इंदौर। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेता और राज्य के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का चीनी की कीमतों और उसके सेवन को लेकर दिया गया बयान चर्चा में आ गया है। त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच विजयवर्गीय ने कहा कि चीनी की कीमत बहुत अधिक होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को चीनी का सेवन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। मंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।

‘चीनी बहुत महंगी होनी चाहिए’, मंत्री ने क्यों कही यह बात?

बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कैलाश विजयवर्गीय से चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सवाल किया गया। इसके जवाब में उन्होंने दावा किया कि चीनी की कीमतें लगातार कम हो रही हैं। इसी दौरान उन्होंने चीनी के सेवन को स्वास्थ्य से जोड़ते हुए अपनी राय रखी।

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आजकल 90 प्रतिशत लोग मिठाइयां पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने अपने बारे में भी कहा कि वह बिल्कुल मिठाई नहीं खाते हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि चीनी बहुत महंगी होनी चाहिए।

40 साल से अधिक उम्र वालों के लिए चीनी पर पूरी तरह रोक की बात

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि चीनी बच्चों के लिए सरकारी उचित मूल्य की दुकानों पर सस्ती दरों पर मिलनी चाहिए, लेकिन बुजुर्गों को चीनी बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए चीनी के सेवन से बचने की सलाह दी।

मंत्री ने कहा कि डॉक्टर, खासकर आयुर्वेदिक डॉक्टर, 40 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए चीनी का सेवन अच्छा नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति की उम्र 40 साल से अधिक है तो वह कभी-कभी गुड़ खा सकता है, लेकिन चीनी से पूरी तरह परहेज करे।

विजयवर्गीय का यह बयान ऐसे समय आया है जब त्योहारों का मौसम नजदीक है और चीनी की खुदरा कीमतों को लेकर बाजार में चर्चा हो रही है। इसी वजह से उनका बयान राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया।

कांग्रेस ने बयान को बनाया बीजेपी पर हमले का आधार

कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। पटवारी ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सत्ताधारी दल को घेरते हुए विजयवर्गीय के बयान को गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों से जोड़ दिया।

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी महंगाई कम करने के वादे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन अब उसके नेता चीनी की कीमतों को लेकर ऐसे बयान दे रहे हैं, जो गरीबों और मध्यम वर्ग का अपमान और मजाक उड़ाने वाले हैं।

‘चुनाव में लोग देंगे जवाब’, पटवारी का पलटवार

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि देश बीजेपी नेताओं को देख रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनावों में जनता बीजेपी नेताओं को जवाब देगी। पटवारी ने कहा कि तब देखा जाएगा कि उनकी मुस्कान बनी रहती है या वे आंसू बहाते हैं।

कांग्रेस नेता ने इस बयान को महंगाई के मुद्दे से जोड़ते हुए बीजेपी पर राजनीतिक निशाना साधा। चीनी की कीमतों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच पहले से चल रही बहस के बीच यह बयानबाजी अब और तेज हो गई है।

चीनी की कीमतों पर इथेनॉल नीति को लेकर भी विवाद

चीनी की कीमतों के मुद्दे पर विपक्षी दल केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति पर भी सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मात्रा बढ़ाने को चीनी की कीमतों से जोड़ रहा है। उसका आरोप है कि इस नीति के कारण चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है और इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम लोगों पर पड़ रहा है।

हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार की ओर से चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए उद्योग को जिम्मेदार ठहराया गया है। सरकार का कहना है कि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी का स्टॉक उपलब्ध है।

10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति

चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के प्रयासों के बीच सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। इसके बाद मिल-गेट स्तर पर चीनी की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि इसके बावजूद खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं।

सरकार की ओर से उठाए गए इस कदम के बावजूद त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने के कारण खुदरा बाजार में कीमतों को लेकर दबाव बना हुआ है। चीनी की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव ने उपभोक्ताओं के साथ-साथ राजनीतिक दलों का भी ध्यान खींचा है।

26 अगस्त को 65.05 रुपये प्रति किलो रहा औसत भाव

उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार 26 अगस्त को चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले यानी मंगलवार को यही औसत कीमत 63.97 रुपये प्रति किलोग्राम थी।

आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को चीनी के औसत खुदरा भाव में मंगलवार की तुलना में 1 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज हुई। त्योहारों के मौसम में चीनी की मांग बढ़ने के बीच कीमतों में यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मंत्री के बयान और बाजार की कीमतों ने बढ़ाई चर्चा

एक तरफ चीनी की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता सामने आ रही है, वहीं दूसरी तरफ कैलाश विजयवर्गीय ने चीनी के महंगे होने की बात कहते हुए इसे स्वास्थ्य से जोड़ दिया। उन्होंने 40 साल से अधिक उम्र के लोगों को चीनी से परहेज करने की सलाह दी और कभी-कभी गुड़ खाने की बात कही।

उनका यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि चीनी रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं में शामिल है और त्योहारों के समय इसकी मांग और बढ़ जाती है। ऐसे में चीनी की कीमतों को लेकर दिया गया मंत्री का बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

क्या कहा सरकार ने, क्या है विपक्ष का दावा?

चीनी की कीमतों को लेकर सरकार और विपक्ष की दलीलें अलग-अलग हैं। विपक्षी दल इथेनॉल मिश्रण से जुड़ी नीति को कीमतों में बढ़ोतरी का कारण बता रहे हैं, जबकि सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कीमतों में बढ़ोतरी के लिए उद्योग को जिम्मेदार बताया है। सरकार का यह भी कहना है कि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

इसी बीच सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी, जिसके बाद मिल-गेट कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट बताई गई। हालांकि खुदरा बाजार में कीमतों का स्तर अभी भी ऊंचा है।

बयान पर सियासत तेज, कीमतों पर भी नजर

कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने चीनी की कीमतों से जुड़े आर्थिक मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। बीजेपी की ओर से मंत्री ने चीनी के सेवन को मुख्य रूप से स्वास्थ्य से जोड़कर अपनी बात रखी, जबकि कांग्रेस ने इसे महंगाई और आम लोगों की परेशानी से जोड़ते हुए सरकार पर हमला किया है।

इस पूरे विवाद के बीच चीनी की वास्तविक खुदरा कीमतों के आंकड़े भी सामने हैं। 26 अगस्त को अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जबकि इससे एक दिन पहले यह 63.97 रुपये प्रति किलोग्राम था।