लंदन। भारत के चर्चित कारोबारी विजय माल्या का एक सोशल मीडिया पोस्ट अचानक चर्चा का विषय बन गया है। माल्या ने अपने साथ हुए कथित ‘अन्याय’ का जिक्र करते हुए खुद की तुलना कॉकरोच से की और लिखा कि शायद कॉकरोच की तरफ जिंदगी बेहतर होती। उनके इस बयान ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि वर्ष 2026 में ‘कॉकरोच’ शब्द भारत की सोशल मीडिया राजनीति में एक अलग तरह के प्रतीक के रूप में उभर चुका है।
विजय माल्या ने एक्स पर क्या लिखा?
विजय माल्या ने 9 सितंबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में अपने साथ हुए कथित अन्याय का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा, “मैंने जितनी भी नाइंसाफियां झेली हैं और झेल रहा हूं, उन्हें देखते हुए सोचता हूं कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर हो।”
माल्या के इस पोस्ट के सामने आने के बाद चर्चा शुरू हो गई कि आखिर उन्होंने कॉकरोच का उदाहरण क्यों दिया और उनके बयान का मौजूदा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी सीजेपी से क्या संबंध है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़ा है संदर्भ
वर्ष 2026 में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का एक व्यंग्यात्मक युवा आंदोलन चर्चा में आया है। यह आंदोलन बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और युवाओं की राजनीतिक आवाज जैसे मुद्दों को लेकर सक्रिय रहा है। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके बताए जाते हैं।
इस आंदोलन ने ‘कॉकरोच’ शब्द को एक अलग तरह की व्यंग्यात्मक पहचान के रूप में अपनाया। इसकी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से कुछ बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने के बाद पैदा हुआ विवाद बताया गया है।
अपमानजनक शब्द को आंदोलन की पहचान बनाया
कॉकरोच जनता पार्टी ने कथित तौर पर अपमान के रूप में इस्तेमाल किए गए ‘कॉकरोच’ शब्द को ही अपने लिए व्यंग्यात्मक पहचान में बदल दिया। शुरुआत ऑनलाइन गतिविधियों से हुई और बाद में यह आंदोलन सड़कों पर भी दिखाई देने लगा।
शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन के समर्थकों ने प्रदर्शन किए। खबर के अनुसार, जुलाई में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दबाव के बीच इस्तीफा दे दिया था। इसी वजह से सीजेपी का नाम राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं में लगातार बना हुआ है।
माल्या ने खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर भी जताई आपत्ति
विजय माल्या लंबे समय से भारत में अपने खिलाफ चल रही कानूनी और वित्तीय कार्रवाई को लेकर अपनी बात रखते रहे हैं। हालिया पोस्ट से पहले 8 सितंबर को भी उन्होंने सोशल मीडिया पर खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने को लेकर प्रतिक्रिया दी थी।
माल्या ने कहा था कि जो लोग उन्हें भारत लौटने से इनकार करने वाला ‘भगोड़ा’ कहते हैं, उन्हें यह पता होना चाहिए कि वह वर्ष 1992 से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और वर्तमान में कानूनी तौर पर ब्रिटेन से बाहर जाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने अपने बयान में भारत सरकार की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए।
किंगफिशर एयरलाइंस के बाद बढ़ा विवाद
विजय माल्या कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में गिने जाते थे। वह यूनाइटेड ब्रुअरीज समूह से जुड़े रहे और किंगफिशर एयरलाइंस के प्रवर्तक थे। किंगफिशर एयरलाइंस के वित्तीय संकट के बाद भारतीय बैंकों के बड़े बकाये का मामला सामने आया।
माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और बकाये से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। भारत सरकार की ओर से उन्हें वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया भी चलाई गई।
‘मेरे साथ अन्याय हुआ’ माल्या का दावा
माल्या अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर लगातार असहमति जताते रहे हैं। अपने हालिया बयानों में उन्होंने दावा किया है कि उनकी संपत्तियों से बैंकों और संबंधित एजेंसियों ने उनकी देनदारी से अधिक रकम वसूल की है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, माल्या का दावा है कि करीब 14,131 करोड़ रुपये की उनकी संपत्तियां कुर्क की गई हैं, जबकि वह अपनी देनदारी करीब 6,203 करोड़ रुपये बताते हैं। यह आंकड़ा माल्या की ओर से किया गया दावा है और इसे अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बॉम्बे हाईकोर्ट में भी उठा संपत्ति और वसूली का मामला
अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या की संपत्तियों की कुर्की और बैंक वसूली से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद को समाप्त करने की आवश्यकता पर टिप्पणी की थी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से मामले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
माल्या के वकील की ओर से अदालत में यह कहा गया था कि बैंकों ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है। संपत्तियों की कुर्की, वसूली और माल्या की देनदारी को लेकर उनके दावे और कानूनी प्रक्रिया के बीच यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है।
सीजेपी को लेकर फिर सामने आया कानूनी विवाद
कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी गतिविधियां सितंबर में भी जारी रहीं। सीजेपी समर्थकों ने दिल्ली में संसद मार्ग थाने तक मार्च किया और एक प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग की।
9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल एक कानून छात्र को नोटिस जारी किए जाने के मामले पर संज्ञान लिया। अदालत ने इस मामले में प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही।
गौरव भाटिया ने भी दायर किया मानहानि मुकदमा
सीजेपी से जुड़ा एक और कानूनी विवाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया की ओर से दायर मुकदमे को लेकर है। गौरव भाटिया ने सीजेपी, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।
इस तरह एक ओर विजय माल्या अपने साथ हुए कथित अन्याय का जिक्र करते हुए ‘कॉकरोच’ बनने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यही शब्द एक अलग युवा आंदोलन की पहचान बन चुका है। माल्या के पोस्ट ने इसी वजह से सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि उनके बयान को सीजेपी से सीधे तौर पर जोड़ने से पहले यह ध्यान रखना जरूरी है कि माल्या ने अपने पोस्ट में इस संगठन का कोई प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया है।
