखाई दे रहा है।

एक गीत ने खोल दिए गठबंधन के भीतर के मतभेद?

वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल राष्ट्रगीत के गायन तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के बीच सहयोग के बावजूद दोनों दलों के नेताओं का इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर कांग्रेस अपने ऐतिहासिक तर्क के आधार पर शुरुआती दो छंदों के गायन की वकालत कर रही है, वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पूरे गीत का गायन हुआ। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा विपक्षी गठबंधन की राजनीति को कितना प्रभावित करता है।